UNHRC के 62वें सत्र में चीन का स्पष्ट रुख: शिनच्यांग-हांगकांग पर पश्चिमी देशों के आरोपों का खंडन
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 62वें सत्र में 16 जून 2026 को जेनेवा, स्विट्जरलैंड में हुई बैठक के दौरान चीनी प्रतिनिधिमंडल की उप प्रमुख ली श्याओमेई ने मानवाधिकारों के मुद्दे पर चीन का आधिकारिक रुख स्पष्ट किया। उन्होंने ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और चेक गणराज्य सहित कई पश्चिमी देशों के बयानों को 'झूठा' करार देते हुए उनका खंडन किया।
चीन का मानवाधिकार पर आधिकारिक पक्ष
ली श्याओमेई ने कहा कि वैश्विक मानवाधिकार प्रशासन इस समय गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। उन्होंने इस बात की वकालत की कि प्रत्येक देश को अपना मानवाधिकार विकास पथ स्वतंत्र रूप से चुनने का अधिकार है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय को इस प्रक्रिया में रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब UNHRC की स्थापना की 20वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है, और बहुपक्षीय मानवाधिकार तंत्रों की प्रासंगिकता पर वैश्विक बहस तेज हो रही है।
चीन की पाँचवीं राष्ट्रीय मानवाधिकार कार्य योजना
ली श्याओमेई ने बताया कि चीन ने हाल ही में अपनी पाँचवीं राष्ट्रीय मानवाधिकार कार्य योजना जारी की है। उनके अनुसार, इस योजना से मानवाधिकारों के क्षेत्र में स्थिरता और निश्चितता आई है तथा यह वैश्विक मानवाधिकार विकास में चीन के योगदान को रेखांकित करती है।
गौरतलब है कि चीन की यह योजना ऐसे समय में आई है जब पश्चिमी देश और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन शिनच्यांग और तिब्बत (शीत्सांग) में मानवाधिकार स्थिति को लेकर लगातार सवाल उठाते रहे हैं।
शिनच्यांग, तिब्बत और हांगकांग पर चीन का दावा
चीनी प्रतिनिधि ने दावा किया कि वर्तमान में शिनच्यांग और शीत्सांग (तिब्बत) में समृद्धि और स्थिरता है, और हांगकांग निवासियों के वैध अधिकारों की पूरी तरह गारंटी दी गई है। उन्होंने 'राष्ट्रीय एकता और प्रगति को बढ़ावा देने पर पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के कानून' का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सभी जातीय समूहों के समान अधिकारों की रक्षा करता है।
आलोचकों का कहना है कि ये दावे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की स्वतंत्र रिपोर्टों से मेल नहीं खाते, जो इन क्षेत्रों में प्रतिबंधों और निगरानी की बात करती हैं।
पश्चिमी देशों पर पलटवार
ली श्याओमेई ने ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और चेक गणराज्य द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने इन देशों पर स्वयं के मानवाधिकार उल्लंघनों की अनदेखी करने का आरोप लगाया और कहा कि ये देश मानवाधिकारों का राजनीतिकरण कर रहे हैं।
चीन ने इन देशों से आग्रह किया कि वे बहुपक्षीय मानवाधिकार तंत्रों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए मानवाधिकारों के दुरुपयोग को बंद करें। यह पहली बार नहीं है जब चीन ने UNHRC में इस तरह का पलटवार किया हो — पिछले कई सत्रों में भी बीजिंग ने पश्चिमी आलोचनाओं को 'आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप' बताकर नकारा है।
आगे क्या
UNHRC का यह 62वाँ सत्र जेनेवा में जारी है। चीन और पश्चिमी देशों के बीच यह वैचारिक टकराव आने वाले दिनों में और गहरा हो सकता है, विशेषकर जब परिषद शिनच्यांग की स्थिति पर किसी प्रस्ताव पर विचार करेगी।