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मुकेश सहनी का विवादित बयान: 'एक खून माफ होता तो ज्ञानेश कुमार को गोली मार देते'

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मुकेश सहनी का विवादित बयान: 'एक खून माफ होता तो ज्ञानेश कुमार को गोली मार देते'

सारांश

वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सीधे निशाना बनाते हुए कहा कि एक खून माफ होता तो वे उन्हें गोली मार देते। चुनाव आयोग पर पक्षपात के गंभीर आरोप लगाते हुए सहनी ने 2029 में जेल भेजने की चेतावनी भी दी। बयान उन रिपोर्टों के बीच आया जिनमें दो चुनाव आयुक्तों के 14 बार आपत्ति जताने का उल्लेख है।

मुख्य बातें

वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने 24 सितंबर 2026 को पटना में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को गोली मारने की बात कही।
सहनी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अब BJP का आयोग बन चुका है और लोकतंत्र को कुचला जा रहा है।
सहनी ने दावा किया कि बंगाल में 27 लाख वोट काटकर और बिहार में खातों में ₹10-10 हज़ार डालकर चुनाव प्रभावित किए गए — ये दावे स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हैं।
चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार SIR और मतदाता सूची प्रक्रियाओं पर आपत्ति जताई थी।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि सभी फैसले तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए।
सहनी ने 2029 में राहुल गांधी के नेतृत्व में सरकार बनने पर ज्ञानेश कुमार के जेल जाने की चेतावनी दी।

विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रमुख मुकेश सहनी ने 24 सितंबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अत्यंत विवादित बयान देते हुए कहा कि यदि उन्हें एक खून माफ होता, तो वे सबसे पहले ज्ञानेश कुमार को गोली मार देते। पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिए गए इस बयान ने राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया उत्पन्न कर दी है।

मुकेश सहनी का पूरा बयान

सहनी ने पत्रकारों के समक्ष कहा, 'देश के कर्ताधर्ता प्रधानमंत्री यही करवा रहे हैं। लोकतंत्र को कुचला जा रहा है। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के संविधान को कुचला जा रहा है। देश के 140 करोड़ लोगों की आंख में पट्टी बांधकर धकेला जा रहा है।' उन्होंने आगे कहा कि चुनाव देश की जनता के लिए होता है, किसी नेता विशेष के लिए नहीं, और जनता के पास यह अधिकार है कि वह नेता को कुर्सी से हटा सके।

सहनी ने ज्ञानेश कुमार को सीधे संबोधित करते हुए कहा, 'समय हर दिन एक जैसा नहीं होता। उनको थोड़ी शर्म करनी चाहिए कि देश के संविधान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। अगर हमको एक खून माफ होता तो सबसे पहले ज्ञानेश कुमार को गोली मार देते, लेकिन क्या किया जाए — हम संविधान को मानने वाले लोग हैं।'

चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप

सहनी ने चुनाव आयोग पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का पक्षधर होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बंगाल में सेना तैनात कर और कथित तौर पर 27 लाख वोट काटकर सरकार बनाई गई, जबकि बिहार चुनाव में खातों में 10-10 हज़ार रुपये डालकर जनादेश को प्रभावित किया गया। ये आरोप सहनी के अपने दावे हैं और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हैं।

सहनी ने तीन चुनाव आयुक्तों की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया और कहा कि यदि चुनाव इसी तरह प्रभावित होते रहे तो उन्हें रोक ही देना चाहिए, क्योंकि इससे देश के करोड़ों रुपये बर्बाद हो रहे हैं।

2029 में कार्रवाई की चेतावनी

सहनी ने यह भी कहा कि 2029 के आम चुनाव में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में सरकार बनेगी और उस स्थिति में ज्ञानेश कुमार सहित उन सभी लोगों को जेल जाना होगा जिन्होंने कथित रूप से संविधान से खिलवाड़ किया। यह बयान विपक्षी दलों की ओर से चुनाव आयोग की तटस्थता पर उठाए जाते रहे सवालों की पृष्ठभूमि में आया है।

चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की खबरें

सहनी का यह बयान उन रिपोर्टों के बीच आया है जिनमें कहा गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने की अवधि में कम से कम 14 बार मतदाता सूची और विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर आपत्ति जताई थी। इन आपत्तियों में मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने, बहाल करने, फॉर्म 6 में बदलाव तथा मतदाता सूची के डेटा प्रबंधन से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं।

हालाँकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि SIR सहित सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए और विचार-विमर्श के दौरान व्यक्तिगत राय या टिप्पणियाँ आयोग के अलग फैसले नहीं मानी जाती हैं।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। गौरतलब है कि इस तरह के अतिवादी बयान — विशेष रूप से किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को गोली मारने की बात — कानूनी और नैतिक दोनों दृष्टि से गंभीर हैं। सहनी के बयान पर कानूनी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। आने वाले दिनों में इस विवाद के और गहराने की आशंका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस तरह के अतिवादी शब्दों से असली मुद्दा — चुनाव आयोग की स्वायत्तता और आयुक्तों के बीच कथित मतभेद — हाशिये पर चला जाता है। चुनाव आयुक्तों के 14 बार आपत्ति जताने की खबरें कहीं अधिक गंभीर संस्थागत सवाल उठाती हैं, जिन पर तथ्य-आधारित बहस होनी चाहिए; सहनी के बयान ने उस जरूरी बहस को भटका दिया है।
RashtraPress
8 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुकेश सहनी ने ज्ञानेश कुमार के बारे में क्या कहा?
वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने 24 सितंबर 2026 को पटना में कहा कि यदि उन्हें एक खून माफ होता तो वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सबसे पहले गोली मार देते। सहनी ने खुद इसके तत्काल बाद कहा कि वे संविधान को मानने वाले लोग हैं।
मुकेश सहनी ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए?
सहनी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग BJP का आयोग बन चुका है और बंगाल में 27 लाख वोट काटकर तथा बिहार में खातों में 10-10 हज़ार रुपये डालकर चुनाव प्रभावित किए गए। ये दावे उनके अपने हैं और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हैं।
दो चुनाव आयुक्तों के आपत्ति जताने की खबर क्या है?
रिपोर्टों के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार मतदाता सूची और SIR प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। हालाँकि, चुनाव आयोग का कहना है कि सभी फैसले तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए।
क्या सहनी के इस बयान पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है?
किसी संवैधानिक पदाधिकारी के खिलाफ इस तरह की भाषा कानूनी रूप से संवेदनशील मानी जाती है। हालाँकि सहनी ने तुरंत यह भी कहा कि वे संविधान मानने वाले लोग हैं, फिर भी इस बयान पर कानूनी और राजनीतिक प्रतिक्रिया की संभावना बनी हुई है।
मुकेश सहनी ने 2029 को लेकर क्या कहा?
सहनी ने कहा कि 2029 के आम चुनाव में राहुल गांधी के नेतृत्व में सरकार बनेगी और ज्ञानेश कुमार सहित उन सभी लोगों को जेल जाना होगा जिन्होंने कथित तौर पर संविधान के साथ खिलवाड़ किया। यह बयान उनका व्यक्तिगत राजनीतिक आकलन है।
राष्ट्र प्रेस
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