नाना पाटेकर को उस्ताद अमजद अली खान की भावपूर्ण श्रद्धांजलि — 'उनकी जगह कोई नहीं ले सकता'
सारांश
मुख्य बातें
सरोद के महान उस्ताद अमजद अली खान ने दिवंगत अभिनेता नाना पाटेकर को गहरी श्रद्धांजलि अर्पित की है और कहा कि वे उन विरले कलाकारों में से थे जिनकी जगह भरना असंभव है। 9 अक्टूबर 2026 को मुंबई में एक बातचीत में उन्होंने नाना पाटेकर के निधन पर शोक व्यक्त किया। नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर 2026 को 75 वर्ष की आयु में कार्डियक अरेस्ट के कारण निधन हो गया था।
उस्ताद की भावपूर्ण प्रतिक्रिया
उस्ताद अमजद अली खान ने कहा, 'नाना पाटेकर के निधन की खबर सुनकर बहुत दुख हुआ है। वह एक महान कलाकार थे और हम सभी उनके काम की प्रशंसा करते हैं। मुझे सिर्फ एक बार उनसे मिलने का सौभाग्य मिला था और मुझे आज भी उनकी कई फिल्में याद हैं।'
उन्होंने आगे जोर देकर कहा, 'वह एक महान अभिनेता थे। उनके जाने से फिल्म इंडस्ट्री को बड़ा नुकसान हुआ है। उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। वह हमेशा हमारे दिलों-दिमाग में रहेंगे और अपनी फिल्मों के जरिए हमेशा जीवित रहेंगे।'
नाना पाटेकर का अंतिम सफर
गोवा के डोना पाउला स्थित अपने आवास पर वे अचेत अवस्था में पाए गए, जिसके बाद उन्हें पणजी के मणिपाल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों के अनुसार उनकी मृत्यु कार्डियक अरेस्ट से हुई। अस्पताल में चिकित्सकों ने करीब 45 मिनट तक CPR दिया, किंतु उन्हें बचाया नहीं जा सका।
उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ पुणे के डोंजे स्थित उनके फार्महाउस पर किया गया।
पाँच दशकों का अभिनय सफर
नाना पाटेकर का फिल्मी करियर लगभग पाँच दशकों तक फैला रहा, जिसमें उन्होंने अनेक यादगार भूमिकाएँ निभाईं। इस दौरान उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
फिल्म 'प्रहार' की शूटिंग के लिए कड़ी सैन्य ट्रेनिंग लेने के बाद उन्हें प्रादेशिक सेना द्वारा लेफ्टिनेंट कर्नल की मानद उपाधि से नवाज़ा गया था — यह सम्मान उनकी असाधारण समर्पण-भावना का प्रतीक था।
सामाजिक योगदान और 'नाम फाउंडेशन'
परदे के बाहर नाना पाटेकर उतने ही संवेदनशील थे जितने पर्दे पर सशक्त। उन्होंने अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा सूखे से पीड़ित महाराष्ट्र के किसानों की मदद के लिए 'नाम फाउंडेशन' के माध्यम से सामाजिक कार्यों में लगाया। गौरतलब है कि यह फाउंडेशन ग्रामीण महाराष्ट्र में कृषि संकट से जूझ रहे परिवारों के लिए राहत का एक प्रमुख स्रोत बन चुकी थी।
उस्ताद अमजद अली खान जैसे शास्त्रीय संगीत के दिग्गज का इस प्रकार श्रद्धांजलि देना यह दर्शाता है कि नाना पाटेकर की कला की गूँज केवल सिनेमा जगत तक सीमित नहीं थी — वे भारतीय संस्कृति के व्यापक परिदृश्य में एक अमिट छाप छोड़ गए हैं।