केरल में सीपीआई(एम) का राजनीतिक पतन शुरू, हिंसा की राजनीति बर्दाश्त नहीं: राजीव चंद्रशेखर
सारांश
मुख्य बातें
केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने 25 जून 2026 को तिरुवनंतपुरम में पत्रकारों से बातचीत में राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई(एम) पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि केरल में उसके राजनीतिक वर्चस्व का युग अब समाप्ति की कगार पर है। उन्होंने दावा किया कि हालिया चुनावी नतीजों ने साफ़ संकेत दे दिए हैं कि केरल की जनता सीपीआई(एम) की राजनीति से मुँह मोड़ रही है।
मुख्य घटनाक्रम
चंद्रशेखर ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) को इस राजनीतिक बदलाव की पहले से उम्मीद थी। उनके अनुसार, सीपीआई(एम) को न केवल विधानसभा चुनावों में करारी हार झेलनी पड़ी है, बल्कि स्थानीय निकाय चुनावों में भी पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि केरल के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि राजधानी तिरुवनंतपुरम में सीपीआई(एम) का न तो कोई विधायक है और न ही नगर निगम पर उसका नियंत्रण।
सीपीआई(एम) पर हिंसा के आरोप
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि लगातार चुनावी विफलताओं के कारण सीपीआई(एम) के कार्यकर्ताओं में गहरी निराशा पैदा हो रही है और वे नए राजनीतिक विकल्प तलाश रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनसमर्थन घटने के बाद पार्टी नेतृत्व अब राजनीतिक टकराव और तनाव भड़काने की राह पर चल पड़ा है। चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि मेयर कार्यालय से जुड़े हालिया घटनाक्रमों में भी इसी पुरानी टकराव की राजनीति की झलक दिखी।
भाजपा की चेतावनी
चंद्रशेखर ने सीपीआई(एम) नेतृत्व को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कानून हाथ में लेने, हिंसा फैलाने या भाजपा के निर्वाचित प्रतिनिधियों को निशाना बनाने का प्रयास किया, तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी प्रकार की गुंडागर्दी या दबाव की राजनीति स्वीकार्य नहीं है। उनके अनुसार, यदि पार्षदों, जनप्रतिनिधियों या मेयर के विरुद्ध हिंसक गतिविधियाँ हुईं तो उसकी पूरी जिम्मेदारी सीपीआई(एम) नेतृत्व की होगी।
राजनीतिक परिवर्तन का दावा
भाजपा नेता ने कहा कि केरल की जनता विकास, पारदर्शिता और जवाबदेही चाहती है, जबकि सीपीआई(एम) अब भी दशकों पुराने राजनीतिक तौर-तरीकों पर टिकी है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में राजनीतिक परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और आने वाले समय में यह बदलाव और स्पष्ट रूप से दिखेगा। यह ऐसे समय में आया है जब केरल में 2026 के विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं और सभी दल अपनी रणनीतियाँ पुख्ता कर रहे हैं।