24 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

रजा मुराद ने पिता की 115वीं जयंती पर लिखा — 'जो कुछ भी हूं, उनकी वजह से हूं'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
रजा मुराद ने पिता की 115वीं जयंती पर लिखा — 'जो कुछ भी हूं, उनकी वजह से हूं'

सारांश

रजा मुराद ने अपने पिता की 115वीं जयंती पर जो लिखा, वो सिर्फ एक बेटे की भावना नहीं — बल्कि उस दौर की याद है जब एक अकेला इंसान परिवार और सिनेमा दोनों को थाम कर चलता था। 200 से अधिक फिल्मों में काम करने वाले मुराद की विरासत आज भी ज़िंदा है।

मुख्य बातें

रजा मुराद ने 24 सितंबर 2026 को पिता मुराद की 115वीं जयंती पर इंस्टाग्राम पर भावुक श्रद्धांजलि दी।
उन्होंने लिखा — 'मैं जो कुछ भी हूं, उनकी मेहनत और आशीर्वाद की वजह से हूं।' मुराद का असली नाम हामिद अली मुराद था; उन्होंने 200 से अधिक फिल्मों में काम किया।
उनकी प्रमुख फिल्मों में मुगल-ए-आज़म (1960) , दो बीघा ज़मीन (1953) और देवदास (1955) शामिल हैं।
अप्रैल 1997 में मुंबई में उनका निधन हुआ था।

अभिनेता रजा मुराद ने 24 सितंबर 2026 को अपने पिता और भारतीय सिनेमा के दिग्गज कैरेक्टर आर्टिस्ट मुराद की 115वीं जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इंस्टाग्राम पर साझा की गई पुरानी तस्वीरों और एक भावुक संदेश के ज़रिए उन्होंने अपने पिता की मेहनत, त्याग और आशीर्वाद को याद किया।

भावुक संदेश और पुरानी तस्वीरें

रजा मुराद ने इंस्टाग्राम पर बचपन की कुछ तस्वीरें पोस्ट कीं, जिनमें छोटे रजा अपने पिता की गोद में दिख रहे हैं और मुराद सूट पहने कैमरे की ओर मुस्कुराते नज़र आ रहे हैं। अभिनेता ने इस पोस्ट में लिखा, 'आज मेरे पिता मुराद का 115वां जन्मदिन है (24 सितंबर 1911)। उनकी गोद में जो छोटा बच्चा है, वो आपका दोस्त रजा मुराद है।'

उन्होंने आगे जोड़ा, 'मैं आज जो कुछ भी हूं, वो उनकी मेहनत और आशीर्वाद की वजह से हूं। उन्होंने हमारे परिवार की परवरिश के लिए अकेले बहुत संघर्ष किया, क्योंकि वो ही घर में कमाने वाले इकलौते सदस्य थे। उन्हें हमारा पूरा परिवार और उनके लाखों फैंस हमेशा याद करेंगे क्योंकि वो 40, 50 और 60 के दशक के एक मशहूर अभिनेता थे। भगवान उनकी नेक आत्मा को शांति दे। आमीन।'

मुराद — एक दौर के सम्मानित अभिनेता

मुराद का असली नाम हामिद अली मुराद था, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में वे 'मुराद' नाम से ही पहचाने जाते रहे। तीन दशकों के अपने करियर में उन्होंने 200 से अधिक फिल्मों में काम किया, जिनका दायरा 1940 से 1980 के बीच फैला रहा। इसीलिए उन्हें अक्सर 'अंग्रेज़ों के ज़माने के अभिनेता' के रूप में याद किया जाता है।

उन्होंने पिता, जज, पुलिस अफ़सर, जमींदार, राजा जैसे विविध सहायक किरदार निभाए। उनकी उल्लेखनीय फिल्मों में अनमोल घड़ी (1946), अंदाज़ (1949), आन (1952), दो बीघा ज़मीन (1953), देवदास (1955), यहूदी (1958), मुगल-ए-आज़म (1960), ताजमहल (1963), यादों की बारात (1973) और गंगा की सौगंध (1978) शामिल हैं।

