नाना पाटेकर का निधन: KBC में बताई थी मुंबई छोड़ गांव लौटने की वजह — 'मैं गांव का हूं, वहीं रहता हूं'
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को निधन हो गया। वे सादगी, बेबाकी और ज़मीन से जुड़े स्वभाव के लिए जाने जाते थे। उनके जीवन का एक कम चर्चित पहलू यह था कि इतने बड़े स्टार होने के बावजूद उनका दिल हमेशा शहर की चमक-दमक से दूर, गांव की माटी में बसता था।
कहाँ-कहाँ थे नाना पाटेकर के ठिकाने
नाना पाटेकर मुख्य रूप से मुंबई के अंधेरी स्थित समर्थ नगर, लोखंडवाला में एक साधारण 1-BHK फ्लैट में रहते थे — न बंगला, न पेंटहाउस। पुणे के निकट खडकवासला में उनका 27 एकड़ में फैला फार्महाउस था, जहाँ वे स्वयं खेती-बाड़ी करते थे।
गोवा के डोना पाउला में भी उनका एक आवास था — और यही वह स्थान है जहाँ कार्डियक अरेस्ट के कारण उनका निधन हुआ। उनका पुश्तैनी गांव महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में है, जो उनकी आत्मा की असली जड़ था।
KBC में अमिताभ बच्चन के सामने खुली गांव की दास्तान
8 जून 2025 को नाना पाटेकर क्विज़-आधारित रियलिटी शो 'कौन बनेगा करोड़पति 17' में बतौर अतिथि शामिल हुए थे। शो के होस्ट अमिताभ बच्चन ने उनसे पूछा, 'आपने जीवन में इतना कुछ हासिल किया, फिर सब कुछ छोड़कर गांव क्यों चले गए?'
इस पर नाना पाटेकर ने सहज भाव से कहा था, 'मैं फिल्म इंडस्ट्री से नहीं हूं। मैं बस यहाँ काम करने आता हूं और फिर वापस चला जाता हूं। मैं कभी किसी पार्टी में नहीं गया, न ही शहर में ज़्यादा रुका। मैं गांव का हूं और वहीं रहना पसंद करता हूं। मुझे वहाँ की ज़िंदगी अच्छी लगती है।' यह उद्गार उनकी सरलता को पूरी तरह परिभाषित करते हैं।
पहाड़ों को बनाया अपना घर, एसी भी नहीं था ज़रूरत
उसी एपिसोड में नाना पाटेकर ने अपनी ज़रूरतों की सादगी का ज़िक्र करते हुए कहा था, 'मुझे अपनी माँ से जितना चाहिए था, उससे कई गुना ज़्यादा मिला है। ज़रूरतें सीमित रखना बहुत आसान है। मेरे पास एसी नहीं है क्योंकि मुझे उसकी ज़रूरत नहीं लगती।'
उन्होंने आगे जोड़ा था, 'जैसे शहर में चारों तरफ दीवारें होती हैं, वैसे ही मेरे घर के चारों ओर पहाड़ हैं। पहाड़ों से घिरा हुआ मेरा घर है और मैं वहीं आराम से रहता हूं।' यह वाक्य उनके जीवन-दर्शन का सार था — प्रकृति की गोद में, शांत, निश्छल।
माधुरी दीक्षित के लिए सम्मान, जावेद अख्तर की कविता की याद
उसी एपिसोड में एक दर्शक ने फिल्म 'वजूद' में माधुरी दीक्षित के साथ काम करने का अनुभव पूछा। नाना पाटेकर ने कहा, 'माधुरी दीक्षित के साथ काम करना एक शानदार अनुभव रहा। वह एक बेहतरीन अभिनेत्री हैं, खूबसूरत हैं, कमाल की डांसर हैं और उनमें वह सब कुछ है जो हर इंसान में होना चाहिए। मैं उन्हें बेहद सम्मान की नज़रों से देखता हूं।'
फिल्म 'वजूद' की कविता 'कैसे बताऊं मैं तुम्हें' — जो जावेद अख्तर ने लिखी थी — के बारे में उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा था, 'यह कविता आज भी मुझे याद है। मैंने यह कविता माधुरी को सुनाई थी, इसलिए यह मेरे लिए भूलना मुश्किल है। आज भी ऐसा लगता है जैसे वह कविता मेरे खून में दौड़ रही हो।' नाना पाटेकर के जाने के बाद यह शब्द और भी गहरे अर्थ रखते हैं।