मुकेश सहनी का 'गोली मार देता' बयान: BJP नेताओं और बिहार मंत्रियों का तीखा पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रमुख मुकेश सहनी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जो विवादित बयान दिया, उसके बाद बिहार की सियासत 24 सितंबर 2026 को पूरी तरह गरमा गई। सहनी ने पत्रकारों से बातचीत में कथित तौर पर कहा कि 'अगर मुझे एक खून माफ होता तो ज्ञानेश कुमार को गोली मार देता' — यह बयान राजनीतिक गलियारों में भूचाल की तरह आया और भारतीय जनता पार्टी (BJP) तथा बिहार सरकार के मंत्रियों ने तत्काल कड़ी प्रतिक्रिया दी।
मुकेश सहनी ने क्या कहा
पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुकेश सहनी ने आरोप लगाया कि 'लोकतंत्र को कुचला जा रहा है' और 'बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के संविधान को कुचला जा रहा है।' उन्होंने कहा कि देश के 140 करोड़ लोगों की आँखों पर पट्टी बांधकर उन्हें धकेला जा रहा है और प्रधानमंत्री इस स्थिति के जिम्मेदार हैं। सहनी ने यह भी कहा कि चुनाव किसी नेता के लिए नहीं, बल्कि देश की जनता के लिए होता है।
BJP नेताओं की कड़ी प्रतिक्रिया
भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने सहनी के बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा, 'हारे हुए लोग ऐसे ही बोलते हैं। ऐसी भाषा लोकतंत्र में कभी भी नहीं चलती है। उन्होंने ऐसी बात कही है कि मैं हैरान हूं। भारत के चुनाव आयोग की इस समय दुनिया में तारीफ हो रही है।' तिवारी ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की जब चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर राष्ट्रीय बहस चल रही है।
बिहार सरकार के मंत्रियों का रुख
बिहार सरकार के मंत्री मिथलेश तिवारी ने इस बयान को लोकतंत्र के लिए अशोभनीय करार दिया। उन्होंने कहा, 'अगर लोकतंत्र की इस धरती पर जन्मा व्यक्ति ऐसी भाषा का इस्तेमाल कर रहा है, तो जनता सब कुछ सुन रही है और सब कुछ देख रही है।' वहीं, मंत्री संतोष सुमन ने कहा कि 'इस तरह का बयान संवैधानिक व्यवस्था में किसी भी व्यक्ति को नहीं देना चाहिए। व्यक्ति को गोली मार देने जैसे बयान उग्रता के परिचायक हैं।'
जमुई घटना पर भी उठे सवाल
इस सियासी उठापटक के बीच मनोज तिवारी ने जमुई की एक अलग घटना का भी जिक्र किया और कहा कि उसे देखकर 'बहुत वेदना हुई।' उन्होंने बिहार सरकार की कार्रवाई पर सीमित संतोष जताते हुए माँग की कि दोषियों को 'फांसी की सजा' मिलनी चाहिए ताकि समाज में नजीर बने। गौरतलब है कि यह बयान बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चल रही बहस को और तेज करता है।
आगे क्या होगा
सहनी के इस बयान के बाद राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर हलचल तेज हो सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में आगामी चुनावी तैयारियाँ जोरों पर हैं और विपक्षी दल चुनाव आयोग पर सवाल उठाते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान राजनीतिक विमर्श को खतरनाक दिशा में ले जाते हैं और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अनादर को बढ़ावा देते हैं।