संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र में चीन का महत्वपूर्ण भाषण
सारांश
Key Takeaways
- संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का 61वां सत्र महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है।
- ली श्याओमेई ने मानवाधिकारों के राजनीतिकरण की चिंता व्यक्त की।
- विकासशील देशों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
- सभी पक्षों को संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए।
- चीन ने विकास के अधिकार को बढ़ावा देने का संकल्प लिया है।
बीजिंग, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र में मानवाधिकार विषयों पर एक खुली चर्चा आयोजित की गई। इस अवसर पर चीनी प्रतिनिधिमंडल की उप प्रमुख ली श्याओमेई ने अपने भाषण में बताया कि 15 मार्च को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा मानवाधिकार परिषद की स्थापना का प्रस्ताव पारित किए जाने की 20वीं वर्षगांठ है।
उन्होंने कहा कि आज के समय में बहुपक्षवाद और वैश्विक मानवाधिकार प्रयास अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। क्षेत्रीय परिस्थितियाँ विश्व शांति और सुरक्षा पर गहरा प्रभाव डाल रही हैं, जिससे मानवाधिकार का हनन और मानवीय संकट उत्पन्न हो रहे हैं।
ली श्याओमेई ने यह भी व्यक्त किया कि मानवाधिकारों का राजनीतिकरण और दोहरे मापदंडों का चलन बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार परिषद की विभिन्न समीक्षा और निरीक्षण प्रक्रियाएँ मुख्यतः विकासशील देशों को लक्षित करती हैं, जिसमें लाखों डॉलर खर्च होते हैं, लेकिन उन वास्तविक मानवाधिकार मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया जाता, जिनकी ईमानदारी से निगरानी आवश्यक है।
उन्होंने आगे कहा कि मानवाधिकार परिषद की स्थापना की 20वीं वर्षगांठ पर सभी पक्षों को मानवाधिकारों के संवर्धन और संरक्षण के मूल उद्देश्य पर पुनः विचार करना चाहिए। समानता और आपसी सम्मान के आधार पर संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना जरूरी है, ताकि वैश्विक मानवाधिकार कार्य को आगे बढ़ाने में ठोस और सार्थक योगदान हो सके।
इस अवसर पर, चीन और अन्य देशों से आए लगभग 100 प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया। चर्चाओं में डिजिटल तकनीक के माध्यम से विकास के अधिकार की सुनिश्चितता, जलवायु परिवर्तन, सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट और डिजिटल विभाजन जैसी वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका शामिल थी।
ली श्याओमेई ने कहा कि चीन विकास के अधिकार को बढ़ावा देने और उसकी गारंटी देने को अत्यधिक महत्व देता है। उन्होंने कहा कि चीन विभिन्न देशों से न्याय और वास्तविक बहुपक्षवाद के सिद्धांतों के तहत मानवता के साझा भविष्य वाले समुदाय के निर्माण के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान करता है।
बैठक में उपस्थित अन्य प्रतिनिधियों ने बहुपक्षीय ढांचे में सहयोग को सुदृढ़ करने और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने में चीन की रचनात्मक और सक्रिय भूमिका की सराहना की।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)