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उरुमची नरसंहार की 17वीं वर्षगांठ: उइगर संगठनों ने चीन के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई की माँग की

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उरुमची नरसंहार की 17वीं वर्षगांठ: उइगर संगठनों ने चीन के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई की माँग की

सारांश

उरुमची नरसंहार की 17वीं वर्षगांठ पर उइगर संगठनों ने वाशिंगटन से वैश्विक समुदाय को झकझोरा — 2009 में मारे गए और लापता हजारों लोगों की स्थिति आज भी अज्ञात है। WUC और UHRP ने बीजिंग पर पारदर्शिता के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की माँग की है।

मुख्य बातें

5 जुलाई 2025 को उरुमची नरसंहार की 17वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है।
वर्ल्ड उइगर कांग्रेस (WUC) और उइगर ह्यूमन राइट्स प्रोजेक्ट (UHRP) ने चीन से 2009 के पीड़ितों की स्थिति सार्वजनिक करने की माँग की।
5 से 7 जुलाई 2009 के बीच उरुमची में हजारों उइगर प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर मारा गया, लापता किया गया या घायल किया गया।
UHRP के कार्यकारी निदेशक ओमर कानात के अनुसार, उस कार्रवाई के बाद की दंडमुक्ति ने व्यापक दमन और जबरन हिरासत को जन्म दिया।
चीनी अधिकारियों ने अब तक पीड़ितों का कोई पारदर्शी रिकॉर्ड साझा नहीं किया है; कई परिवार आज भी अनिश्चितता में हैं।

वर्ल्ड उइगर कांग्रेस (WUC) और उइगर ह्यूमन राइट्स प्रोजेक्ट (UHRP) सहित कई उइगर समर्थक संगठनों ने 5 जुलाई 2025 को उरुमची नरसंहार की 17वीं वर्षगांठ के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह बीजिंग पर दबाव बनाए — ताकि 2009 की उस कार्रवाई में मारे गए, लापता हुए और जेल भेजे गए लोगों की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जाए। यह घटना चीन के शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र की राजधानी उरुमची में हुई थी।

मुख्य घटनाक्रम: 2009 में क्या हुआ था

WUC के अनुसार, 5 जुलाई 2009 को हजारों उइगर युवाओं ने उरुमची के पीपुल्स स्क्वायर की ओर मार्च किया था। यह विरोध प्रदर्शन शाओगुआन क्षेत्र की उस घटना के जवाब में था, जिसमें दो उइगरों की मौत कथित तौर पर चीनी फैक्ट्री श्रमिकों की भीड़ के हाथों हुई थी — जिसे संगठन ने 'नस्लीय हमला' बताया था।

WUC के अनुसार, 5 से 7 जुलाई 2009 के बीच समान अधिकारों और न्याय की माँग कर रहे हजारों शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को मारा गया, लापता किया गया या घायल किया गया। संगठन ने इसे चीनी सरकार की 'हिंसक कार्रवाई' करार दिया है, हालाँकि बीजिंग इस व्याख्या को अस्वीकार करता रहा है।

संगठनों की माँगें

WUC के अध्यक्ष तुर्गुनजान अलाउदुन ने कहा, 'हर 5 जुलाई को हम उइगर इतिहास के सबसे काले दिनों में से एक को याद करते हैं। चीनी सरकार की हिंसक कार्रवाई ने दमन को और बढ़ाया और इससे ही आगे चलकर आज दिख रहे कथित उत्पीड़न की नींव पड़ी।'

संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से माँग की है कि पीड़ितों के बारे में पारदर्शिता की अपील जारी रखी जाए। उसका आरोप है कि वैश्विक जाँच की कमी के कारण चीन की नीतियाँ बिना किसी रोकटोक के जारी हैं।

