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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की 20वीं वर्षगांठ पर जिनेवा में उच्च-स्तरीय संवाद, चीन ने रखा वैश्विक शासन का पक्ष

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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की 20वीं वर्षगांठ पर जिनेवा में उच्च-स्तरीय संवाद, चीन ने रखा वैश्विक शासन का पक्ष

सारांश

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की स्थापना के 20 वर्ष पूरे होने पर जिनेवा में उच्च-स्तरीय संवाद हुआ। चीन ने संप्रभु समानता और गैर-चयनात्मकता के सिद्धांतों पर जोर देते हुए मानवाधिकारों के राजनीतिकरण का विरोध किया और वैश्विक शासन में अपनी पहल को मार्गदर्शक बताया।

मुख्य बातें

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 62वें सत्र में 21 जून 2026 को परिषद की 20वीं वर्षगांठ पर उच्च-स्तरीय संवाद आयोजित हुआ।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने वीडियो संदेश दिया; मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क और परिषद अध्यक्ष सिधार्तो रेज़ा सूर्योदिपुरो ने भाग लिया।
जिनेवा में चीन के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत च्या क्वेइदे ने चीन की वैश्विक शासन पहल को परिषद के लिए मार्गदर्शक बताया।
चीन ने संप्रभु समानता , गैर-चयनात्मकता और मानवाधिकारों के राजनीतिकरण के विरोध पर बल दिया।
परिषद की स्थापना वर्ष 2006 में हुई थी और इसका मुख्यालय जिनेवा में है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 62वें सत्र के दौरान 21 जून 2026 को जिनेवा में परिषद की स्थापना की 20वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक उच्च-स्तरीय संवाद का आयोजन किया गया। इस संवाद में संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारियों के साथ-साथ सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने परिषद के भविष्य और मानवाधिकारों की वैश्विक दिशा पर विचार-विमर्श किया।

प्रमुख भागीदार और उनकी उपस्थिति

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस अवसर पर वीडियो संदेश के माध्यम से अपने विचार साझा किए। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क और परिषद अध्यक्ष सिधार्तो रेज़ा सूर्योदिपुरो ने सत्र में प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया। जिनेवा में चीन के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत च्या क्वेइदे ने भी इस उच्च-स्तरीय संवाद को संबोधित किया।

चीन का पक्ष और वैश्विक शासन पहल

राजदूत च्या क्वेइदे ने अपने संबोधन में कहा कि 20वीं वर्षगांठ परिषद के मूल उद्देश्यों पर चिंतन और आगामी दिशा तय करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि चीन द्वारा प्रस्तावित वैश्विक शासन पहल, शासन में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए एक समाधान प्रस्तुत करती है और परिषद के कार्य को सुदृढ़ बनाने में मार्गदर्शक भूमिका निभा सकती है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि परिषद के कार्य में संप्रभु समानता, अंतर्राष्ट्रीय कानून के शासन, तथा निष्पक्षता, वस्तुनिष्ठता, गैर-चयनात्मकता और रचनात्मक संवाद के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है। राजदूत च्या ने मानवाधिकारों के राजनीतिकरण का विरोध करते हुए मानव-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने की वकालत की।

नागरिक और आर्थिक अधिकारों में संतुलन का आग्रह

चीनी राजदूत ने कहा कि नागरिक-राजनीतिक अधिकारों के साथ-साथ आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों को भी संतुलित रूप से प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि सभ्यताओं की विविधता को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक देश को अपना मानवाधिकार विकास पथ स्वयं चुनने का अधिकार होना चाहिए।

राजदूत च्या ने कहा कि चीन मानवाधिकारों के संरक्षण और संवर्धन को अत्यधिक महत्व देता है और अपने विकास पथ पर दृढ़ है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन सभी देशों के साथ मिलकर अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कार्य को आगे बढ़ाने और साझा भविष्य के समुदाय के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।

परिषद की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की स्थापना वर्ष 2006 में हुई थी और इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड में है। यह परिषद दुनिया भर में मानवाधिकारों की स्थिति की समीक्षा करती है और उल्लंघनों पर ध्यान आकर्षित करती है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों के मानकों और उनकी व्याख्या को लेकर पश्चिमी और विकासशील देशों के बीच मतभेद गहरे होते जा रहे हैं।

आगे की राह

इस उच्च-स्तरीय संवाद से परिषद के अगले दो दशकों की कार्यदिशा तय होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानवाधिकारों के प्रति विविध राष्ट्रीय दृष्टिकोणों को समायोजित करते हुए एक समावेशी वैश्विक ढाँचा बनाना परिषद की सबसे बड़ी चुनौती होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह जवाबदेही तंत्र को कमज़ोर करने की कोशिश है। परिषद की असली परीक्षा यही है कि वह विविध दृष्टिकोणों को समायोजित करते हुए भी जवाबदेही से समझौता न करे।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की 20वीं वर्षगांठ का संवाद क्या था?
यह 21 जून 2026 को जिनेवा में परिषद के 62वें सत्र के दौरान आयोजित उच्च-स्तरीय संवाद था, जिसमें परिषद की स्थापना के दो दशक पूरे होने पर उसके भविष्य और वैश्विक मानवाधिकार दिशा पर विचार-विमर्श किया गया। इसमें संयुक्त राष्ट्र महासचिव, मानवाधिकार उच्चायुक्त और सदस्य देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की स्थापना कब हुई थी?
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की स्थापना वर्ष 2006 में हुई थी। इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड में है और यह दुनिया भर में मानवाधिकारों की स्थिति की समीक्षा करती है।
चीन ने मानवाधिकार परिषद में क्या पक्ष रखा?
जिनेवा में चीन के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत च्या क्वेइदे ने संप्रभु समानता, अंतर्राष्ट्रीय कानून के शासन और गैर-चयनात्मकता के सिद्धांतों पर बल दिया। उन्होंने मानवाधिकारों के राजनीतिकरण का विरोध किया और कहा कि प्रत्येक देश को अपना मानवाधिकार विकास पथ चुनने का अधिकार होना चाहिए।
चीन की वैश्विक शासन पहल क्या है और इसका परिषद से क्या संबंध है?
चीन द्वारा प्रस्तावित वैश्विक शासन पहल को राजदूत च्या क्वेइदे ने शासन में मौजूद कमियों को दूर करने का एक समाधान बताया। उनके अनुसार यह पहल परिषद के कार्य को बेहतर बनाने में मार्गदर्शक भूमिका निभा सकती है।
इस संवाद में किन प्रमुख अधिकारियों ने भाग लिया?
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने वीडियो संदेश दिया, जबकि मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क और परिषद अध्यक्ष सिधार्तो रेज़ा सूर्योदिपुरो ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया। जिनेवा में चीन के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत च्या क्वेइदे ने भी संबोधन दिया।
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