27 सितंबर 2026
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा माँगें प्रियंका गांधी और वेणुगोपाल, कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा माँगें प्रियंका गांधी और वेणुगोपाल, कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

सारांश

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल ने वायनाड से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधा हमला बोला — इस्तीफा माँगा, कानूनी सुरक्षा हटाने और मुकदमे की चेतावनी दी। मतदाता सूचियों से 13 करोड़ नाम हटाने के आरोपों के बीच इंडिया गठबंधन एकजुट दिख रहा है।

मुख्य बातें

प्रियंका गांधी वाड्रा ने 26 सितंबर 2026 को वायनाड में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की माँग की।
कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त को मिली कानूनी सुरक्षा हटाने और आपराधिक मुकदमा चलाने की माँग की।
मतदाता सूचियों से कथित तौर पर लगभग 13 करोड़ नाम हटाए जाने को लेकर एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पर विवाद जारी है।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बड़े प्रदर्शन की चेतावनी दी और गृह मंत्री अमित शाह से जवाब माँगा।
भारत निर्वाचन आयोग ने आंतरिक मतभेद की बात खारिज की, कहा — सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।

कांग्रेस महासचिव और वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने 26 सितंबर 2026 को वायनाड में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की माँग की। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को मिली कानूनी सुरक्षा हटाई जानी चाहिए और यदि यह साबित हो कि उन्होंने जानबूझकर चुनाव प्रक्रिया के उल्लंघन की अनुमति दी, तो उनके विरुद्ध आपराधिक मुकदमा चलाया जाए।

मुख्य घटनाक्रम

प्रियंका गांधी ने कहा, 'हमारी तत्काल माँग है कि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें। हम सभी एक साथ हैं — इंडिया गठबंधन एकजुट है। जो कुछ भी हो रहा है, वह संविधान के खिलाफ है।' उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर जो घटनाक्रम सामने आया है, वह संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सीधा हमला है।

इससे पहले प्रियंका गांधी ने मतदाता सूचियों से कथित तौर पर लगभग 13 करोड़ नाम हटाए जाने संबंधी रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि यह कार्रवाई गैरकानूनी सिद्ध होती है तो यह लोकतंत्र और संविधान के विरुद्ध आपराधिक कृत्य होगा।

वेणुगोपाल का हमला और बड़े प्रदर्शन की चेतावनी

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त की कड़ी आलोचना की और बड़े प्रदर्शन की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यह शर्म की बात है कि ज्ञानेश कुमार केरल कैडर के अधिकारी रहे हैं। वेणुगोपाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की केरल में मौजूदगी का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे समय में जब लोकतंत्र को खतरा बताया जा रहा है, उन्हें भी जनता को जवाब देना चाहिए।

वेणुगोपाल ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को देश की जनता के सामने इस मसले पर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।

भाजपा और चुनाव आयोग का रुख

प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) मुख्य चुनाव आयुक्त और अपने नेतृत्व दोनों का बचाव कर रही है। उन्होंने कहा, 'भाजपा नेतृत्व और मुख्य चुनाव आयुक्त का बचाव कर रही है। नेतृत्व ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पूरा समर्थन दिया है।'

वहीं, भारत निर्वाचन आयोग ने आयोग के भीतर किसी भी प्रकार के मतभेद की बात को सिरे से खारिज किया है। आयोग के अनुसार, आंतरिक विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग विचार सामने आना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है और एसआईआर सहित सभी अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह विवाद उन रिपोर्टों के बाद गहराया जिनमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रियाओं के कुछ फैसलों पर आपत्ति जताई थी। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब कई राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ जोरों पर हैं, और मतदाता सूचियों की विश्वसनीयता राजनीतिक दलों के लिए बेहद संवेदनशील मुद्दा बन चुकी है।

प्रियंका गांधी ने स्पष्ट किया कि इस मामले को सामान्य प्रशासनिक विवाद नहीं माना जा सकता, क्योंकि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता लोकतंत्र की आधारशिला है।

आगे क्या होगा

विपक्षी इंडिया गठबंधन की एकजुटता के साथ कांग्रेस का यह आक्रामक रुख राजनीतिक तनाव को और बढ़ा सकता है। वेणुगोपाल की बड़े प्रदर्शन की चेतावनी के बाद यह देखना अहम होगा कि विपक्ष किस स्तर का आंदोलन खड़ा करता है और चुनाव आयोग या केंद्र सरकार इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया देती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

अगर तथ्यात्मक रूप से सिद्ध होता है, तो यह भारतीय लोकतांत्रिक ढाँचे के लिए गंभीर संकट बन सकता है। परंतु विडंबना यह है कि चुनाव आयोग पर हमले और मुकदमे की माँग उस संस्था की निष्पक्षता की धारणा को भी नुकसान पहुँचाती है, जिस पर सभी दलों का भरोसा लोकतंत्र के लिए जरूरी है। असली जवाबदेही तभी संभव है जब इन आरोपों की स्वतंत्र न्यायिक जाँच हो — राजनीतिक मंच पर नहीं।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रियंका गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग क्यों की?
प्रियंका गांधी ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को आधार बनाकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग की। उनका आरोप है कि यह घटनाक्रम संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर हमला है।
एसआईआर (SIR) विवाद क्या है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण वह प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूचियों की समीक्षा की जाती है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इस प्रक्रिया में कथित तौर पर लगभग 13 करोड़ नाम सूचियों से हटाए गए और आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसलों पर आपत्ति जताई थी। चुनाव आयोग ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।
चुनाव आयोग का इस विवाद पर क्या कहना है?
भारत निर्वाचन आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि आंतरिक विचार-विमर्श में अलग-अलग मत सामने आना सामान्य संस्थागत प्रक्रिया है। आयोग के अनुसार एसआईआर सहित सभी अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं और आयोग के भीतर किसी विभाजन की बात सही नहीं है।
केसी वेणुगोपाल ने क्या चेतावनी दी?
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध बड़े प्रदर्शन की चेतावनी दी। उन्होंने केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह से इस मुद्दे पर सार्वजनिक जवाब माँगा।
इस विवाद का लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया पर क्या असर हो सकता है?
मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर बदलाव के आरोप और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल, आगामी चुनावों में मतदाताओं के भरोसे को प्रभावित कर सकते हैं। विपक्ष की इस एकजुट माँग के बाद राजनीतिक तनाव और बढ़ने की संभावना है, और मामले के न्यायिक संज्ञान में आने की भी आशंका जताई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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