केरल में वन्यजीव हमले: 9 साल में 1,128 मौतें, राजीव चंद्रशेखर का LDF-UDF पर 'आपराधिक लापरवाही' का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
केरल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक राजीव चंद्रशेखर ने सोमवार, 8 जून 2026 को तिरुवनंतपुरम में राज्य के बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष पर वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) दोनों सरकारों को कठघरे में खड़ा किया। उनका आरोप है कि पहाड़ी और वन क्षेत्रों से सटे गाँवों में रहने वाले लोगों की जान बचाने में दोनों राजनीतिक मोर्चे पूरी तरह विफल रहे हैं।
ताज़ा हमले और सूर्यानेल्ली की दुखद घटना
चंद्रशेखर ने बताया कि पिछले दो सप्ताह के भीतर केरल में वन्यजीव हमलों में पाँच लोगों की जान जा चुकी है। उन्होंने सूर्यानेल्ली में हुई मारियम्मल की मौत का विशेष उल्लेख किया, जो अपने बेटे को स्कूल छोड़ने जा रही थीं और तभी एक जंगली हाथी के हमले में उनकी मृत्यु हो गई। इस हमले में घायल हुआ बच्चा अभी भी उपचाराधीन है।
चंद्रशेखर ने कहा, 'स्थिति ऐसी हो गई है कि लोग अब अपने ही गाँवों में बिना डर के नहीं रह पा रहे हैं।' यह ऐसे समय में आया है जब केरल के वन-सीमांत ज़िलों में वन्यजीव-मानव टकराव की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं।
सरकारी आँकड़े: नौ साल में 1,128 मौतें
भाजपा नेता ने सरकारी आँकड़ों के हवाले से दावा किया कि 2016 से 2025 के बीच केरल में वन्यजीव हमलों में 1,128 लोगों की मौत हुई और 8,480 लोग घायल हुए। उनके अनुसार इसी अवधि में हाथी, बाघ और जंगली सूअरों के हमलों में अकेले 260 लोगों की जान गई।
आँकड़े और भी चिंताजनक हैं: 2020 से 2025 के बीच हाथियों के हमलों में 102 लोगों की मौत हुई, जबकि 2021 से 2025 के दौरान विभिन्न वन्यजीव हमलों में कुल 344 लोगों की जान गई। गौरतलब है कि ये आँकड़े चंद्रशेखर के दावे पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अपेक्षित है।
केंद्र के प्रावधानों का उपयोग न करने का आरोप
चंद्रशेखर ने कहा कि केंद्र सरकार ने मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए राज्यों को पर्याप्त वित्तीय सहायता और व्यापक कानूनी अधिकार दिए हैं। इनमें सोलर फेंसिंग, सुरक्षा अवरोधक, त्वरित प्रतिक्रिया दल, संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और हाथियों के आवागमन गलियारों के प्रबंधन जैसे उपाय शामिल हैं। उनका आरोप है कि केरल सरकार इन उपलब्ध संसाधनों और कानूनी प्रावधानों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने में नाकाम रही है।
उन्होंने पीड़ितों और उनके परिजनों को मुआवज़ा देने में हो रही देरी की भी कड़ी आलोचना की और इसे 'आपराधिक लापरवाही' करार दिया।
LDF और UDF दोनों पर एक साथ निशाना
चंद्रशेखर ने कहा कि विपक्ष में रहते हुए UDF इस मुद्दे को उठाती रही, परंतु सत्ता में आने पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। वहीं, LDF के लगभग एक दशक के शासनकाल में भी इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सका। यह पहली बार नहीं है जब किसी विपक्षी नेता ने दोनों मुख्यधारा मोर्चों को एक साथ इस मुद्दे पर कटघरे में खड़ा किया हो।
आधुनिक तकनीक अपनाने की माँग
भाजपा नेता ने सरकार से ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निगरानी प्रणाली और रियल-टाइम चेतावनी तंत्र जैसी आधुनिक तकनीकों का तत्काल उपयोग करने की माँग की, ताकि वन्यजीवों को मानव बस्तियों में प्रवेश करने से रोका जा सके। उन्होंने कहा, 'नागरिकों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।' अब देखना यह होगा कि LDF सरकार इन माँगों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या विधानसभा में यह मुद्दा और तेज़ होता है।