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नाना पाटेकर को भावभीनी श्रद्धांजलि: भारती आचरेकर बोलीं — 'दुनिया ने गुस्सैल नाना देखा, मैंने मासूम बच्चा'

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नाना पाटेकर को भावभीनी श्रद्धांजलि: भारती आचरेकर बोलीं — 'दुनिया ने गुस्सैल नाना देखा, मैंने मासूम बच्चा'

सारांश

नाना पाटेकर के निधन के बाद अभिनेत्री भारती आचरेकर का दर्द शब्दों में छलका — 48 साल की दोस्ती, गणेशोत्सव की आखिरी मुलाकात और वो मासूम चेहरा जो सिर्फ उन्होंने देखा। यह श्रद्धांजलि एक कलाकार की नहीं, एक सच्चे दोस्त की विदाई है।

मुख्य बातें

अभिनेत्री भारती आचरेकर ने नाना पाटेकर को इंस्टाग्राम पर भावुक श्रद्धांजलि दी।
दोनों की दोस्ती 48 साल पुरानी थी, जो मराठी थिएटर के माध्यम से शुरू हुई।
भारती ने 'हमीदाबाईची कोठी' (1978) और 'महासागर' (1979) नाटकों में नाना के साथ काम किया था।
भारती के अनुसार, गणेशोत्सव के दौरान हुई मुलाकात उनकी नाना से अंतिम भेंट रही।
भारती ने कहा कि दुनिया ने नाना का गुस्सा देखा, लेकिन उन्होंने उनके भीतर का मासूम बच्चा और इंसानियत देखी।

अभिनेत्री भारती आचरेकर ने दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद एक भावुक श्रद्धांजलि साझा की है, जिसमें उन्होंने अपनी 48 साल पुरानी दोस्ती को याद करते हुए कहा कि नाना के भीतर एक मासूम बच्चा छुपा था, जिसे दुनिया कभी नहीं देख पाई। मुंबई के फिल्म और थिएटर जगत में नाना के निधन से शोक की गहरी लहर है।

48 साल की दोस्ती का बयान

भारती आचरेकर ने अपने इंस्टाग्राम पर लिखा, 'प्रिय नाना, हमारी दोस्ती 48 साल पुरानी थी। आज जब मैं आपके बारे में लिखने बैठी हूँ, तो मेरे पास शब्द नहीं हैं। आपको बहुत कुछ बताना है, आपसे बहुत सारी बातें करनी हैं, लेकिन मेरा दिल यह मानने को तैयार नहीं है कि अब आप मेरी बातें सुनने के लिए यहाँ नहीं हो।'

उन्होंने बताया कि उनकी दोस्ती की शुरुआत पहले उनके पति से हुई थी। 'मैंने नाना के साथ दो नाटकों में काम किया था, लेकिन नाना की दोस्ती पहले मेरे पति से हुई। पता ही नहीं चला कि हम कब इतने गहरे दोस्त बन गए। नाना अक्सर हमारे घर आया करते थे और घंटों बैठकर बातें करते थे।'

इंसानियत की मिसाल थे नाना

भारती आचरेकर ने नाना के व्यक्तित्व का एक अनदेखा पहलू उजागर करते हुए लिखा, 'दुनिया ने गुस्सैल और तेज़ स्वभाव वाले नाना को देखा। मैंने आपके भीतर छिपे एक छोटे बच्चे को देखा। मैंने आपके दिल की पवित्रता और मासूमियत देखी।' उन्होंने कहा कि इतने बड़े कलाकार होने के बावजूद नाना ने कभी अपने रुतबे का दिखावा नहीं किया।

भारती के अनुसार, नाना के लिए सामने खड़ा व्यक्ति सबसे पहले एक इंसान था — उसकी पहचान और हैसियत बाद में आती थी। 'दुनिया कला के लिए आपका सम्मान करती थी, लेकिन मेरे लिए आपकी सबसे बड़ी खूबी आपकी इंसानियत थी। उसके सामने बाकी सब कुछ छोटा लगता था।'

