8 अक्टूबर 2026
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नाना पाटेकर नहीं रहे: 75 वर्ष की उम्र में निधन, 'परिंदा' के अन्ना से 'वेलकम' के उदय शेट्टी तक अमर रहा सफर

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नाना पाटेकर नहीं रहे: 75 वर्ष की उम्र में निधन, 'परिंदा' के अन्ना से 'वेलकम' के उदय शेट्टी तक अमर रहा सफर

सारांश

पाँच दशकों का वह सफर जो 'गमन' से शुरू हुआ और 'परिंदा' के राष्ट्रीय पुरस्कार से होता हुआ 'वेलकम' की कॉमेडी तक पहुँचा — नाना पाटेकर का जाना भारतीय सिनेमा के एक युग का अवसान है। 75 वर्ष की आयु में गोवा में कार्डियक अरेस्ट से निधन हुआ।

मुख्य बातें

दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर 2026 को 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
रिपोर्टों के अनुसार गोवा के डोना पाउला स्थित आवास पर कार्डियक अरेस्ट आया; मणिपाल अस्पताल में मृत घोषित।
1989 की 'परिंदा' में 'अन्ना' की भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।
'वेलकम' (2007) में उदय शेट्टी के किरदार ने उन्हें कॉमेडी में भी अमर बनाया।
सिनेमा और समाजसेवा में योगदान के लिए 2013 में पद्म श्री से सम्मानित।
लगभग पाँच दशक के करियर में हिंदी और मराठी दोनों भाषाओं की फिल्मों में अविस्मरणीय प्रदर्शन किए।

हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर 2026 को 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें गुरुवार सुबह गोवा के डोना पाउला स्थित उनके आवास पर कार्डियक अरेस्ट आया, जिसके बाद उन्हें तत्काल मणिपाल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने के लिए सीपीआर सहित हरसंभव प्रयास किए, लेकिन उन्हें मृत घोषित करना पड़ा। पाँच दशकों के करियर में उनकी दमदार भूमिकाओं और अद्वितीय अभिनय-शैली ने उन्हें भारतीय सिनेमा की एक अपरिहार्य आवाज़ बनाया।

प्रारंभिक जीवन और रंगमंच से सिनेमा तक

नाना पाटेकर का वास्तविक नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उनका जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के मुरुद-जंजीरा में हुआ था। उन्होंने मुंबई के प्रतिष्ठित सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट से शिक्षा ग्रहण की और समानांतर रूप से थिएटर से भी अपना जुड़ाव बनाए रखा। उनकी यह रंगमंच की साधना आगे चलकर उनकी अभिनय-क्षमता की नींव बनी।

1978 में फिल्म 'गमन' से उन्होंने हिंदी सिनेमा में पदार्पण किया। अगले ही वर्ष वे मराठी फिल्म 'सिंहासन' में नज़र आए। इसके बाद 'भालू', 'रघु मैना' और 'सावित्री' जैसी मराठी फिल्मों ने उनकी क्षेत्रीय उपस्थिति को पक्का किया।

करियर का निर्णायक मोड़: 'अंकुश' से 'परिंदा' तक

1986 में निर्देशक एन. चंद्रा की फिल्म 'अंकुश' ने नाना पाटेकर को एक नई पहचान दी। इस फिल्म में उन्होंने आम नागरिक के भीतर दबे आक्रोश और व्यवस्था से मोहभंग को जिस प्रामाणिकता से जिया, वह उस दौर के सिनेमा में विरल था। इसके बाद 'प्रतिघात', 'मोहरे', 'अंधा युद्ध' और 'सलाम बॉम्बे' जैसी फिल्मों में उनके अभिनय ने उन्हें उस पीढ़ी का सबसे तीव्र चरित्र-अभिनेता स्थापित किया।

1989 में विधु विनोद चोपड़ा की 'परिंदा' उनके करियर की सर्वोच्च उपलब्धियों में से एक बनी। इसमें उन्होंने खूंखार अपराधी 'अन्ना' का किरदार निभाया — एक ऐसा किरदार जो डर और भावनात्मक गहराई का असाधारण संयोजन था। इस भूमिका के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान किया गया।

1990 के दशक और 2000 का दौर: विविधता की मिसाल

1990 के दशक में नाना ने अपनी अभिनय-रेंज का लगातार विस्तार किया। 'अग्निसाक्षी', 'खामोशी: द म्यूजिकल', 'तिरंगा', 'यशवंत' और 'कोहराम' जैसी फिल्मों में उन्होंने एक के बाद एक अलग-अलग आयाम प्रस्तुत किए।

2004 में 'अब तक छप्पन' में पुलिस अधिकारी साधु आगाशे की भूमिका को समीक्षकों ने उनके सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में गिना। इसके बाद प्रकाश झा की 'अपहरण', 'टैक्सी नंबर 9211', 'राजनीति', 'द अटैक्स ऑफ 26/11' और 'काला' में उनके किरदारों ने दर्शकों पर अमिट छाप छोड़ी।

