4 सितंबर 2026
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कांथापुरम के डर से बेबी छेड़ रहे आरएसएस के खिलाफ गुप्त युद्ध: भाजपा नेता कुम्मनम राजशेखरन

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कांथापुरम के डर से बेबी छेड़ रहे आरएसएस के खिलाफ गुप्त युद्ध: भाजपा नेता कुम्मनम राजशेखरन

सारांश

भाजपा नेता कुम्मनम राजशेखरन ने सीपीआई-एम महासचिव एम.ए. बेबी पर आरोप लगाया कि वे कांथापुरम की महिला-विरोधी टिप्पणियों का सामना करने की बजाय आरएसएस को निशाना बना रहे हैं। केरल में जेंडर, सुधार और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण पर यह बहस एक बार फिर तीखी हो गई है।

मुख्य बातें

भाजपा नेता कुम्मनम राजशेखरन ने 4 सितंबर को आरोप लगाया कि सीपीआई-एम महासचिव एम.ए.
बेबी कांथापुरम के डर से आरएसएस के खिलाफ परोक्ष मोर्चा खोल रहे हैं।
कुम्मनम ने बेबी को चुनौती दी कि वे कांथापुरम ए.पी.
अबूबकर मुसलियार की महिलाओं पर विवादित टिप्पणियों पर खुलकर अपना पक्ष रखें।
भाजपा ने सीपीआई-एम पर अल्पसंख्यक वोटों के लिए तुष्टिकरण की राजनीति अपनाने का आरोप लगाया।
कांथापुरम ने सोशल मीडिया पर अपने समर्थकों से संयम बरतने की अपील की, लेकिन बेबी या आरएसएस का नाम नहीं लिया।
केरल में जेंडर, सामाजिक सुधार और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के मुद्दों पर सीपीआई-एम , आरएसएस और मुस्लिम धार्मिक संगठनों के बीच तीखी राजनीतिक बहस जारी है।

भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य कुम्मनम राजशेखरन ने शुक्रवार, 4 सितंबर को तिरुवनंतपुरम में आरोप लगाया कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई-एम — के महासचिव एम.ए. बेबी सुन्नी मुस्लिम धर्मगुरु कांथापुरम ए.पी. अबूबकर मुसलियार के दबाव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के विरुद्ध परोक्ष रूप से मोर्चा खोल रहे हैं। कुम्मनम ने बेबी को सीधी चुनौती दी कि वे महिलाओं पर कांथापुरम की विवादित टिप्पणियों पर अपना स्पष्ट पक्ष रखें, न कि आरएसएस को बहस में घसीटें।

मुख्य आरोप और चुनौती

कुम्मनम ने कहा, 'अगर बेबी वाकई कांथापुरम के विचारों से असहमत थे, तो उन्हें आरएसएस पर 'साफ झूठ' और 'बिना किसी तथ्य के आरोप' लगाने के बजाय खुलकर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए था।' उन्होंने इस कदम को 'घिनौना राजनीतिक पाखंड' करार दिया और कहा कि यह अल्पसंख्यक वोटों के लिए तुष्टिकरण की राजनीति का हिस्सा है।

भाजपा नेता ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक हितों को विवादित बयानों से ध्यान भटकाने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। उनके अनुसार, सीपीआई-एम का असली इरादा कांथापुरम की टिप्पणियों पर बहस से बचना और उसे आरएसएस-विरोधी राजनीतिक मुद्दे में बदलना है।

कांथापुरम का सोशल मीडिया संदेश

इसी बीच, कांथापुरम अबूबकर मुसलियार ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के ज़रिए अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से संयम बरतने और उकसावे में न आने की अपील की। हालाँकि उन्होंने अपने संदेश में बेबी या आरएसएस का नाम नहीं लिया।

कांथापुरम ने कहा, 'चर्चाओं का मकसद निष्पक्ष रूप से विचारों का मूल्यांकन करना और नई चीजें सीखना होना चाहिए।' उन्होंने आगाह किया कि कुछ लोग आध्यात्मिक चर्चाओं को जानबूझकर विवाद और सामाजिक बंटवारे की ओर मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने अपने अनुयायियों से भावुक होकर प्रतिक्रिया न देने और परिपक्वता से स्थिति से निपटने का आग्रह किया।

