नाना पाटेकर को भावभीनी श्रद्धांजलि: भारती आचरेकर बोलीं — 'दुनिया ने गुस्सैल नाना देखा, मैंने मासूम बच्चा'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री भारती आचरेकर ने दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद एक भावुक श्रद्धांजलि साझा की है, जिसमें उन्होंने अपनी 48 साल पुरानी दोस्ती को याद करते हुए कहा कि नाना के भीतर एक मासूम बच्चा छुपा था, जिसे दुनिया कभी नहीं देख पाई। मुंबई के फिल्म और थिएटर जगत में नाना के निधन से शोक की गहरी लहर है।
48 साल की दोस्ती का बयान
भारती आचरेकर ने अपने इंस्टाग्राम पर लिखा, 'प्रिय नाना, हमारी दोस्ती 48 साल पुरानी थी। आज जब मैं आपके बारे में लिखने बैठी हूँ, तो मेरे पास शब्द नहीं हैं। आपको बहुत कुछ बताना है, आपसे बहुत सारी बातें करनी हैं, लेकिन मेरा दिल यह मानने को तैयार नहीं है कि अब आप मेरी बातें सुनने के लिए यहाँ नहीं हो।'
उन्होंने बताया कि उनकी दोस्ती की शुरुआत पहले उनके पति से हुई थी। 'मैंने नाना के साथ दो नाटकों में काम किया था, लेकिन नाना की दोस्ती पहले मेरे पति से हुई। पता ही नहीं चला कि हम कब इतने गहरे दोस्त बन गए। नाना अक्सर हमारे घर आया करते थे और घंटों बैठकर बातें करते थे।'
इंसानियत की मिसाल थे नाना
भारती आचरेकर ने नाना के व्यक्तित्व का एक अनदेखा पहलू उजागर करते हुए लिखा, 'दुनिया ने गुस्सैल और तेज़ स्वभाव वाले नाना को देखा। मैंने आपके भीतर छिपे एक छोटे बच्चे को देखा। मैंने आपके दिल की पवित्रता और मासूमियत देखी।' उन्होंने कहा कि इतने बड़े कलाकार होने के बावजूद नाना ने कभी अपने रुतबे का दिखावा नहीं किया।
भारती के अनुसार, नाना के लिए सामने खड़ा व्यक्ति सबसे पहले एक इंसान था — उसकी पहचान और हैसियत बाद में आती थी। 'दुनिया कला के लिए आपका सम्मान करती थी, लेकिन मेरे लिए आपकी सबसे बड़ी खूबी आपकी इंसानियत थी। उसके सामने बाकी सब कुछ छोटा लगता था।'
गणेशोत्सव की अंतिम मुलाकात
भारती आचरेकर ने नाना के साथ अपनी आखिरी मुलाकात का ज़िक्र करते हुए बताया कि गणेशोत्सव के दौरान उन्होंने अचानक फोन करके नाना से मिलने का निर्णय लिया। 'आज मुझे इस बात की खुशी है कि मैंने फोन किया और नाना से मिलने गई। उन्होंने मुझे अपने हाथों से खाना परोसा। हमारे बीच इतने सालों से जो प्यार और अपनापन था, वह उस मुलाकात में भी महसूस हुआ।'
उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा, 'काश, मैं थोड़ी देर और रुकी होती। काश, हम कुछ और बातें कर लेते। जाने से पहले काश, मैंने आपको एक बार फिर गले लगा लिया होता।'
मराठी थिएटर से शुरू हुई थी जुगलबंदी
भारती आचरेकर और नाना पाटेकर की दोस्ती की नींव मराठी थिएटर में पड़ी थी। दोनों ने 'हमीदाबाईची कोठी' (1978) और 'महासागर' (1979) जैसे चर्चित नाटकों में एक साथ काम किया था। यह रंगमंच का वह सुनहरा दौर था, जिसने मराठी थिएटर को नई ऊँचाइयाँ दीं।
भारती ने अपने संदेश के अंत में लिखा, 'आप जैसा दोस्त मेरी जिंदगी में होना मेरी खुशकिस्मती थी और आपको अलविदा कहना मेरा दुख है। आपने जिंदगी में बहुत भटकाव और संघर्ष देख लिए। अब आराम करो।' नाना पाटेकर के जाने के बाद भी उनके साथ बिताए पल और उनकी इंसानियत की विरासत लंबे समय तक जीवित रहेगी।