UHRP ने भी चीनी सरकार से 2009 की कार्रवाई के बाद मारे गए, लापता हुए और कैद किए गए लोगों की स्थिति सार्वजनिक करने की माँग की। संगठन का कहना है कि पीड़ित परिवारों की अपीलों के बावजूद चीनी अधिकारियों ने अब तक मृतकों, घायलों, हिरासत में लिए गए या लापता लोगों का कोई पारदर्शी रिकॉर्ड साझा नहीं किया है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

UHRP के कार्यकारी निदेशक ओमर कानात ने कहा, '5 जुलाई की कार्रवाई चीन की उइगरों के खिलाफ नीति में एक निर्णायक मोड़ थी। इसके बाद हुई दंडमुक्ति ने व्यापक दमन, जबरन हिरासत, श्रम और पारिवारिक विभाजन जैसी स्थितियों को जन्म दिया।'

यह ऐसे समय में आया है जब शिनजियांग में मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव पहले से बना हुआ है। गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने 2022 में शिनजियांग में 'गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों' की बात कही थी, जिसे चीन ने खारिज किया था।

चीन का पक्ष और व्यापक संदर्भ

चीनी सरकार ने 2009 की घटनाओं को 'दंगे' बताया था और अपनी कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बहाल करने की कोशिश के रूप में प्रस्तुत किया था। बीजिंग ने उइगर समूहों के आरोपों को 'राजनीति से प्रेरित' और 'तथ्यहीन' बताते हुए अस्वीकार किया है।

कई परिवार आज भी अपने परिजनों के बारे में अनिश्चितता में जीवन जी रहे हैं — यह स्थिति 17 वर्षों बाद भी नहीं बदली है। वर्षगांठ के अवसर पर वाशिंगटन से उठी यह आवाज़ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उइगर मुद्दे को फिर से केंद्र में लाने की कोशिश है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शाता है कि मानवाधिकार की भाषा और नीतिगत इच्छाशक्ति के बीच की खाई अभी भी गहरी है।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उरुमची नरसंहार क्या था?
5 से 7 जुलाई 2009 के बीच चीन के शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र की राजधानी उरुमची में हजारों उइगर युवाओं ने विरोध प्रदर्शन किया था। WUC के अनुसार, इस दौरान हजारों प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर मारा गया, लापता किया गया या घायल किया गया; चीन ने इसे 'दंगे' बताकर अपनी कार्रवाई को उचित ठहराया।
2009 के विरोध प्रदर्शन की शुरुआत किस कारण से हुई थी?
WUC के अनुसार, प्रदर्शन शाओगुआन क्षेत्र में दो उइगरों की कथित हत्या के विरोध में हुए थे, जिन्हें चीनी फैक्ट्री श्रमिकों की भीड़ ने कथित तौर पर मारा था। इसे 'नस्लीय हमला' बताया गया था और उइगर समान अधिकार व न्याय की माँग कर रहे थे।
उइगर संगठन अभी किस बात की माँग कर रहे हैं?
WUC और UHRP ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से माँग की है कि वह बीजिंग पर दबाव बनाए ताकि 2009 में मारे गए, लापता हुए और जेल भेजे गए लोगों की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जाए। संगठनों का कहना है कि पीड़ित परिवारों की अपीलों के बावजूद चीन ने अब तक कोई पारदर्शी रिकॉर्ड साझा नहीं किया है।
चीन ने उइगर संगठनों के आरोपों पर क्या कहा है?
चीनी सरकार ने 2009 की घटनाओं को 'दंगे' बताया था और अपनी कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बहाल करने के प्रयास के रूप में प्रस्तुत किया। बीजिंग ने उइगर समूहों के आरोपों को 'राजनीति से प्रेरित' और 'तथ्यहीन' बताते हुए अस्वीकार किया है।
इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या कार्रवाई हुई है?
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने 2022 में शिनजियांग में 'गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों' की बात कही थी, जिसे चीन ने खारिज किया। उइगर संगठनों का आरोप है कि वैश्विक जाँच की कमी और व्यापारिक हितों के कारण चीन की नीतियाँ बिना रोकटोक जारी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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