मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा माँगें प्रियंका गांधी और वेणुगोपाल, कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस महासचिव और वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने 26 सितंबर 2026 को वायनाड में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की माँग की। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को मिली कानूनी सुरक्षा हटाई जानी चाहिए और यदि यह साबित हो कि उन्होंने जानबूझकर चुनाव प्रक्रिया के उल्लंघन की अनुमति दी, तो उनके विरुद्ध आपराधिक मुकदमा चलाया जाए।
मुख्य घटनाक्रम
प्रियंका गांधी ने कहा, 'हमारी तत्काल माँग है कि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें। हम सभी एक साथ हैं — इंडिया गठबंधन एकजुट है। जो कुछ भी हो रहा है, वह संविधान के खिलाफ है।' उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर जो घटनाक्रम सामने आया है, वह संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सीधा हमला है।
इससे पहले प्रियंका गांधी ने मतदाता सूचियों से कथित तौर पर लगभग 13 करोड़ नाम हटाए जाने संबंधी रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि यह कार्रवाई गैरकानूनी सिद्ध होती है तो यह लोकतंत्र और संविधान के विरुद्ध आपराधिक कृत्य होगा।
वेणुगोपाल का हमला और बड़े प्रदर्शन की चेतावनी
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त की कड़ी आलोचना की और बड़े प्रदर्शन की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यह शर्म की बात है कि ज्ञानेश कुमार केरल कैडर के अधिकारी रहे हैं। वेणुगोपाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की केरल में मौजूदगी का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे समय में जब लोकतंत्र को खतरा बताया जा रहा है, उन्हें भी जनता को जवाब देना चाहिए।
वेणुगोपाल ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को देश की जनता के सामने इस मसले पर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।
भाजपा और चुनाव आयोग का रुख
प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) मुख्य चुनाव आयुक्त और अपने नेतृत्व दोनों का बचाव कर रही है। उन्होंने कहा, 'भाजपा नेतृत्व और मुख्य चुनाव आयुक्त का बचाव कर रही है। नेतृत्व ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पूरा समर्थन दिया है।'
वहीं, भारत निर्वाचन आयोग ने आयोग के भीतर किसी भी प्रकार के मतभेद की बात को सिरे से खारिज किया है। आयोग के अनुसार, आंतरिक विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग विचार सामने आना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है और एसआईआर सहित सभी अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद उन रिपोर्टों के बाद गहराया जिनमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रियाओं के कुछ फैसलों पर आपत्ति जताई थी। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब कई राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ जोरों पर हैं, और मतदाता सूचियों की विश्वसनीयता राजनीतिक दलों के लिए बेहद संवेदनशील मुद्दा बन चुकी है।
प्रियंका गांधी ने स्पष्ट किया कि इस मामले को सामान्य प्रशासनिक विवाद नहीं माना जा सकता, क्योंकि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता लोकतंत्र की आधारशिला है।
आगे क्या होगा
विपक्षी इंडिया गठबंधन की एकजुटता के साथ कांग्रेस का यह आक्रामक रुख राजनीतिक तनाव को और बढ़ा सकता है। वेणुगोपाल की बड़े प्रदर्शन की चेतावनी के बाद यह देखना अहम होगा कि विपक्ष किस स्तर का आंदोलन खड़ा करता है और चुनाव आयोग या केंद्र सरकार इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया देती है या नहीं।