कांथापुरम के डर से बेबी आरएसएस पर साध रहे निशाना — भाजपा नेता कुम्मनम का सीपीआई-एम पर बड़ा हमला
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य कुम्मनम राजशेखरन ने शुक्रवार, 4 सितंबर को तिरुवनंतपुरम में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव एम.ए. बेबी पर गंभीर आरोप लगाए। कुम्मनम के अनुसार, बेबी सुन्नी मुस्लिम धर्मगुरु कांथापुरम ए.पी. अबूबकर मुसलियार के विवादित बयानों का सामना करने की बजाय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को निशाना बनाकर ध्यान भटका रहे हैं। उन्होंने बेबी को सीधे चुनौती दी कि वे महिलाओं पर कांथापुरम की टिप्पणियों पर अपना स्पष्ट रुख सार्वजनिक रूप से रखें।
मुख्य आरोप और भाजपा का पक्ष
कुम्मनम राजशेखरन ने कहा कि जब पूरे केरल में कांथापुरम के महिला-विरोधी विचारों की आलोचना हो रही है, उस समय बेबी का RSS पर 'साफ झूठ' और 'निराधार आरोप' लगाना राजनीतिक पाखंड है। उन्होंने कहा, "अगर बेबी सच में कांथापुरम की बातों से असहमत हैं, तो उन्हें खुलकर सामने आना चाहिए था — आरएसएस को विवाद में घसीटने की जरूरत नहीं थी।"
भाजपा नेता ने इस रणनीति को अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया और आरोप लगाया कि सीपीआई-एम चुनावी लाभ के लिए धार्मिक संवेदनशीलता का दोहन कर रही है।
कांथापुरम का संदेश — बिना नाम लिए सफाई
इस विवाद के बीच कांथापुरम ए.पी. अबूबकर मुसलियार ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने बेबी या RSS का नाम लिए बिना कहा कि आध्यात्मिक चर्चाओं को जानबूझकर विवाद और सामाजिक बंटवारे में बदलने की कोशिशें हो रही हैं।
कांथापुरम ने कहा, "चर्चाओं का मकसद निष्पक्ष रूप से विचारों का मूल्यांकन करना और नई चीजें सीखना होना चाहिए।" उन्होंने अपने अनुयायियों से भावुक होकर प्रतिक्रिया न देने और परिपक्वता के साथ स्थिति से निपटने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि सुन्नी परंपरा हमेशा बुराई का सामना अच्छाई से करने की रही है।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह पूरा मामला केरल में महिलाओं पर कांथापुरम की टिप्पणियों के इर्द-गिर्द उठे राजनीतिक तूफान से जुड़ा है, जिनकी समाज के कई वर्गों ने कड़ी आलोचना की है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में जेंडर, सामाजिक सुधार और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को लेकर सीपीआई-एम, RSS और मुस्लिम धार्मिक संगठनों के बीच तीखी राजनीतिक बहस पहले से जारी है।
आलोचकों का कहना है कि कांथापुरम का ताजा संदेश विवादित टिप्पणियों का सीधा जवाब देने की बजाय यह तर्क देने पर केंद्रित है कि आध्यात्मिक चर्चाओं को राजनीतिक हथियार बनाया जा रहा है।
सीपीआई-एम की भूमिका पर सवाल
कुम्मनम ने जोर देकर कहा कि एम.ए. बेबी को इस विवाद को RSS पर हमले में बदलने की बजाय कांथापुरम की टिप्पणियों पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। उनके अनुसार, राजनीतिक हितों को विवादित बयानों से ध्यान भटकाने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।
भाजपा का यह आक्रामक रुख संकेत देता है कि पार्टी इस मुद्दे को केरल में सीपीआई-एम की 'दोहरी राजनीति' के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है — खासतौर पर आगामी चुनावी समीकरणों को देखते हुए।
आगे क्या
फिलहाल सीपीआई-एम की ओर से कुम्मनम के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विवाद केरल की जटिल सांप्रदायिक-राजनीतिक संरचना को और उजागर करता है, जहाँ धार्मिक नेताओं के बयान अक्सर दलगत राजनीति के केंद्र में आ जाते हैं।