नाना पाटेकर के पड़ोसियों ने साझा कीं भावुक यादें — गणपति उत्सव, क्रिकेट और 40 साल का साथ
सारांश
मुख्य बातें
दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के 75 वर्ष की आयु में निधन की खबर ने मुंबई के उनके आवासीय इलाके में गहरा शोक भर दिया है। 8 अक्टूबर 2026 को यह दुखद समाचार सामने आने के बाद से पूरे महाराष्ट्र और हिंदी फिल्म उद्योग में शोक की लहर है। उनके पड़ोसियों ने उनसे जुड़ी वे यादें साझा कीं जो पर्दे के बाहर के नाना पाटेकर की एक अलग ही तस्वीर पेश करती हैं।
क्रिकेट, गरबा और बच्चों के बीच एक 'नाना भाई'
पड़ोसी राजेंद्र ने बताया, 'बहुत समय से हम लोग उनको जानते हैं। पहले यहां कोई कार्यक्रम होता था या गरबा होता था तो वो भी शामिल होते थे। छोटे-छोटे बच्चों के साथ उन्होंने यहां क्रिकेट भी खेला है।' राजेंद्र के अनुसार, नाना पाटेकर की सबसे अधिक पहचान इलाके में एक सहज और मिलनसार इंसान के रूप में थी — न कि किसी बड़े सितारे के रूप में।
गणपति उत्सव में खुलता था घर का द्वार
राजेंद्र ने यह भी बताया कि उनका आना-जाना सबसे अधिक गणपति उत्सव के दौरान होता था। 'उनके घर में गणपति आता था, फंक्शन होता था, उस समय हम लोग जाते थे। पूरे एरिया के लोग वहां दर्शन करने के लिए जाते थे।' उन्होंने श्रीमुक्त सदन का ज़िक्र करते हुए बताया कि दो बिल्डिंगों के बीच नाना पाटेकर का आना-जाना अक्सर रहता था।
40 साल की पड़ोसन की भावुक विदाई
एक अन्य पड़ोसी — जो करीब 40 वर्षों से उसी इलाके में रह रही हैं — ने कहा कि वे नाना पाटेकर के परिवार को उनके शुरुआती दिनों से जानती हैं। उनके अनुसार, 'नाना पाटेकर बहुत अच्छे पड़ोसी थे और उनका लोगों से रिश्ता परिवार जैसा था।' उन्होंने स्वीकार किया कि कभी-कभी 'नाना भाई को गुस्सा आ जाता था, लेकिन बाद में वे उससे कहीं ज्यादा प्यार भी दिखाते थे।'
दानी स्वभाव और अनुशासन का संगम
पड़ोसियों के शब्दों में नाना पाटेकर एक दानी स्वभाव के व्यक्ति थे, जो अनुशासन को बहुत महत्व देते थे और गलत बात बर्दाश्त नहीं करते थे। वे अक्सर पड़ोसियों से हालचाल पूछते थे और गणपति उत्सव के दौरान घर पर खाने का न्योता भी देते थे। पड़ोसी ने बताया कि जब उनका बेटा छोटा था, तो वह भी उनके घर आकर खेलता था — यह रिश्ता महज पड़ोस का नहीं, परिवार जैसा था।
महाराष्ट्र और फिल्म इंडस्ट्री में शोक
नाना पाटेकर के निधन से महाराष्ट्र और पूरी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है। उनके पड़ोसियों की ये यादें यह रेखांकित करती हैं कि वे स्क्रीन पर जितने दमदार थे, उससे कहीं अधिक असल जीवन में एक गर्मजोश इंसान थे। उनकी विरासत केवल उनकी फिल्मों में नहीं, बल्कि उन गलियों में भी जीवित रहेगी जहाँ उन्होंने बच्चों के साथ क्रिकेट खेला।