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बलूच नेशनल मूवमेंट का आरोप: पाकिस्तानी सेना कर रही है 'राज्य-प्रायोजित आतंकवाद', अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की माँग

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बलूच नेशनल मूवमेंट का आरोप: पाकिस्तानी सेना कर रही है 'राज्य-प्रायोजित आतंकवाद', अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की माँग

सारांश

बलूच नेशनल मूवमेंट ने पाकिस्तानी सेना पर बलूचिस्तान में 'सुनियोजित नरसंहार' का आरोप लगाते हुए अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की माँग की है। संगठन के अनुसार केवल तीन दिनों में कथित तौर पर 17 लोगों को बिना न्यायिक प्रक्रिया के मारा गया। पाकिस्तान इन आरोपों को नकारता रहा है।

मुख्य बातें

बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) ने 5 जून 2026 को पाकिस्तानी सेना की बलूचिस्तान में कार्रवाई को 'राज्य-प्रायोजित आतंकवाद' करार दिया।
संगठन के अनुसार 31 मई से 2 जून 2026 के बीच कथित तौर पर 17 लोगों को बिना न्यायिक प्रक्रिया के मार दिया गया।
मस्तुंग, नोशकाई, जेहरी, खुजदार, केच, ग्वादर सहित कई ज़िलों में जबरन गायब किए जाने और हेलीकॉप्टर से गोलाबारी के आरोप।
डेरा बुगती, कोहलू, अवारन, पंजगुर समेत दर्जनों गाँव तबाह, बड़े पैमाने पर विस्थापन का दावा।
बीएनएम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान को 'युद्ध प्रभावित और विवादित क्षेत्र' घोषित करने की माँग की।
पाकिस्तान सरकार इन आरोपों को अब तक नकारती रही है।

बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) ने 5 जून 2026 को जारी एक कड़े बयान में आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सेना बलूचिस्तान में निहत्थे नागरिकों के विरुद्ध व्यापक और अंधाधुंध सैन्य कार्रवाई कर रही है, जिसे संगठन ने 'राज्य-प्रायोजित आतंकवाद' की संज्ञा दी है। बीएनएम का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निरंतर चुप्पी इस संकट को और गहरा कर रही है तथा तत्काल वैश्विक हस्तक्षेप अनिवार्य हो गया है।

ताज़ा आरोप और घटनाक्रम

बीएनएम के अनुसार, 31 मई से 2 जून 2026 के बीच केवल तीन दिनों में पाकिस्तानी सेना ने कथित तौर पर 17 लोगों को बिना किसी न्यायिक प्रक्रिया के मार डाला और इन मौतों की जानकारी जानबूझकर छुपाई जा रही है। संगठन का आरोप है कि मस्तुंग, नोशकाई, जेहरी, खुजदार, केच और ग्वादर जैसे इलाकों में प्रतिदिन लोगों को जबरन गायब किया जा रहा है।

बीएनएम ने यह भी आरोप लगाया कि सेना के हेलीकॉप्टर नागरिक बस्तियों पर लगातार गोलाबारी कर रहे हैं। संगठन के बयान के अनुसार, कई मामलों में पहले से अगवा किए गए लोगों को हिरासत में मार दिया जाता है और फिर इन मौतों को 'मुठभेड़' बताकर आतंकवाद-विरोधी कार्रवाई का दावा किया जाता है। मारे गए लोगों के शव परिजनों को नहीं सौंपे जाते।

व्यापक विस्थापन और सामाजिक तबाही

बीएनएम ने बताया कि डेरा बुगती, कोहलू, अवारन, जेहरी, खुजदार, पंजगुर, केच और ग्वादर जिलों के दर्जनों गाँव पूरी तरह तबाह कर दिए गए हैं, जिससे बड़े पैमाने पर विस्थापन हुआ है। संगठन का कहना है कि जबरन गायब किए जाने की लगातार घटनाओं ने हज़ारों परिवारों को सामाजिक और आर्थिक रूप से बर्बाद कर दिया है।

बीएनएम के अनुसार, 1948 में बलूचिस्तान पर पाकिस्तान के कब्ज़े के पहले दिन से ही यह क्षेत्र निरंतर सैन्य कार्रवाई और हिंसा झेल रहा है। संगठन का आरोप है कि राज्य की नीति हमेशा से राजनीतिक ताकतों को हिंसा के ज़रिए दबाने की रही है।

