केरल BJP अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर का सतीशन सरकार पर हमला, हिंदू आस्था पर दोहरे मापदंड का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने शुक्रवार, 28 अगस्त को तिरुवनंतपुरम में मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के नेतृत्व वाली सरकार पर धार्मिक आस्थाओं से जुड़े विवादित बयानों के मामलों में दोहरा रवैया अपनाने का गंभीर आरोप लगाया। चंद्रशेखर ने कहा कि सरकार हिंदू भावनाओं को आहत करने वाले कथित बयानों पर मौन साधे हुए है, जबकि अन्य समुदायों से जुड़े मामलों में वह तत्परता दिखाती है।
मुख्य आरोप और मांग
सनी एम कपिकाड और अन्य व्यक्तियों से जुड़े कथित विवादित बयानों का हवाला देते हुए चंद्रशेखर ने सरकार से तत्काल कानूनी कार्रवाई की माँग की। उनका कहना था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले बयानों को उचित ठहराने के लिए नहीं किया जा सकता।
चंद्रशेखर ने सवाल उठाया, 'मुख्यमंत्री वीडी सतीशन, गृह मंत्री रमेश चेन्निथला और देवस्वोम मंत्री मुरलीधरन हिंदू आस्थाओं के विरुद्ध दिए गए कथित घृणास्पद बयानों पर चुप क्यों हैं? क्या कानून सभी के लिए समान रूप से लागू नहीं होता?'
सरकार के 100 दिन पर निशाना
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब सतीशन सरकार ने सत्ता में अपने 100 दिन पूरे किए हैं। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि इस अवधि में सरकार विकास, रोज़गार और चुनावी वादों को पूरा करने में विफल रही है। चंद्रशेखर के अनुसार, 'इन 100 दिनों में हमने केवल तुष्टीकरण की राजनीति और दोहरे मापदंड देखे हैं। आम लोगों के हित में कदम उठाने के बजाय सरकार बांटो और राज करो की राजनीति को बढ़ावा दे रही है।'
सबरीमाला और धार्मिक मुद्दे
भाजपा अध्यक्ष ने सबरीमाला मंदिर मुद्दे को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस विपक्ष में रहते हुए मंदिर से सोना चोरी जैसे मामलों को प्रमुखता से उठाती थी, लेकिन सत्ता में आने के बाद सबरीमाला और भगवान अयप्पा से जुड़े मुद्दों पर मौन हो गई है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने उन हज़ारों हिंदू मतदाताओं के विश्वास को तोड़ा है जिन्होंने उसे सत्ता सौंपी थी।
राजनीतिक असर
आलोचकों का कहना है कि चंद्रशेखर के इन बयानों से केरल में भाजपा के राजनीतिक अभियान में धार्मिक मुद्दों को नई धार मिल सकती है। गौरतलब है कि केरल में भाजपा लंबे समय से अपनी उपस्थिति मज़बूत करने की कोशिश में है और सरकार के शुरुआती 100 दिनों को लेकर यह आक्रामक रुख उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि सतीशन सरकार इन आरोपों का किस प्रकार जवाब देती है।