कांथापुरम ने यह भी कहा कि सुन्नी परंपरा सदैव बुराई का सामना अच्छाई से करने की रही है और उन्होंने अपने समर्थकों से अनुशासन के साथ आगे बढ़ने को कहा।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह पूरा घटनाक्रम केरल में महिलाओं पर कांथापुरम की टिप्पणियों को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच सामने आया है, जिनकी केरल समाज के कुछ वर्गों में तीखी आलोचना हुई है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब सीपीआई-एम, आरएसएस और मुस्लिम धार्मिक संगठनों के बीच जेंडर, सामाजिक सुधार और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के मुद्दों पर तीखी राजनीतिक बहस छिड़ी हो।

आलोचना का सीधे जवाब देने के बजाय कांथापुरम का ताज़ा संदेश इस बात पर केंद्रित रहा कि आध्यात्मिक चर्चाओं का इस्तेमाल बंटवारा पैदा करने के लिए किया जा रहा है।

भाजपा की रणनीतिक स्थिति

कुम्मनम की टिप्पणियों से इस विवाद में एक नया राजनीतिक आयाम जुड़ गया है। भाजपा का ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि सीपीआई-एम कांथापुरम का सीधे तौर पर सामना करने से हिचकिचा रही है। भाजपा नेता ने सीपीआई-एम पर चुनावी और राजनीतिक फायदे के लिए अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण का सहारा लेने का भी आरोप लगाया।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि एम.ए. बेबी इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया देते हैं या नहीं, और क्या केरल की राजनीति में यह विवाद और गहरा होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और अगर चुप रहती है तो महिला अधिकारों पर उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। भाजपा इसी द्विधा को भुनाने में लगी है — लेकिन यह भी उतना ही सच है कि भाजपा स्वयं अपने सहयोगी संगठनों में महिला अधिकारों पर एकरूप रुख नहीं रखती। असली सवाल यह है कि केरल में कोई भी बड़ा दल कांथापुरम की टिप्पणियों पर निर्भीक और स्पष्ट रुख अपनाने को तैयार क्यों नहीं है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुम्मनम राजशेखरन ने एम.ए. बेबी पर क्या आरोप लगाए?
भाजपा नेता कुम्मनम राजशेखरन ने आरोप लगाया कि सीपीआई-एम महासचिव एम.ए. बेबी कांथापुरम ए.पी. अबूबकर मुसलियार के दबाव में आरएसएस के खिलाफ परोक्ष रूप से मोर्चा खोल रहे हैं। उन्होंने बेबी पर आरएसएस पर 'साफ झूठ' और 'बिना तथ्य के आरोप' लगाने का भी इल्जाम लगाया।
कांथापुरम की विवादित टिप्पणियाँ किस बारे में हैं?
केरल के सुन्नी मुस्लिम धर्मगुरु कांथापुरम ए.पी. अबूबकर मुसलियार ने महिलाओं पर कुछ टिप्पणियाँ की थीं, जिनकी केरल समाज के कुछ वर्गों में तीखी आलोचना हुई। इन्हीं टिप्पणियों को लेकर राजनीतिक विवाद छिड़ा हुआ है।
कांथापुरम ने इस विवाद पर क्या कहा?
कांथापुरम ने सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए अपने समर्थकों से संयम बरतने और उकसावे में न आने की अपील की। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक चर्चाओं को जानबूझकर विवाद और बंटवारे में बदलने की कोशिशें की जा रही हैं, हालाँकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया।
भाजपा का सीपीआई-एम पर तुष्टिकरण का आरोप क्यों है?
भाजपा का कहना है कि सीपीआई-एम अल्पसंख्यक वोट पाने के लिए कांथापुरम की टिप्पणियों की सीधी आलोचना करने से बच रही है और इसके बजाय आरएसएस को विवाद में घसीट रही है। कुम्मनम ने इसे 'घिनौना राजनीतिक पाखंड' बताया।
इस विवाद का केरल की राजनीति पर क्या असर हो सकता है?
यह विवाद केरल में जेंडर, सामाजिक सुधार और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण पर सीपीआई-एम, आरएसएस और मुस्लिम धार्मिक संगठनों के बीच चल रही व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा है। भाजपा इस मुद्दे के ज़रिए सीपीआई-एम की कथित दोहरी नीति को उजागर करने की कोशिश कर रही है, जो आगामी चुनावी राजनीति को प्रभावित कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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