बीएनएम का बयान

बीएनएम ने अपने बयान में कहा, 'बलोच नेशनल मूवमेंट इस आतंकवाद की कड़ी निंदा करता है। पाकिस्तान बलोच राष्ट्र का व्यवस्थित नरसंहार कर रहा है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप बेहद ज़रूरी है।' संगठन ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी अधिकारी बलूचिस्तान में 'सुनियोजित नरसंहार' की नीति चला रहे हैं, जिसका उद्देश्य क्षेत्र की राजनीतिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक पहचान को धीरे-धीरे समाप्त करना है।

अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की माँग

बीएनएम ने वैश्विक समुदाय से अपील की है कि बलूचिस्तान को 'युद्ध प्रभावित और विवादित क्षेत्र' घोषित किया जाए और तत्काल हस्तक्षेप किया जाए। यह ऐसे समय में आया है जब बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार उठाए जाते रहे हैं, परंतु ठोस वैश्विक कार्रवाई अब तक नहीं हुई है। गौरतलब है कि पाकिस्तान सरकार इन आरोपों को अब तक सिरे से नकारती रही है और इन्हें विदेश-प्रायोजित दुष्प्रचार बताती है।

बीएनएम के इस बयान के बाद अब सवाल यह है कि क्या संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाएँ इस मामले में कोई ठोस कदम उठाएँगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया प्रतीकात्मक बयानों तक सीमित रही है। असली सवाल यह है कि जब संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार समितियाँ पाकिस्तान से बार-बार जवाब माँग चुकी हैं, तो ज़मीनी बदलाव क्यों नहीं आया। 'मुठभेड़' की आड़ में हत्याओं का पैटर्न और शवों को परिजनों से दूर रखने की नीति — यदि सत्यापित हो — तो यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन है। मीडिया और स्वतंत्र जाँचकर्ताओं की बलूचिस्तान तक पहुँच पर लगे प्रतिबंध इन आरोपों की स्वतंत्र पड़ताल को असंभव बनाते हैं — और यही चुप्पी सबसे बड़ा सवाल है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) क्या है और इसने क्या आरोप लगाए हैं?
बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) एक बलूच राजनीतिक संगठन है जो बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की कार्रवाइयों के विरुद्ध आवाज़ उठाता रहा है। 5 जून 2026 को जारी बयान में संगठन ने पाकिस्तानी सेना पर निहत्थे नागरिकों की हत्या, जबरन गायब किए जाने और 'सुनियोजित नरसंहार' का आरोप लगाया है।
बीएनएम के अनुसार बलूचिस्तान में हाल ही में कितने लोग मारे गए?
बीएनएम के अनुसार 31 मई से 2 जून 2026 के बीच केवल तीन दिनों में कथित तौर पर 17 लोगों को बिना किसी न्यायिक प्रक्रिया के मार दिया गया। संगठन का आरोप है कि इन मौतों की जानकारी जानबूझकर छुपाई जा रही है।
बलूचिस्तान के किन-किन इलाकों में हिंसा के आरोप हैं?
बीएनएम ने मस्तुंग, नोशकाई, जेहरी, खुजदार, केच, ग्वादर, डेरा बुगती, कोहलू, अवारन और पंजगुर जिलों का विशेष उल्लेख किया है। इन इलाकों में जबरन गायब किए जाने, हेलीकॉप्टर से गोलाबारी और गाँवों को तबाह किए जाने के आरोप लगाए गए हैं।
बीएनएम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्या माँग की है?
बीएनएम ने वैश्विक समुदाय से बलूचिस्तान को 'युद्ध प्रभावित और विवादित क्षेत्र' घोषित करने और तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। संगठन का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी इस संकट को और बढ़ा रही है।
पाकिस्तान सरकार का इन आरोपों पर क्या रुख रहा है?
पाकिस्तान सरकार बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन के इन आरोपों को अब तक सिरे से नकारती रही है और इन्हें विदेश-प्रायोजित दुष्प्रचार बताती है। स्वतंत्र मीडिया और जाँचकर्ताओं की इस क्षेत्र तक पहुँच पर प्रतिबंध के कारण इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि कठिन बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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