यादगार किरदार

बिमल रॉय की क्लासिक फिल्म दो बीघा ज़मीन में उन्होंने जमींदार ठाकुर हरनाम सिंह का यादगार किरदार निभाया था। के. आसिफ की महाकाव्य फिल्म मुगल-ए-आज़म में उन्होंने राजा मान सिंह की भूमिका अदा की, जबकि देवदास में वे देवदास के पिता के रूप में नज़र आए।

गौरतलब है कि उन्होंने 1962 में हॉलीवुड फिल्म टार्जन गोज़ टू इंडिया में भी एक महाराजा की भूमिका निभाई थी — यह उनकी अंतरराष्ट्रीय पहचान का प्रमाण है। अप्रैल 1997 में मुंबई में उनका निधन हो गया था।

पुत्र की विरासत

रजा मुराद स्वयं हिंदी सिनेमा के जाने-माने खलनायक और चरित्र अभिनेता रहे हैं। उनकी यह पोस्ट पिता-पुत्र के रिश्ते की गहराई और भारतीय सिनेमा की उस पीढ़ी के प्रति सम्मान की भावना को सामने लाती है जिसने आज के बॉलीवुड की नींव रखी। आने वाले समय में रजा मुराद जैसे अभिनेताओं द्वारा अपनी विरासत को जीवित रखने की यह कोशिश नई पीढ़ी के दर्शकों को उस स्वर्णिम युग से जोड़ती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि उनके बिना किशोर कुमार और दिलीप कुमार की फिल्में अधूरी रहतीं। यह भी विचारणीय है कि आज जब OTT पर क्लासिक फिल्मों की वापसी हो रही है, ऐसे में इन अभिनेताओं की विरासत को नए सिरे से दस्तावेज़ीकरण की ज़रूरत है।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुराद अभिनेता कौन थे?
मुराद, जिनका असली नाम हामिद अली मुराद था, भारतीय सिनेमा के एक प्रतिष्ठित कैरेक्टर आर्टिस्ट थे जिन्होंने 1940 से 1980 के बीच 200 से अधिक फिल्मों में काम किया। वे मुगल-ए-आज़म, दो बीघा ज़मीन और देवदास जैसी क्लासिक फिल्मों में अपनी यादगार भूमिकाओं के लिए जाने जाते हैं।
रजा मुराद के पिता की 115वीं जयंती कब है?
मुराद का जन्म 24 सितंबर 1911 को हुआ था, इसलिए 24 सितंबर 2026 को उनकी 115वीं जयंती मनाई गई। इसी दिन उनके पुत्र रजा मुराद ने इंस्टाग्राम पर भावुक श्रद्धांजलि पोस्ट की।
मुराद की सबसे यादगार फिल्में कौन सी हैं?
मुराद की यादगार फिल्मों में मुगल-ए-आज़म (1960), दो बीघा ज़मीन (1953), देवदास (1955), यहूदी (1958), अनमोल घड़ी (1946) और यादों की बारात (1973) शामिल हैं। उन्होंने 1962 की हॉलीवुड फिल्म टार्जन गोज़ टू इंडिया में भी एक महाराजा की भूमिका निभाई थी।
मुराद का निधन कब और कहाँ हुआ?
अभिनेता मुराद का निधन अप्रैल 1997 में मुंबई में हुआ था। तीन दशकों तक भारतीय सिनेमा में सक्रिय रहने के बाद उन्होंने अपनी अंतिम साँस ली।
रजा मुराद ने अपने पिता के बारे में क्या लिखा?
रजा मुराद ने इंस्टाग्राम पर लिखा कि वे जो कुछ भी हैं, अपने पिता की मेहनत और आशीर्वाद की वजह से हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनके पिता परिवार में अकेले कमाने वाले सदस्य थे और उन्होंने परिवार की परवरिश के लिए बहुत संघर्ष किया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 5 महीने पहले
  3. 10 महीने पहले
  4. 11 महीने पहले
  5. 11 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले