4 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अखिल गोगोई का रकीबुल हुसैन पर हमला: 8 साल में संपत्ति ₹4.38 करोड़ से बढ़कर ₹25.29 करोड़

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अखिल गोगोई का रकीबुल हुसैन पर हमला: 8 साल में संपत्ति ₹4.38 करोड़ से बढ़कर ₹25.29 करोड़

सारांश

रायजोर दल प्रमुख अखिल गोगोई ने चुनावी हलफनामों के हवाले से कांग्रेस सांसद रकीबुल हुसैन की संपत्ति में 2016 से 2024 के बीच 477% की बढ़ोतरी पर सवाल उठाए हैं — यह हमला पूर्व सहयोगी दलों के बीच बढ़ती राजनीतिक दरार को और गहरा करता है।

मुख्य बातें

अखिल गोगोई ने दावा किया कि रकीबुल हुसैन की घोषित संपत्ति 2016 में ₹4.38 करोड़ से बढ़कर 2024 में ₹25.29 करोड़ हो गई।
आठ वर्षों में कुल ₹20.91 करोड़ की वृद्धि — लगभग 477 प्रतिशत की बढ़ोतरी।
गोगोई ने इस वृद्धि को BJP सरकार और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के कार्यकाल से जोड़ा।
रकीबुल हुसैन 2024 में धुबरी लोकसभा सीट से निर्वाचित हुए; आरोपों पर उनकी तत्काल प्रतिक्रिया नहीं मिली।
चुनावी हलफनामे स्व-घोषित होते हैं और अकेले किसी गड़बड़ी का प्रमाण नहीं होते।
कांग्रेस और रायजोर दल का गठबंधन पहले ही टूट चुका है; यह हमला दोनों के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है।

रायजोर दल के प्रमुख और शिवसागर विधायक अखिल गोगोई ने कांग्रेस सांसद रकीबुल हुसैन की घोषित संपत्ति में 2016 से 2024 के बीच हुई भारी बढ़ोतरी को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। गोगोई के अनुसार, चुनावी हलफनामों में दर्ज आँकड़े दर्शाते हैं कि हुसैन की घोषित संपत्ति ₹4.38 करोड़ से बढ़कर ₹25.29 करोड़ हो गई — यानी आठ वर्षों में लगभग 477 प्रतिशत की वृद्धि।

मुख्य आरोप और आँकड़े

गोगोई ने दावा किया कि 2016 के विधानसभा चुनाव के हलफनामे में हुसैन की घोषित संपत्ति ₹4.38 करोड़ थी, जो 2024 के लोकसभा चुनाव के हलफनामे में बढ़कर ₹25.29 करोड़ हो गई। रायजोर दल के अनुसार, इस अवधि में कुल ₹20.91 करोड़ की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

गोगोई ने इस वृद्धि को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार के कार्यकाल से जोड़ा और इसके स्रोत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के कार्यकाल के दौरान सांसद रकीबुल हुसैन की संपत्ति में हुई जबरदस्त बढ़ोतरी की अनकही कहानी सुनिए।'

हलफनामे की सीमाएँ

यह ध्यान देना ज़रूरी है कि चुनावी हलफनामे उम्मीदवारों द्वारा स्व-घोषित संपत्ति के विवरण होते हैं। इनसे अपने आप किसी अनियमितता का संकेत नहीं मिलता, और न ही ये संपत्ति के किसी गैरकानूनी स्रोत का प्रमाण होते हैं। संपत्ति वृद्धि के वास्तविक कारणों की पुष्टि के लिए संबंधित वित्तीय और संपत्ति रिकॉर्ड की स्वतंत्र जाँच आवश्यक होगी।

इन आरोपों पर रकीबुल हुसैन की तत्काल प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

असम में कांग्रेस के प्रमुख नेता हुसैन 2024 के आम चुनाव में धुबरी लोकसभा सीट से निर्वाचित हुए थे। गोगोई की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब रायजोर दल और कांग्रेस के बीच संबंध पहले से तनावपूर्ण हैं।

गौरतलब है कि दोनों दलों ने BJP का मुकाबला करने के लिए एक विपक्षी गठबंधन बनाया था, परंतु बाद में कांग्रेस ने रायजोर दल से अपना गठबंधन तोड़ लिया। गोगोई पहले भी कांग्रेस नेतृत्व की राजनीतिक और संगठनात्मक नीतियों पर खुलकर आलोचना करते रहे हैं।

आगे क्या

राज्य में आगामी राजनीतिक मुकाबलों से पहले गोगोई का यह हमला दोनों पूर्व सहयोगियों के बीच टकराव को और गहरा कर सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम असम की विपक्षी राजनीति में बिखराव की प्रवृत्ति को और उजागर करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन संपत्ति वृद्धि के स्रोत की जाँच किए बिना इन्हें भ्रष्टाचार का प्रमाण मानना तथ्यात्मक रूप से अधूरा है। असली सवाल यह है कि क्या यह मुद्दा जवाबदेही की माँग है या विपक्षी खेमे में सेंध लगाने की रणनीति — और इसका जवाब तभी मिलेगा जब हुसैन सार्वजनिक रूप से इन आँकड़ों का स्पष्टीकरण दें।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिल गोगोई ने रकीबुल हुसैन पर क्या आरोप लगाए हैं?
गोगोई ने चुनावी हलफनामों के हवाले से दावा किया है कि हुसैन की घोषित संपत्ति 2016 में ₹4.38 करोड़ से बढ़कर 2024 में ₹25.29 करोड़ हो गई — यानी 477% की वृद्धि। उन्होंने इस बढ़ोतरी के स्रोत पर सवाल उठाए हैं।
रकीबुल हुसैन कौन हैं?
रकीबुल हुसैन असम में कांग्रेस के प्रमुख नेता हैं, जो 2024 के आम चुनाव में धुबरी लोकसभा सीट से संसद के लिए निर्वाचित हुए। वे असम कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं।
क्या चुनावी हलफनामे में संपत्ति की बढ़ोतरी अपने आप में गड़बड़ी का सबूत है?
नहीं। चुनावी हलफनामे उम्मीदवारों द्वारा स्व-घोषित विवरण होते हैं और अकेले किसी अनियमितता या गैरकानूनी स्रोत का प्रमाण नहीं होते। वास्तविक कारणों की पुष्टि के लिए संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड की स्वतंत्र जाँच आवश्यक होगी।
रायजोर दल और कांग्रेस का गठबंधन क्यों टूटा?
दोनों दलों ने असम में BJP का मुकाबला करने के लिए विपक्षी गठबंधन बनाया था, लेकिन राजनीतिक और संगठनात्मक मतभेदों के चलते कांग्रेस ने रायजोर दल से अपना गठबंधन तोड़ लिया। गठबंधन टूटने के बाद से दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता रहा है।
इन आरोपों पर रकीबुल हुसैन का क्या कहना है?
अभी तक इन आरोपों पर हुसैन की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उनका पक्ष मिलते ही स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 47 मिनट पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 5 महीने पहले