प्रियंका गांधी का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला: '13 करोड़ वोटर नाम हटाना देशद्रोह का अपराध'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने 24 सितंबर 2026 को वायनाड, केरल दौरे के दौरान चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर कड़े शब्दों में निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त को मिलने वाला कानूनी संरक्षण अनुचित है, और वोटर लिस्ट से कथित तौर पर 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने की घटना को लोकतंत्र एवं संविधान के विरुद्ध 'आपराधिक कृत्य' करार दिया।
मुख्य बयान: लोकतंत्र से छेड़छाड़ पर सख्त रुख
वायनाड में पत्रकारों से बातचीत में प्रियंका गांधी ने कहा, 'जो कोई भी चुनाव की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ छेड़छाड़ करता है, वह देश के साथ गद्दारी कर रहा है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका रुख बिल्कुल साफ है और मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर बैठे व्यक्ति को इस तरह का विशेष कानूनी संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।
उनका कहना था, 'अगर उन्होंने गैरकानूनी काम किए हैं — जैसे वोटर लिस्ट में छेड़छाड़ करना या 13 करोड़ वोटरों के नाम हटाना — तो यह लोकतंत्र, संविधान और देश के खिलाफ एक आपराधिक कृत्य है।' उन्होंने माँग की कि ऐसे में चुनाव आयुक्त पर भी किसी अन्य नागरिक की तरह आपराधिक मुकदमा चलाया जाना चाहिए, जिसमें देशद्रोह का आरोप भी शामिल हो।
वोटर लिस्ट विवाद: आरोप और संदर्भ
प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के अधिकारियों को उनके सहयोगियों ने वोटर लिस्ट में अनियमितताओं की ओर ध्यान दिलाया था, फिर भी इसे जानबूझकर नजरअंदाज किया गया। उन्होंने कहा, 'उन्होंने जानबूझकर एक अनुचित चुनाव होने दिया।'
गौरतलब है कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने का मुद्दा विपक्षी दलों के लिए पिछले कुछ समय से एक संवेदनशील विषय बना हुआ है। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने अलग-अलग राज्यों में मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ी को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं।
इको-सेंसिटिव जोन: स्थानीय आजीविका की चिंता
वायनाड दौरे का एक अन्य प्रमुख एजेंडा इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन भी रहा। केंद्र सरकार ने पश्चिमी घाट के कई क्षेत्रों, जिनमें वायनाड भी शामिल है, को ESZ में शामिल करने के लिए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है।
प्रियंका ने कहा, 'इको-सेंसिटिव जोन का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन चिंता का विषय है। कुछ गाँव हैं जिन्हें जाहिर तौर पर इसमें शामिल किया जा रहा है। मुख्यमंत्री को इसकी जानकारी है और उन्होंने कहा है कि वह इस मामले को देखेंगे।' उन्होंने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस स्थानीय लोगों की खेती और रोजगार की रक्षा के लिए उनके साथ खड़ी रहेगी।
स्थानीय निवासियों को आशंका है कि ESZ अधिसूचना लागू होने पर उनकी खेती, पशुपालन और रोज़मर्रा के कामकाज पर गंभीर प्रतिबंध लग सकते हैं। यह क्षेत्र पहले से ही 2018 और 2019 की भीषण बाढ़ तथा 2024 के भूस्खलन की त्रासदी से उबरने की कोशिश में है।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
यह बयान ऐसे समय में आया है जब वायनाड लोकसभा उपचुनाव में 2024 में जीत के बाद प्रियंका गांधी सांसद के रूप में अपनी सक्रियता बढ़ा रही हैं। विपक्ष लगातार चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता पर सवाल उठाता रहा है — प्रियंका का यह बयान उसी सिलसिले की एक तीखी कड़ी है।
आलोचकों का कहना है कि चुनाव आयुक्त पर देशद्रोह के मुकदमे की माँग संवैधानिक संस्थाओं पर राजनीतिक दबाव का उदाहरण हो सकती है। दूसरी ओर, कांग्रेस का तर्क है कि चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए। आने वाले दिनों में यह विवाद संसद और राजनीतिक मंचों पर और तेज़ होने की संभावना है।