8 अक्टूबर 2026
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नाना पाटेकर का 75 वर्ष की आयु में निधन, गडकरी-कुमारस्वामी समेत कई मंत्रियों ने जताया शोक

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नाना पाटेकर का 75 वर्ष की आयु में निधन, गडकरी-कुमारस्वामी समेत कई मंत्रियों ने जताया शोक

सारांश

पाँच दशकों की अभिनय यात्रा, 'नाम फाउंडेशन' के ज़रिये किसानों की सेवा और 'पद्म श्री' — नाना पाटेकर सिर्फ एक स्टार नहीं, एक युग थे। 8 अक्टूबर को गोवा में 75 वर्ष की आयु में उनके निधन पर केंद्र सरकार के कई मंत्रियों ने शोक व्यक्त किया।

मुख्य बातें

दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर 2026 को गोवा स्थित आवास पर 75 वर्ष की आयु में निधन।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने उन्हें करीबी मित्र बताया और पाँच दशकों के सिनेमाई योगदान को याद किया।
एचडी कुमारस्वामी , शिवराज सिंह चौहान , सीआर पाटिल , मनोहर लाल और सुकांता मजूमदार ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
'नाम फाउंडेशन' के माध्यम से ग्रामीण महाराष्ट्र में जल संरक्षण और किसान परिवारों की सहायता उनकी सामाजिक विरासत।
'परिंदा', 'क्रांतिवीर', 'नटसम्राट' और 'वेलकम' जैसी फिल्मों से पद्म श्री सम्मानित नाना ने हिंदी व मराठी सिनेमा को समृद्ध किया।

दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 की सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया। पाँच दशकों से अधिक समय तक मराठी और हिंदी सिनेमा में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराने वाले इस 'पद्म श्री' सम्मानित कलाकार के जाने से भारतीय मनोरंजन जगत में शोक की लहर दौड़ गई। केंद्रीय मंत्रियों से लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं तक, सभी ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

गडकरी की श्रद्धांजलि — एक करीबी मित्र का दर्द

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, 'दिग्गज भारतीय अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर बेहद चौंकाने वाली और दुखद है। मैं उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। नाना और मेरे बीच बहुत करीबी और दोस्ताना संबंध थे।' गडकरी ने कहा कि नाना पाटेकर ने अपनी विशिष्ट संवाद अदायगी से अनगिनत किरदारों को अमरत्व प्रदान किया और भारतीय सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई।

गडकरी ने यह भी रेखांकित किया कि 'नाम फाउंडेशन' के माध्यम से ग्रामीण महाराष्ट्र में जल संरक्षण और भंडारण के क्षेत्र में नाना का योगदान उल्लेखनीय था। आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों की मदद करना उनकी सामाजिक संवेदनशीलता का प्रमाण था।

अन्य केंद्रीय मंत्रियों की प्रतिक्रिया

केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि नाना पाटेकर की दमदार अभिनय-शैली, विशिष्ट आवाज़ और सिनेमा में उनके उल्लेखनीय योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने इसे भारतीय सिनेमा और कला जगत के लिए 'अपूरणीय क्षति' बताया।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लिखा, 'कभी 'क्रांतिवीर' और 'परिंदा' जैसी फिल्मों में गंभीरता से झकझोरते थे, तो 'वेलकम' के उदय शेट्टी बनकर खूब हंसाते-गुदगुदाते थे। एक ही कलाकार में इतनी गहराई और हास्य-विनोद था।' चौहान ने कहा कि नाना की फिल्में और किरदार लंबे समय तक स्मृतियों में रहेंगे।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने नाना पाटेकर के सिनेमाई योगदान के साथ-साथ जल संरक्षण, जलस्रोतों के पुनर्जीवन और ग्रामीण जल-सुरक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भी याद किया। उन्होंने कहा कि नाना ने यह संदेश दिया कि सामाजिक परिवर्तन केवल शब्दों से नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास और जनभागीदारी से आता है।

केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने नाना को 'प्रख्यात अभिनेता, रंगमंच के दिग्गज कलाकार और संवेदनशील समाजसेवी' बताते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय सिनेमा पर अमिट छाप छोड़ी। केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांता मजूमदार ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि 'क्रांतिवीर', 'परिंदा' और 'नटसम्राट' जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।

सिनेमा और समाज — दोहरी विरासत

नाना पाटेकर केवल एक कुशल अभिनेता नहीं थे — वे एक प्रतिबद्ध समाजसेवी भी थे। 'नाम फाउंडेशन' के ज़रिये उन्होंने महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में जल संरक्षण की दिशा में अनथक काम किया और किसान परिवारों को संबल दिया। यह ऐसे समय में विशेष रूप से महत्वपूर्ण था जब विदर्भ और मराठवाड़ा में किसान आत्महत्याएँ चिंता का बड़ा विषय बनी हुई थीं।

गौरतलब है कि पद्म श्री से सम्मानित नाना ने 'परिंदा', 'क्रांतिवीर', 'नटसम्राट' और 'वेलकम' सरीखी फिल्मों के माध्यम से दर्शकों की पीढ़ियों को प्रभावित किया। हिंदी के साथ-साथ मराठी सिनेमा में भी उनकी पकड़ बेजोड़ थी।

आगे क्या

नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार की तिथि और स्थान की आधिकारिक पुष्टि की प्रतीक्षा है। फ़िल्म उद्योग और राजनीतिक जगत की ओर से श्रद्धांजलियों का सिलसिला जारी है। उनकी सामाजिक संस्था 'नाम फाउंडेशन' का भविष्य और उसके काम की निरंतरता भी चर्चा में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक वास्तविक सामाजिक स्वीकृति है। मुख्यधारा की कवरेज उनके फिल्मी करियर पर केंद्रित रहेगी, लेकिन असली सवाल यह है कि 'नाम फाउंडेशन' का काम अब किस दिशा में जाएगा।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नाना पाटेकर का निधन कब और कहाँ हुआ?
नाना पाटेकर का निधन 8 अक्टूबर 2026 को गुरुवार की सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर हुआ। वे 75 वर्ष के थे।
नाना पाटेकर की प्रमुख फिल्में कौन सी थीं?
नाना पाटेकर ने 'परिंदा', 'क्रांतिवीर', 'नटसम्राट' और 'वेलकम' जैसी फिल्मों में यादगार भूमिकाएँ निभाईं। उन्होंने पाँच दशकों से अधिक समय तक हिंदी और मराठी सिनेमा में काम किया।
नाना पाटेकर की 'नाम फाउंडेशन' क्या करती थी?
'नाम फाउंडेशन' ग्रामीण महाराष्ट्र में जल संरक्षण, जलस्रोतों के पुनर्जीवन और किसान परिवारों की सहायता के लिए काम करती थी। आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को आर्थिक और भावनात्मक सहारा देना इसका मुख्य उद्देश्य था।
केंद्रीय मंत्रियों ने नाना पाटेकर को किस रूप में याद किया?
नितिन गडकरी ने उन्हें करीबी मित्र बताया, जबकि शिवराज सिंह चौहान ने उनकी अभिनय विविधता को सराहा। एचडी कुमारस्वामी, सीआर पाटिल, मनोहर लाल और सुकांता मजूमदार ने भी उन्हें भारतीय सिनेमा और समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
नाना पाटेकर को कौन सा राष्ट्रीय सम्मान मिला था?
नाना पाटेकर को 'पद्म श्री' से सम्मानित किया गया था, जो भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने श्रद्धांजलि में विशेष रूप से इसका उल्लेख किया।
राष्ट्र प्रेस
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