नाना पाटेकर के निधन पर भावुक हुए फारूक अब्दुल्ला, बोले— 'गरीबों के लिए जिए, हमेशा याद रहेंगे'
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने 8 अक्टूबर 2026 को श्रीनगर में मीडिया से बातचीत के दौरान दिग्गज बॉलीवुड अभिनेता नाना पाटेकर के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया और उन्हें अपना करीबी मित्र बताया। फारूक अब्दुल्ला के अनुसार नाना पाटेकर ने अपना पूरा जीवन गरीबों और ज़रूरतमंदों की सेवा में समर्पित किया।
व्यक्तिगत संबंध और साझी यादें
डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने भावुक होते हुए कहा, 'मेरे बहुत अच्छे दोस्त थे। वे एक बहुत नेक आदमी थे। सारी जिंदगी उन्होंने गरीबों की मदद की।' उन्होंने बताया कि नाना पाटेकर का कश्मीर से विशेष लगाव था और वे बार-बार यहाँ आते रहते थे।
फारूक अब्दुल्ला ने एक निजी स्मृति साझा करते हुए बताया, 'वे बार-बार यहाँ आते थे और मैं उनसे मुलाकात करता था। एक शादी समारोह में भी हम लोग एक साथ मिले थे और मैंने उनके साथ डांस भी किया था।' यह विवरण दोनों के बीच औपचारिकता से परे एक वास्तविक मैत्री की झलक देता है।
मानवीय व्यक्तित्व को दी श्रद्धांजलि
डॉ. अब्दुल्ला ने नाना पाटेकर के व्यक्तित्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके भीतर असाधारण संवेदनशीलता थी। उनके शब्दों में, 'उनके अंदर नरमी थी। उन्होंने कभी मजहब नहीं देखा। वे देखते थे कि इंसान का दुख क्या है, उसकी तकलीफ क्या है और उसकी तकलीफ को दूर करने की कोशिश करते थे।'
फारूक अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि उन्हें सुबह ही यह दुखद खबर मिली और वे इस सूचना से स्तब्ध रह गए। उन्होंने संवेदना व्यक्त करते हुए कहा, 'मैं दुआ करता हूँ कि उन्हें स्वर्ग में जगह मिले।'
अभिनय और सामाजिक कार्य की विरासत
डॉ. अब्दुल्ला के अनुसार नाना पाटेकर ने हाल ही में गोवा में अपनी अंतिम फिल्म की शूटिंग पूरी की थी। एक अभिनेता के रूप में उनकी पहचान जितनी पर्दे पर थी, उससे कहीं अधिक समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए भी रही।
फारूक अब्दुल्ला ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा, 'नाना पाटेकर एक जबरदस्त एक्टर थे और उन्हें हमेशा याद रखा जाएगा। गरीबों के लिए किए गए उनके काम और उनकी इंसानियत को लोग लंबे समय तक याद रखेंगे।'
राजनीति से परे रिश्ता
यह ऐसे समय में आया है जब नाना पाटेकर के निधन की खबर से पूरे देश का फिल्म जगत और राजनीतिक वर्ग शोक में है। डॉ. फारूक अब्दुल्ला की प्रतिक्रिया इस बात की गवाह है कि नाना पाटेकर का व्यक्तित्व राजनीतिक और भौगोलिक सीमाओं से परे था — एक कश्मीरी नेता और एक महाराष्ट्रीयन अभिनेता के बीच की यह दोस्ती उनकी सामाजिक विरासत का एक अनूठा पहलू है।