केरल की आर्थिक बदहाली पर राजीव चंद्रशेखर का हमला: 'राज्य सरकार करे आत्मचिंतन'
सारांश
मुख्य बातें
केरल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने शुक्रवार, 12 जून को तिरुवनंतपुरम में पत्रकारों से बातचीत में राज्य की वर्तमान आर्थिक स्थिति के लिए सीधे तौर पर केरल सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि जब पूरे देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल का जश्न मनाया जा रहा है, तब केरल में आर्थिक संकट चरम पर है।
आर्थिक संकट और सरकार की दिशाहीनता
चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की कार्यशैली से स्पष्ट है कि उसे जनता के हितों की कोई परवाह नहीं है। उनके अनुसार, सरकार को खुद समझ नहीं आ रहा कि आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए क्या कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा, 'स्थिति ऐसी हो चुकी है कि अब इस सरकार को समझ नहीं आ रहा है कि क्या किया जाए।'
बड़े वादों पर सवाल
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य सरकार की वादेबाज़ी पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जब सरकार को स्वयं पता है कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति डांवाडोल है, तो फिर जनता को लुभाने के लिए बड़े-बड़े वादे करना उचित नहीं है। उनका कहना था, 'सिर्फ वादे करने से काम नहीं चलता — इन्हें धरातल पर उतारना होगा, तभी स्थिति सामान्य हो पाएगी।'
मीडिया से अपील और जनहित के मुद्दे
चंद्रशेखर ने बताया कि 2025 में केरल दौरे के दौरान उन्होंने मीडिया से अपील की थी कि राजनीतिक नाटकबाज़ी को कवर करने के बजाय स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे जनहित के मुद्दों पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने अफसोस जताया कि प्रदेश की जनता विभिन्न समस्याओं से जूझ रही है, लेकिन उनके समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे।
निजीकरण की नीति पर आपत्ति
उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा सभी क्षेत्रों के निजीकरण पर जोर देने की नीति पर भी सवाल खड़े किए। चंद्रशेखर ने पूछा कि यदि सब कुछ निजी हाथों में सौंप दिया गया, तो आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग का क्या होगा जो अपने खर्चे खुद वहन करने में असमर्थ है। उनके अनुसार, यह सवाल राज्य सरकार के लिए गहन आत्मचिंतन का विषय है।
विधानसभा सत्र पर भी निशाना
केंद्रीय मंत्री ने विधानसभा सत्र की कार्यप्रणाली पर भी असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जहाँ पूर्व मुख्यमंत्री इतिहास की बातों में उलझे रहते हैं, वहीं वित्त मंत्री का कहना है कि जनता से जुड़े वित्तीय मुद्दों को 'सीक्रेट' रखा जाना चाहिए। चंद्रशेखर ने चेताया कि यदि समय रहते आत्मचिंतन नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में केरल की स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है।