8 अक्टूबर 2026
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नाना पाटेकर के निधन पर गडकरी बोले — 'करीबी दोस्त थे, परिवारों में गहरे रिश्ते', महाराष्ट्र के नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

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नाना पाटेकर के निधन पर गडकरी बोले — 'करीबी दोस्त थे, परिवारों में गहरे रिश्ते', महाराष्ट्र के नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

सारांश

नाना पाटेकर के जाने से सिर्फ सिनेमा नहीं, एक पूरा सामाजिक आंदोलन अनाथ हुआ है। गडकरी से लेकर रोहित पवार तक — सबने एक ही बात कही: वे परदे के बाहर उससे भी बड़े इंसान थे, जितने परदे पर दिखते थे।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नाना पाटेकर को अपना 'बहुत करीबी दोस्त' बताया और दोनों परिवारों के बीच वर्षों पुराने संबंधों का उल्लेख किया।
गडकरी ने याद दिलाया कि कारगिल युद्ध के दौरान नाना पाटेकर वर्दी पहनकर सीमा पर सैनिकों के साथ गए थे।
मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बताया कि नाना पाटेकर ने 'जलयुक्त शिवार' पहल के तहत किसानों के खेतों तक पानी पहुँचाने का काम किया।
राज्यसभा सांसद अनिल बोंडे ने कहा कि नाम फाउंडेशन के ज़रिए नाना ने विदर्भ और मराठवाड़ा के किसान आत्महत्या पीड़ित परिवारों की मदद की।
मंत्री गिरीश महाजन ने कहा कि नाना पाटेकर और मकरंद अनासपुरे के फाउंडेशन का काम अविस्मरणीय है।
NCP (SP) विधायक रोहित पवार ने बताया कि छात्र आंदोलन के दौरान भी नाना पाटेकर ने तुरंत सहयोग दिया था।

दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी समेत महाराष्ट्र के कई वरिष्ठ नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है। 8 अक्टूबर 2026 को नेताओं ने नाना पाटेकर के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को याद करते हुए उन्हें एक अनूठे कलाकार और समाजसेवी के रूप में श्रद्धांजलि दी। गडकरी ने उन्हें एक ऐसा इंसान बताया जिनमें सामाजिक चेतना, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता कूट-कूटकर भरी थी।

गडकरी की श्रद्धांजलि

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, 'वे मेरे बहुत करीबी दोस्त थे और हमारे परिवारों के बीच कई सालों से अच्छे संबंध रहे हैं।' उन्होंने आगे कहा कि नाना पाटेकर ने किसानों, जल संरक्षण और किसान आत्महत्या से प्रभावित परिवारों के लिए बेहद संवेदनशीलता के साथ काम किया। गडकरी के अनुसार, 'हिंदी और मराठी सिनेमा में उनके काम को हम कई सालों तक याद रखेंगे — वे एक सीधे-सादे और स्पष्ट बोलने वाले इंसान थे।'

गडकरी ने यह भी स्मरण किया कि कारगिल युद्ध के दौरान नाना पाटेकर वर्दी पहनकर सीमा पर पहुँचे थे और उन्होंने कई मौकों पर सैनिकों की बहादुरी के प्रति अपनी देशभक्ति और सम्मान का परिचय दिया। उन्होंने नाना के निधन को 'सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन के लिए एक अपूरणीय क्षति' बताया।

बावनकुले और महाजन के उद्गार

महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि पिछले 15 से 18 वर्षों से उनका नाना पाटेकर से करीबी जुड़ाव रहा। उन्होंने बताया कि नाना पाटेकर ने उन इलाकों में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने का काम किया जहाँ बिजली नहीं थी। देवेंद्र फडणवीस सरकार के कार्यकाल में 'जलयुक्त शिवार' पहल के तहत उन्होंने किसानों के खेतों तक पानी पहुँचाने का भी काम किया।

महाराष्ट्र सरकार के मंत्री गिरीश महाजन ने कहा कि नाना पाटेकर और मकरंद अनासपुरे ने मिलकर अपने फाउंडेशन के ज़रिए जो सामाजिक कार्य किए, वे अविस्मरणीय हैं। महाजन ने बताया कि 2014 से 2019 तक सिंचाई विभाग से जुड़े रहने के दौरान उनके नाना के साथ करीबी संबंध थे और गरीब किसानों के प्रति नाना की चिंता को वे कभी नहीं भूल सकते।

