ट्रंप-शी बैठक में उइगर मुद्दा गायब, 10 लाख से अधिक हिरासत में बंद लोगों का सवाल अनुत्तरित
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हाल ही में हुई बैठक के बाद वॉशिंगटन और बीजिंग दोनों की ओर से जारी आधिकारिक बयानों में उइगर मानवाधिकार संकट का कोई उल्लेख नहीं किया गया। 25 जून 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, कथित तौर पर 10 लाख से अधिक तुर्किक जातीय समुदाय के लोगों — जिनमें बहुसंख्यक उइगर हैं — को चीन के शिनजियांग क्षेत्र में 2017 से हिरासत में रखा गया है, फिर भी यह मुद्दा शीर्ष स्तरीय वार्ता से बाहर ही रहा।
बैठक से क्या निकला
ट्रंप की बीजिंग यात्रा से पूर्व अमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स ने प्रस्ताव पारित किए थे, जिनमें राष्ट्रपति से चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा हिरासत में लिए गए छह व्यक्तियों की रिहाई के लिए दबाव बनाने का आग्रह किया गया था। इनमें उइगर एक्टिविस्ट रुशान अब्बास की बहन गुलशन अब्बास भी शामिल हैं, जो कथित तौर पर लगभग आठ वर्षों से चीनी हिरासत में हैं। बावजूद इसके, बैठक के बाद जारी किसी भी आधिकारिक संयुक्त बयान में मानवाधिकारों का ज़िक्र नहीं मिला।
एक्टिविस्टों की प्रतिक्रिया
ऑनलाइन पत्रिका 'द डिप्लोमैट' की रिपोर्ट के अनुसार, रुशान अब्बास को उम्मीद थी कि ट्रंप की बीजिंग यात्रा उनकी बहन की रिहाई का रास्ता खोलेगी। अमेरिकी अखबार 'द हिल' में 14 मई को लिखे एक लेख में रुशान अब्बास ने कहा, 'मैं दुनिया के सबसे ताकतवर लोकतांत्रिक नेता से कह रही हूँ कि वह एक तानाशाह की आँखों में देखकर मेरी बहन को वापस लाने की माँग करें।' उनकी यह अपील अनसुनी रही।
उइगर समुदाय में बढ़ता मोहभंग
कई उइगर लोगों ने 'द डिप्लोमैट' को बताया कि अमेरिकी राजनयिक प्रयासों से बड़े बदलाव की उनकी उम्मीद अब काफी कम हो गई है। 33 वर्षीय एक्टिविस्ट सालिह हुदयार ने कहा, 'तथ्य यह है कि ट्रंप ने चल रहे नरसंहार के बावजूद शी जिनपिंग से मुलाकात की, यह हमारे लिए सबसे बड़ा नुकसान है। शर्त यह होनी चाहिए थी कि पहले इस नरसंहार को खत्म करें, फिर बैठकर बात करें।' गौरतलब है कि हुदयार का 'नरसंहार' शब्द का प्रयोग उनकी निजी राय है; चीन इन आरोपों को सिरे से खारिज करता है।
ट्रंप का शी के प्रति बदला रुख
यह बात ऐसे समय में सामने आई है जब ट्रंप ने शी जिनपिंग के बारे में अपने सार्वजनिक बयानों में उल्लेखनीय नरमी दिखाई है और उन्हें अपना 'दोस्त' तथा 'अच्छा इंसान' बताया है। आलोचकों का कहना है कि व्यापार और भू-राजनीतिक समझौतों को प्राथमिकता देने के चलते मानवाधिकार एजेंडा हाशिए पर चला गया है।
आगे क्या
उइगर समुदाय के लोग अब अमेरिकी राजनयिक दबाव के बजाय वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय मंचों और गैर-सरकारी संगठनों के ज़रिए अपने परिजनों की मदद के रास्ते तलाश रहे हैं। शिनजियांग में स्थिति और अमेरिका-चीन संबंधों की दिशा पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की नज़र बनी हुई है।