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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 62वें सत्र में चीन ने 'वैश्विक शासन' पर आयोजित किया विशेष कार्यक्रम

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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 62वें सत्र में चीन ने 'वैश्विक शासन' पर आयोजित किया विशेष कार्यक्रम

सारांश

जिनेवा के पैलेस डेस नेशन्स में UNHRC के 62वें सत्र के दौरान चीन ने 'मानवाधिकार और वैश्विक शासन' पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। चीन ने अपने हालिया श्वेत पत्र का हवाला देते हुए 'विकास के माध्यम से मानवाधिकार' की अवधारणा रखी और मानवाधिकारों के राजनीतिकरण का विरोध किया।

मुख्य बातें

चीन के संयुक्त राष्ट्र संघ और जिनेवा स्थित स्थायी मिशन ने पैलेस डेस नेशन्स में UNHRC के 62वें सत्र के दौरान संयुक्त कार्यक्रम आयोजित किया।
कार्यक्रम का विषय 'मानवाधिकार और वैश्विक शासन' था।
प्रतिभागियों ने मानवाधिकारों के राजनीतिकरण और बाहरी मॉडल थोपे जाने का विरोध किया।
चीन ने 'अधिक न्यायपूर्ण और तर्कसंगत वैश्विक शासन प्रणाली' शीर्षक से हालिया श्वेत पत्र का संदर्भ दिया।
विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व और क्षमता निर्माण को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

जिनेवा के पैलेस डेस नेशन्स में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 62वें सत्र के दौरान चीन के संयुक्त राष्ट्र संघ और जिनेवा स्थित चीन के स्थायी मिशन ने संयुक्त रूप से 'मानवाधिकार और वैश्विक शासन' विषय पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। इस आयोजन में प्रतिभागियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मानवाधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया।

मुख्य घटनाक्रम

प्रतिभागियों के अनुसार, वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भू-राजनीतिक संघर्ष, असंतुलित विकास और तकनीकी नैतिकता के संकट के कारण वैश्विक मानवाधिकार संरक्षण तंत्र कठिन दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक देश को अपनी परिस्थितियों और जनता की आवश्यकताओं के अनुरूप मानवाधिकार विकास का मार्ग तय करना चाहिए।

प्रतिभागियों ने मानवाधिकारों के राजनीतिकरण और किसी देश पर बाहरी मॉडल थोपे जाने का विरोध करते हुए कहा कि बहुपक्षीय सहयोग ही आगे का एकमात्र व्यावहारिक मार्ग है।

चीन का श्वेत पत्र और उसकी अवधारणा

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि चीन ने हाल ही में 'अधिक न्यायपूर्ण और तर्कसंगत वैश्विक शासन प्रणाली का निर्माण: चीन के विचार, पहल और कार्य' शीर्षक से एक श्वेत पत्र जारी किया है। प्रतिभागियों के अनुसार, यह दस्तावेज़ 'विकास के माध्यम से मानवाधिकारों को बढ़ावा देने' की अवधारणा के प्रति चीन की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

श्वेत पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि चीन आधुनिकीकरण के लाभों को सभी जातीय समूहों तक समान रूप से पहुँचाने और विभिन्न जातीय समूहों की भाषाओं व लिपियों का सम्मान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

वैश्विक शासन सुधार पर जोर

प्रतिभागियों ने इस बात पर बल दिया कि वैश्विक मानवाधिकार शासन प्रणाली में सुधार का केंद्र कार्यान्वयन की गुणवत्ता, विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व और क्षमता निर्माण पर होना चाहिए। उन्होंने संयुक्त परामर्श, सह-निर्माण और साझा लाभ के सिद्धांतों का पालन करने की आवश्यकता जताई।

गौरतलब है कि यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिमी देशों और चीन के बीच मानवाधिकार मुद्दों पर तनाव बना हुआ है, और UNHRC में विकासशील बनाम विकसित देशों की प्राथमिकताओं का टकराव एक स्थायी विषय बन चुका है।

आगे की राह

इस कार्यक्रम के माध्यम से चीन ने वैश्विक मंच पर अपनी मानवाधिकार अवधारणा को प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। आलोचकों का कहना है कि चीन की इस पहल को उसके घरेलू मानवाधिकार रिकॉर्ड के संदर्भ में भी परखा जाना चाहिए। आने वाले सत्रों में यह देखना होगा कि वैश्विक मानवाधिकार सुधार की दिशा में ये प्रस्ताव किस रूप में आगे बढ़ते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह जवाबदेही को आर्थिक प्रगति के पीछे छिपाने का तरीका है। श्वेत पत्र और इस कार्यक्रम को एक साथ देखें तो स्पष्ट होता है कि चीन वैश्विक दक्षिण (Global South) को अपने पाले में लाने की व्यापक रणनीति पर काम कर रहा है। UNHRC में बहुमत बनाने की इस कोशिश को केवल मानवाधिकार चर्चा नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के एक अध्याय के रूप में पढ़ा जाना चाहिए।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

UNHRC के 62वें सत्र में चीन ने क्या आयोजित किया?
चीन के संयुक्त राष्ट्र संघ और जिनेवा स्थित स्थायी मिशन ने संयुक्त रूप से पैलेस डेस नेशन्स में 'मानवाधिकार और वैश्विक शासन' विषय पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें वैश्विक मानवाधिकार शासन सुधार और बहुपक्षीय सहयोग पर चर्चा हुई।
चीन का हालिया मानवाधिकार श्वेत पत्र क्या है?
चीन ने 'अधिक न्यायपूर्ण और तर्कसंगत वैश्विक शासन प्रणाली का निर्माण: चीन के विचार, पहल और कार्य' शीर्षक से एक श्वेत पत्र जारी किया है। यह दस्तावेज़ 'विकास के माध्यम से मानवाधिकारों को बढ़ावा देने' की चीन की अवधारणा और वैश्विक मानवाधिकार सहयोग में उसकी भूमिका को रेखांकित करता है।
मानवाधिकारों के राजनीतिकरण के विरोध से चीन का क्या आशय है?
प्रतिभागियों के अनुसार, किसी देश पर बाहरी मानवाधिकार मॉडल थोपना और मानवाधिकार मुद्दों को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना अनुचित है। चीन का तर्क है कि प्रत्येक देश को अपनी परिस्थितियों और जनता की जरूरतों के अनुरूप मानवाधिकार विकास का मार्ग चुनने का अधिकार है।
इस कार्यक्रम में विकासशील देशों पर क्या जोर दिया गया?
प्रतिभागियों ने वैश्विक मानवाधिकार शासन में विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व और बोलने के अधिकार को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही उनकी क्षमता निर्माण में सहयोग देने और आजीविका व विकास को प्राथमिकता देने की बात कही गई।
यह आयोजन वैश्विक मानवाधिकार बहस के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह आयोजन ऐसे समय में हुआ जब पश्चिमी देशों और चीन के बीच मानवाधिकार मुद्दों पर तनाव बना हुआ है। UNHRC के मंच पर चीन की यह सक्रियता वैश्विक मानवाधिकार शासन की दिशा और विकसित बनाम विकासशील देशों की प्राथमिकताओं के बीच चल रही व्यापक बहस का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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