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ट्रंप-शी बैठक में उइगर मुद्दा गायब, 10 लाख से अधिक हिरासत में बंद लोगों का सवाल अनुत्तरित

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ट्रंप-शी बैठक में उइगर मुद्दा गायब, 10 लाख से अधिक हिरासत में बंद लोगों का सवाल अनुत्तरित

सारांश

ट्रंप-शी बैठक में उइगर संकट एक बार फिर एजेंडे से बाहर रहा — न वॉशिंगटन ने बोला, न बीजिंग ने। कांग्रेसी प्रस्तावों और एक्टिविस्टों की अपीलों के बावजूद कोई प्रगति नहीं। शिनजियांग में कथित तौर पर 10 लाख से अधिक लोग हिरासत में हैं और उइगर समुदाय में अमेरिकी राजनय से मोहभंग गहरा हो रहा है।

मुख्य बातें

ट्रंप-शी बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयानों में उइगर मानवाधिकार मुद्दे का कोई उल्लेख नहीं किया गया।
कथित तौर पर 2017 से चीन के शिनजियांग क्षेत्र में 10 लाख से अधिक तुर्किक जातीय समुदाय के लोग हिरासत में हैं।
उइगर एक्टिविस्ट रुशान अब्बास की बहन गुलशन अब्बास लगभग आठ वर्षों से चीनी हिरासत में हैं।
अमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स ने ट्रंप की बीजिंग यात्रा से पहले छह हिरासती लोगों की रिहाई के लिए दबाव बनाने का प्रस्ताव पारित किया था।
एक्टिविस्ट सालिह हुदयार ( 33 वर्ष ) सहित कई उइगर लोगों ने कहा कि अमेरिकी प्रयासों से बदलाव की उम्मीद अब कम हो गई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हाल ही में हुई बैठक के बाद वॉशिंगटन और बीजिंग दोनों की ओर से जारी आधिकारिक बयानों में उइगर मानवाधिकार संकट का कोई उल्लेख नहीं किया गया। 25 जून 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, कथित तौर पर 10 लाख से अधिक तुर्किक जातीय समुदाय के लोगों — जिनमें बहुसंख्यक उइगर हैं — को चीन के शिनजियांग क्षेत्र में 2017 से हिरासत में रखा गया है, फिर भी यह मुद्दा शीर्ष स्तरीय वार्ता से बाहर ही रहा।

बैठक से क्या निकला

ट्रंप की बीजिंग यात्रा से पूर्व अमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स ने प्रस्ताव पारित किए थे, जिनमें राष्ट्रपति से चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा हिरासत में लिए गए छह व्यक्तियों की रिहाई के लिए दबाव बनाने का आग्रह किया गया था। इनमें उइगर एक्टिविस्ट रुशान अब्बास की बहन गुलशन अब्बास भी शामिल हैं, जो कथित तौर पर लगभग आठ वर्षों से चीनी हिरासत में हैं। बावजूद इसके, बैठक के बाद जारी किसी भी आधिकारिक संयुक्त बयान में मानवाधिकारों का ज़िक्र नहीं मिला।

एक्टिविस्टों की प्रतिक्रिया

ऑनलाइन पत्रिका 'द डिप्लोमैट' की रिपोर्ट के अनुसार, रुशान अब्बास को उम्मीद थी कि ट्रंप की बीजिंग यात्रा उनकी बहन की रिहाई का रास्ता खोलेगी। अमेरिकी अखबार 'द हिल' में 14 मई को लिखे एक लेख में रुशान अब्बास ने कहा, 'मैं दुनिया के सबसे ताकतवर लोकतांत्रिक नेता से कह रही हूँ कि वह एक तानाशाह की आँखों में देखकर मेरी बहन को वापस लाने की माँग करें।' उनकी यह अपील अनसुनी रही।

उइगर समुदाय में बढ़ता मोहभंग

कई उइगर लोगों ने 'द डिप्लोमैट' को बताया कि अमेरिकी राजनयिक प्रयासों से बड़े बदलाव की उनकी उम्मीद अब काफी कम हो गई है। 33 वर्षीय एक्टिविस्ट सालिह हुदयार ने कहा, 'तथ्य यह है कि ट्रंप ने चल रहे नरसंहार के बावजूद शी जिनपिंग से मुलाकात की, यह हमारे लिए सबसे बड़ा नुकसान है। शर्त यह होनी चाहिए थी कि पहले इस नरसंहार को खत्म करें, फिर बैठकर बात करें।' गौरतलब है कि हुदयार का 'नरसंहार' शब्द का प्रयोग उनकी निजी राय है; चीन इन आरोपों को सिरे से खारिज करता है।