उदय शेट्टी: कॉमेडी में नई पहचान

2007 में आई 'वेलकम' ने नाना पाटेकर को एक सर्वथा नए अवतार में प्रस्तुत किया। गैंगस्टर उदय शेट्टी के रूप में उनकी कॉमिक टाइमिंग और संवाद-अदायगी ने साबित किया कि वे सिर्फ गंभीर भूमिकाओं तक सीमित नहीं थे। 'उदय शेट्टी' आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार हास्य-किरदारों में शुमार किया जाता है।

मराठी सिनेमा, निर्देशन और सामाजिक योगदान

मराठी सिनेमा से नाना का रिश्ता सदा गहरा रहा। 'देऊल', 'नटसम्राट', 'डॉ. प्रकाश बाबा आमटे: द रियल हीरो' और 'यशवंतराव चव्हाण- बखर एका वादालाची' जैसी फिल्मों में उनका अभिनय मराठी दर्शकों के लिए अविस्मरणीय रहा।

1991 में उन्होंने 'प्रहार: द फाइनल अटैक' का निर्देशन भी किया, जो भारतीय सेना और एक अनुशासित कमांडो की कहानी पर केंद्रित थी। सिनेमा के बाहर भी नाना सक्रिय रहे — महाराष्ट्र में सूखाग्रस्त किसानों और प्रभावित परिवारों की सहायता में उन्होंने व्यक्तिगत रूप से भाग लिया। कला और समाज में योगदान के लिए उन्हें 2013 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।

नाना पाटेकर ने अपनी निजी ज़िंदगी को हमेशा मीडिया की चकाचौंध से दूर रखा। उनके जाने से हिंदी और मराठी सिनेमा ने एक ऐसा स्तंभ खो दिया है जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी। भारतीय सिनेमा में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

उस अभिनय-दर्शन का अवसान है जो बॉक्स-ऑफिस की गणनाओं से ऊपर उठकर किरदार को जीता था। एक ऐसे दौर में जब हिंदी सिनेमा स्टार-इमेज और फ्रैंचाइज़ी पर टिका है, नाना ने हर दशक में खुद को नए सिरे से साबित किया — 'परिंदा' का डरावना अन्ना हो या 'वेलकम' का हास्यास्पद उदय शेट्टी। उनकी सामाजिक सक्रियता — महाराष्ट्र के किसानों के लिए व्यक्तिगत प्रयास — भी उतनी ही असाधारण थी जितनी उनकी अभिनय-क्षमता। मराठी और हिंदी सिनेमा दोनों में समान प्रासंगिकता रखना उनकी सबसे बड़ी विशिष्टता थी, और यही विरासत उन्हें आने वाले अभिनेताओं के लिए एक कसौटी बनाती है।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नाना पाटेकर का निधन कैसे हुआ?
रिपोर्टों के अनुसार, नाना पाटेकर को 8 अक्टूबर 2026 की सुबह गोवा के डोना पाउला स्थित उनके घर पर कार्डियक अरेस्ट आया। उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया जहाँ डॉक्टरों ने सीपीआर सहित हरसंभव प्रयास किए, लेकिन वे उन्हें बचा नहीं सके और उन्हें मृत घोषित करना पड़ा।
नाना पाटेकर का असली नाम और जन्मस्थान क्या था?
नाना पाटेकर का वास्तविक नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उनका जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के मुरुद-जंजीरा में हुआ था। उन्होंने मुंबई के सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट से पढ़ाई की और थिएटर से भी जुड़े रहे।
नाना पाटेकर को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार किस फिल्म के लिए मिला?
नाना पाटेकर को 1989 की फिल्म 'परिंदा' में खूंखार अपराधी 'अन्ना' की भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। यह फिल्म विधु विनोद चोपड़ा ने निर्देशित की थी।
'वेलकम' में नाना पाटेकर का किरदार क्यों इतना यादगार है?
2007 की फिल्म 'वेलकम' में नाना पाटेकर ने गैंगस्टर उदय शेट्टी का किरदार निभाया, जो उनकी छवि से बिल्कुल अलग एक हास्य-भूमिका थी। उनकी कॉमिक टाइमिंग और संवाद-अदायगी ने इस किरदार को हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार कॉमिक किरदारों में स्थान दिला दिया।
नाना पाटेकर को पद्म श्री कब मिला और उनके सामाजिक कार्य क्या थे?
नाना पाटेकर को कला और सिनेमा में उनके योगदान के लिए 2013 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा वे महाराष्ट्र में सूखे और कृषि-संकट से प्रभावित किसानों व उनके परिवारों की सहायता से जुड़े प्रयासों में व्यक्तिगत रूप से सक्रिय रहे।
राष्ट्र प्रेस
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