गणेशोत्सव की अंतिम मुलाकात

भारती आचरेकर ने नाना के साथ अपनी आखिरी मुलाकात का ज़िक्र करते हुए बताया कि गणेशोत्सव के दौरान उन्होंने अचानक फोन करके नाना से मिलने का निर्णय लिया। 'आज मुझे इस बात की खुशी है कि मैंने फोन किया और नाना से मिलने गई। उन्होंने मुझे अपने हाथों से खाना परोसा। हमारे बीच इतने सालों से जो प्यार और अपनापन था, वह उस मुलाकात में भी महसूस हुआ।'

उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा, 'काश, मैं थोड़ी देर और रुकी होती। काश, हम कुछ और बातें कर लेते। जाने से पहले काश, मैंने आपको एक बार फिर गले लगा लिया होता।'

मराठी थिएटर से शुरू हुई थी जुगलबंदी

भारती आचरेकर और नाना पाटेकर की दोस्ती की नींव मराठी थिएटर में पड़ी थी। दोनों ने 'हमीदाबाईची कोठी' (1978) और 'महासागर' (1979) जैसे चर्चित नाटकों में एक साथ काम किया था। यह रंगमंच का वह सुनहरा दौर था, जिसने मराठी थिएटर को नई ऊँचाइयाँ दीं।

भारती ने अपने संदेश के अंत में लिखा, 'आप जैसा दोस्त मेरी जिंदगी में होना मेरी खुशकिस्मती थी और आपको अलविदा कहना मेरा दुख है। आपने जिंदगी में बहुत भटकाव और संघर्ष देख लिए। अब आराम करो।' नाना पाटेकर के जाने के बाद भी उनके साथ बिताए पल और उनकी इंसानियत की विरासत लंबे समय तक जीवित रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

उनमें नाना का स्थान अद्वितीय रहा — और उनकी विरासत को समझने के लिए उनके रंगमंचीय दौर को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारती आचरेकर और नाना पाटेकर की दोस्ती कितने साल पुरानी थी?
भारती आचरेकर और नाना पाटेकर की दोस्ती 48 साल पुरानी थी। यह जुड़ाव मराठी थिएटर के ज़रिए हुआ और नाना पहले भारती के पति के मित्र बने, फिर दोनों परिवारों की गहरी दोस्ती हो गई।
भारती आचरेकर और नाना पाटेकर ने साथ में कौन-से नाटकों में काम किया?
दोनों ने मराठी थिएटर में 'हमीदाबाईची कोठी' (1978) और 'महासागर' (1979) नाटकों में एक साथ काम किया था। ये नाटक अपने समय के चर्चित मंचन माने जाते हैं।
भारती आचरेकर की नाना पाटेकर से अंतिम मुलाकात कब हुई?
भारती आचरेकर के अनुसार, गणेशोत्सव के दौरान उन्होंने अचानक नाना को फोन किया और मिलने गईं। इस मुलाकात में नाना ने उन्हें अपने हाथों से खाना परोसा — यह उनकी अंतिम भेंट रही।
भारती आचरेकर ने नाना पाटेकर के बारे में क्या खास बात कही?
भारती ने कहा कि दुनिया ने नाना के गुस्सैल और तेज़ स्वभाव को देखा, लेकिन उन्होंने उनके भीतर एक मासूम बच्चे को देखा। उनके अनुसार, नाना की सबसे बड़ी खूबी उनकी इंसानियत थी, न कि उनकी कला।
नाना पाटेकर के निधन से फिल्म जगत पर क्या असर पड़ा?
नाना पाटेकर के निधन से मुंबई के फिल्म और थिएटर जगत में शोक की गहरी लहर है। भारती आचरेकर जैसे करीबी सहयोगियों ने सार्वजनिक रूप से अपना दुख व्यक्त किया है और उनकी इंसानियत व कला को याद किया है।
राष्ट्र प्रेस
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