8 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नाना पाटेकर के निधन पर रजा मुराद भावुक: 'दिल के बादशाह, तबीयत के फकीर थे'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नाना पाटेकर के निधन पर रजा मुराद भावुक: 'दिल के बादशाह, तबीयत के फकीर थे'

सारांश

रजा मुराद ने इंस्टाग्राम पर नाना पाटेकर को याद किया — वो अभिनेता जो करोड़ों की स्क्रिप्ट ठुकरा देते थे, आय का 90% दान करते थे और पजामा-कुर्ते में रहते थे। एक दोस्त की नज़र से, यह श्रद्धांजलि नाना की असली विरासत बयान करती है।

मुख्य बातें

रजा मुराद ने 8 अक्टूबर 2026 को इंस्टाग्राम पर वीडियो जारी कर नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि दी।
मुराद के अनुसार, नाना अपनी कमाई का 90 प्रतिशत ज़रूरतमंदों की मदद में लगाते थे।
नाना पाटेकर करोड़ों की ऑफर ठुकरा देते थे अगर स्क्रिप्ट उन्हें पसंद नहीं आती।
मुराद हर साल गणपति उत्सव पर नाना के घर जाते थे; इस बार मूर्ति पुणे में होने के कारण नहीं जा पाए।
मुराद ने उन्हें 'दिल के बादशाह और तबीयत के फकीर' बताया।

अभिनेता रजा मुराद ने 8 अक्टूबर 2026 को दिवंगत अभिनेता नाना पाटेकर के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और उन्हें एक ऐसे इंसान के रूप में याद किया जो पर्दे पर शेर और दिल से फकीर थे। मुराद ने इंस्टाग्राम पर एक भावुक वीडियो साझा करते हुए कहा कि नाना का जाना हिंदी फिल्म उद्योग के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

मुराद ने क्या कहा

अपने वीडियो संदेश में रजा मुराद ने कहा, 'आज का दिन बेहद दुखद है क्योंकि नाना पाटेकर हमें छोड़कर चले गए। वे कैमरे के सामने और पीछे शेर थे। उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी शेरों की तरह जी और उनकी ज़ुबान कई बार सख्त हो जाती थी, लेकिन दिल बहुत नरम था।' उन्होंने यह भी बताया कि नाना अपनी आय की 90 प्रतिशत रकम ज़रूरतमंदों की मदद में लगा दिया करते थे।

मुराद ने कहा, 'वे दिल के बादशाह और तबीयत के फकीर थे।' उनके शब्दों में नाना का यह परिचय उनकी उदारता और सादगी दोनों को एकसाथ बयान करता था।

अपूरणीय क्षति का एहसास

रजा मुराद ने आगे कहा, 'ये हमारे लिए बहुत बड़ा नुकसान है, जो कभी पूरी नहीं हो पाएगी। उन्होंने अपने हिसाब से ज़िंदगी जी। अपने हिसाब से काम करते थे और वो कभी पैसे के लोभी नहीं रहे।' उन्होंने बताया कि कई लोग करोड़ों रुपये लेकर नाना पाटेकर के पास जाते थे, लेकिन अगर उन्हें स्क्रिप्ट अच्छी नहीं लगती थी, तो वे काम करने से साफ मना कर देते थे।

सादगी और सच्चाई की मिसाल

मुराद ने नाना पाटेकर की जीवनशैली का ज़िक्र करते हुए कहा, 'पजामा-कुर्ता पहनते थे और छोटे से घर में रहते थे। चाहते तो बड़ी बिल्डिंग या बंगला बना लेते, लेकिन दिल से सच्चे थे। उन्हें इतनी शोहरत, इज्जत और दौलत मिली, लेकिन कभी इसका उन पर गलत असर नहीं पड़ा।' यह वर्णन नाना की उस छवि को और पक्का करता है जो दशकों से उनके प्रशंसकों के दिलों में बसी थी।

व्यक्तिगत रिश्ते की याद

रजा मुराद ने बताया कि वे हर साल गणपति उत्सव पर बप्पा के दर्शन करने के लिए नाना पाटेकर के घर जाते थे। उन्होंने कहा, 'इस बार इसलिए नहीं जा पाया क्योंकि उन्होंने बप्पा की मूर्ति पुणे में रखी थी, लेकिन फोन पर बात होती थी।' दोनों के बीच यह वर्षों पुरानी दोस्ती और आपसी सम्मान उनके अंतिम संवाद में भी झलकता था। मुराद ने कहा, 'वे सदा हमारे दिलों में रहेंगे।'

नाना पाटेकर का निधन हिंदी सिनेमा के उस दौर के अंत का प्रतीक है जब अभिनेता अपनी कला और सिद्धांतों को पैसे से ऊपर रखते थे — एक विरासत जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

नाना पाटेकर का 90% आय दान करने और स्क्रिप्ट के आधार पर काम चुनने का दावा एक तीखा विरोधाभास पेश करता है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर सेलिब्रिटी मृत्यु को शोक-सूत्र तक सीमित रखती है, लेकिन नाना की विरासत का असली सवाल यह है कि क्या आने वाली पीढ़ी इस तरह के मूल्यों को अपना पाएगी — या यह सिर्फ एक गुज़रे दौर की याद बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नाना पाटेकर का निधन कब हुआ?
नाना पाटेकर का निधन 8 अक्टूबर 2026 को हुआ, जिसके बाद फिल्म उद्योग के कई साथियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
रजा मुराद ने नाना पाटेकर को कैसे याद किया?
रजा मुराद ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी कर नाना को 'दिल के बादशाह और तबीयत के फकीर' बताया। उन्होंने कहा कि नाना अपनी आय का 90% ज़रूरतमंदों को देते थे और पैसे के लोभ से दूर रहते थे।
नाना पाटेकर की जीवनशैली कैसी थी?
रजा मुराद के अनुसार, नाना पाटेकर बेहद सादा जीवन जीते थे — पजामा-कुर्ता पहनते थे और छोटे से घर में रहते थे। उन्होंने कभी शोहरत और दौलत को अपनी ज़िंदगी पर हावी नहीं होने दिया।
रजा मुराद और नाना पाटेकर का क्या रिश्ता था?
दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी। रजा मुराद हर साल गणपति उत्सव पर नाना पाटेकर के घर बप्पा के दर्शन करने जाते थे। इस साल नाना ने मूर्ति पुणे में रखी थी, इसलिए मुलाकात नहीं हो पाई, लेकिन फोन पर बात होती थी।
नाना पाटेकर के निधन का बॉलीवुड पर क्या असर पड़ा?
नाना पाटेकर के निधन को हिंदी फिल्म उद्योग के लिए अपूरणीय क्षति बताया जा रहा है। रजा मुराद सहित कई कलाकारों ने कहा कि उनके जैसा अभिनेता और इंसान दोबारा नहीं मिलेगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 घंटे पहले
  2. 6 घंटे पहले
  3. 7 घंटे पहले
  4. 7 घंटे पहले
  5. 9 घंटे पहले
  6. 9 घंटे पहले
  7. 1 सप्ताह पहले
  8. 2 सप्ताह पहले