'नाम फाउंडेशन' और किसान सेवा

भाजपा के राज्यसभा सांसद अनिल बोंडे ने कहा कि नाना पाटेकर 'सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि एक समाजसेवी भी थे।' उन्होंने याद दिलाया कि जब विदर्भ और मराठवाड़ा में किसान आत्महत्याएँ हो रही थीं, तब नाना ने 'नाम फाउंडेशन' के ज़रिए उन किसानों के परिवारों की मदद के लिए अथक परिश्रम किया। बोंडे ने कहा, 'जिन किसानों ने आत्महत्या की, उनके बच्चों को — खासकर उन्हें जिनका कोई सहारा नहीं था — नाना में एक नाना और एक भाई मिला।'

रोहित पवार और अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने कहा कि नाना पाटेकर ने फिल्म इंडस्ट्री में महत्वपूर्ण योगदान दिया और सार्थक संदेश देने वाली कई बेहतरीन फिल्मों में काम किया। उन्होंने यह भी बताया कि नाना पाटेकर ने सूखे से प्रभावित इलाकों में जल संरक्षण के लिए उल्लेखनीय काम किया और अपने फाउंडेशन के माध्यम से जब भी उन्हें पानी से जुड़े कार्यों के लिए बुलाया गया, उन्होंने खुशी-खुशी मदद की। रोहित पवार ने यह भी स्मरण किया कि अजीत पवार के साथ भी नाना पाटेकर के विशेष संबंध थे और छात्र आंदोलन के दौरान उन्होंने खुद नाना को फोन करके आंदोलन में शामिल होने का अनुरोध किया था।

नाना पाटेकर का निधन भारतीय सिनेमा और सामाजिक कार्यों की दुनिया में एक ऐसे शून्य का निर्माण करता है जिसे भरना आसान नहीं होगा — उनकी विरासत परदे पर उनके किरदारों से कहीं आगे, उन लाखों किसान परिवारों के जीवन में जीती रहेगी जिनके लिए उन्होंने चुपचाप काम किया।

संपादकीय दृष्टिकोण

हर बयान में एक निजी स्मृति है, एक ठोस काम का हवाला है। यह इस बात का प्रमाण है कि नाना पाटेकर ने राजनीतिक सीमाओं को पार करते हुए सामाजिक कार्यों में वास्तविक साझेदारी बनाई थी। 'नाम फाउंडेशन' के ज़रिए किसान परिवारों की मदद कोई छवि-निर्माण नहीं था — यह ज़मीन पर किया गया, वर्षों तक निरंतर काम था। मुख्यधारा की कवरेज उनके सिनेमाई योगदान पर केंद्रित रहेगी, लेकिन असली विरासत उन बच्चों में है जिन्हें 'नाम फाउंडेशन' ने सहारा दिया।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नाना पाटेकर का निधन कब हुआ?
नाना पाटेकर का निधन 8 अक्टूबर 2026 को हुआ। उनके निधन की खबर के बाद महाराष्ट्र और देशभर में शोक की लहर दौड़ गई।
नाना पाटेकर का 'नाम फाउंडेशन' क्या है?
नाम फाउंडेशन नाना पाटेकर और अभिनेता मकरंद अनासपुरे द्वारा स्थापित संस्था है, जो विदर्भ और मराठवाड़ा के किसान आत्महत्या पीड़ित परिवारों की सहायता करती है। इसके तहत जल संरक्षण, बिजली और बच्चों की देखभाल जैसे काम किए गए।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नाना पाटेकर के बारे में क्या कहा?
गडकरी ने नाना पाटेकर को अपना 'बहुत करीबी दोस्त' बताया और कहा कि दोनों परिवारों के बीच कई सालों से अच्छे संबंध रहे। उन्होंने नाना की सामाजिक चेतना, किसानों के प्रति संवेदनशीलता और कारगिल युद्ध के दौरान सैनिकों के साथ उपस्थिति का विशेष उल्लेख किया।
नाना पाटेकर ने किसानों के लिए क्या काम किया?
नाना पाटेकर ने नाम फाउंडेशन के ज़रिए किसान आत्महत्या पीड़ित परिवारों की मदद की, उनके बच्चों को सहारा दिया और सूखाग्रस्त इलाकों में जल संरक्षण कार्य किए। 'जलयुक्त शिवार' पहल के तहत उन्होंने किसानों के खेतों तक पानी पहुँचाने में भी योगदान दिया।
नाना पाटेकर के निधन पर महाराष्ट्र के किन नेताओं ने शोक जताया?
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और गिरीश महाजन, भाजपा राज्यसभा सांसद अनिल बोंडे, तथा NCP (SP) विधायक रोहित पवार सहित महाराष्ट्र के कई वरिष्ठ नेताओं ने नाना पाटेकर के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया।
राष्ट्र प्रेस
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