ट्रंप का शी के प्रति बदला रुख

यह बात ऐसे समय में सामने आई है जब ट्रंप ने शी जिनपिंग के बारे में अपने सार्वजनिक बयानों में उल्लेखनीय नरमी दिखाई है और उन्हें अपना 'दोस्त' तथा 'अच्छा इंसान' बताया है। आलोचकों का कहना है कि व्यापार और भू-राजनीतिक समझौतों को प्राथमिकता देने के चलते मानवाधिकार एजेंडा हाशिए पर चला गया है।

आगे क्या

उइगर समुदाय के लोग अब अमेरिकी राजनयिक दबाव के बजाय वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय मंचों और गैर-सरकारी संगठनों के ज़रिए अपने परिजनों की मदद के रास्ते तलाश रहे हैं। शिनजियांग में स्थिति और अमेरिका-चीन संबंधों की दिशा पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की नज़र बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक स्पष्ट प्राथमिकता का संकेत है — जहाँ व्यापार और भू-राजनीतिक समझौते मानवाधिकारों से ऊपर हैं। कांग्रेसी प्रस्तावों की अनदेखी यह दर्शाती है कि कार्यपालिका और विधायिका के बीच चीन नीति पर गहरी खाई है। असली सवाल यह है कि जब अमेरिका जैसी महाशक्ति शीर्ष वार्ता में उइगर मुद्दा नहीं उठाती, तो अंतरराष्ट्रीय दबाव का वह तंत्र कहाँ जाता है जिस पर लाखों हिरासती परिवार टिके हैं? यह चुप्पी नीति नहीं, एक संदेश है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप-शी बैठक में उइगर मुद्दा क्यों नहीं उठाया गया?
रिपोर्टों के अनुसार, बैठक के बाद वॉशिंगटन और बीजिंग दोनों के आधिकारिक बयानों में मानवाधिकारों का कोई उल्लेख नहीं था। आलोचकों का कहना है कि व्यापार और भू-राजनीतिक प्राथमिकताओं के चलते उइगर संकट एजेंडे से बाहर रहा।
गुलशन अब्बास कौन हैं और उनका मामला क्यों अहम है?
गुलशन अब्बास उइगर एक्टिविस्ट रुशान अब्बास की बहन हैं, जो कथित तौर पर लगभग आठ वर्षों से चीनी हिरासत में हैं। अमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स ने ट्रंप से उनकी रिहाई के लिए दबाव बनाने का आग्रह किया था, लेकिन बीजिंग यात्रा से कोई परिणाम नहीं निकला।
चीन के शिनजियांग में उइगरों की स्थिति क्या है?
रिपोर्टों के अनुसार, 2017 से चीनी सरकार ने कथित तौर पर 10 लाख से अधिक तुर्किक जातीय समुदाय के लोगों को — जिनमें बहुसंख्यक उइगर मुसलमान हैं — शिनजियांग क्षेत्र में हिरासत में लिया है। चीन इन आरोपों को खारिज करता है।
अमेरिकी कांग्रेस ने इस मुद्दे पर क्या कदम उठाए थे?
ट्रंप की बीजिंग यात्रा से पहले अमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स ने प्रस्ताव पारित किए थे, जिनमें राष्ट्रपति से चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा हिरासत में लिए गए छह लोगों की रिहाई के लिए दबाव बनाने को कहा गया था। इन प्रस्तावों का बैठक के नतीजों पर कोई दृश्य प्रभाव नहीं पड़ा।
उइगर एक्टिविस्ट अब किस दिशा में काम कर रहे हैं?
कई उइगर लोगों ने बताया कि अमेरिकी राजनयिक प्रयासों से बड़े बदलाव की उनकी उम्मीद अब कम हो गई है। वे शिनजियांग में हिरासत में या निगरानी में रखे गए अपने परिवारजनों की मदद के लिए वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय मंचों और गैर-सरकारी संगठनों का रास्ता तलाश रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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