राहुल गांधी का केंद्र पर हमला: 'जंतर-मंतर पर छात्रों की बर्बरता की तारीफ करनी चाहिए?'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार, 18 अगस्त को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद से महज आधा किलोमीटर दूर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पैलेट गन और कील लगी लाठियाँ चलाई गईं, जिसमें एक बच्चे की आँख चली गई और एक बच्ची का कान कट गया।
एक्स पर राहुल गांधी का सीधा सवाल
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'मोदी सरकार के मंत्री कह रहे हैं कि दिल्ली पुलिस की तारीफ करनी चाहिए। संसद से आधा किलोमीटर दूर, शांतिपूर्ण छात्रों पर पैलेट गन चली, कील लगी लाठियाँ चलीं, एक बच्चे की आँख चली गई, एक बच्ची का कान कट गया। इस बर्बरता की तारीफ करनी चाहिए?' उन्होंने यह भी कहा कि वह स्वयं उन घायल बच्चों से मिले हैं और हज़ारों वीडियो देशभर में देखे जा चुके हैं।
सरकार पर 'असत्य और हिंसा' का आरोप
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार का 'मूल मंत्र ही असत्य और हिंसा' है। उनके अनुसार, 'पहले बच्चों पर लाठी चलाओ और फिर कह दो कि कुछ हुआ ही नहीं' — यही सरकार की कार्यशैली है। राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा और कहा कि 'पूरे सत्र लापता रहे अमित शाह विपक्ष से भागते रहे।' साथ ही उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने आज तक छात्रों से माफी नहीं माँगी।
रिजिजू का पलटवार: 'एक भी हड्डी नहीं टूटी'
इससे पहले, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने दावा किया था कि प्रदर्शन के दौरान 'एक भी व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुँचा' और किसी की हड्डी तक नहीं टूटी। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी प्रदर्शनकारी गंभीर चोट के कारण अस्पताल में भर्ती नहीं है। रिजिजू ने दावा किया कि आम आदमी पार्टी, भीम आर्मी और समाजवादी पार्टी से जुड़े कुछ लोगों ने छात्रों के नाम पर प्रदर्शन में घुसकर हिंसा भड़काने की कोशिश की।
रिजिजू की दिल्ली पुलिस को क्लीन चिट
केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि दिल्ली प्रशासन ने प्रदर्शन के दौरान 'एक भी लाठी का इस्तेमाल नहीं किया' और प्रदर्शनकारियों को केवल तब रोका गया जब वे जबरन संसद की ओर बढ़ने लगे। उन्होंने कहा कि इतने बड़े आंदोलन को संभालने के लिए दिल्ली पुलिस और प्रशासन की तारीफ की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि कांग्रेस शासनकाल में ऐसा प्रदर्शन होता, तो 'हज़ारों लोगों की मौत हो सकती थी।'
राजनीतिक टकराव का केंद्र बना जंतर-मंतर
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में सरकार से देश के बच्चों से 'झूठ नहीं बोलने' की अपील की और कहा कि उनके पास 'आँखें हैं और याददाश्त भी।' उन्होंने यह भी कहा कि देश के लिए सबसे बड़ा खतरा वे लोग हैं 'जिन्हें न अपनी गलती दिखती है और दिखने पर मानते नहीं।' यह टकराव संसद सत्र के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच गहरे होते राजनीतिक विभाजन को उजागर करता है।