24 सितंबर 2026
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सीईसी ज्ञानेश कुमार दें इस्तीफा, आपराधिक कार्रवाई का सामना करें: प्रियंका गांधी वाड्रा

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सीईसी ज्ञानेश कुमार दें इस्तीफा, आपराधिक कार्रवाई का सामना करें: प्रियंका गांधी वाड्रा

सारांश

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने वायनाड में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधा हमला बोलते हुए इस्तीफे और आपराधिक कार्रवाई की माँग की। 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने के आरोप के साथ उन्होंने कहा — संस्थागत धांधली 'देशद्रोह से कम नहीं।'

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने 24 सितंबर 2026 को वायनाड में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और आपराधिक कार्रवाई की माँग की।
उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जो लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है।
प्रियंका गांधी ने कहा कि यदि धांधली किसी राजनीतिक दल के उद्देश्य से संस्थागत स्तर पर की गई, तो यह 'देशद्रोह से कम नहीं' है।
NCP (शरदचंद्र पवार) के प्रवक्ता जितेंद्र आव्हाड ने ठाणे में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति व्यवस्था और सीईसी पर एकतरफा रवैये का आरोप लगाया।
आव्हाड ने कहा कि केंद्र सरकार ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले नियुक्ति संबंधी कानून में बदलाव किया, जो सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के विपरीत था।
चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने 24 सितंबर 2026 को वायनाड में पत्रकारों से बातचीत के दौरान भारतीय चुनाव आयोग (ECI) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि चुनावों में धांधली और मतदाता सूची से 13 करोड़ नाम हटाए जाने के आरोप सच साबित होते हैं, तो सीईसी को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए और आपराधिक कार्रवाई का सामना करना चाहिए। यह बयान ईसीआई-एसआईआर विवाद के बीच आया है, जिसने विपक्षी दलों और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करने वाले नागरिक समूहों को एकजुट कर दिया है।

प्रियंका गांधी के मुख्य आरोप

प्रियंका गांधी ने कहा कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनावों में कथित धांधली की जानकारी थी और इसके बावजूद उन्होंने इसमें भागीदारी की, तो उन्हें पद से इस्तीफा देना चाहिए। उनके अनुसार, यदि अन्य दो चुनाव आयुक्तों ने भी स्थिति ठीक न होने की बात कही थी और धांधली जारी रही, तो मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है।

उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाया जाना लोकतंत्र और देश के लिए गंभीर खतरा है। उनके शब्दों में, 'चुनाव में धोखाधड़ी से बड़ा देश और संविधान पर कोई हमला नहीं हो सकता।'

देशद्रोह तक पहुँचा आरोप

प्रियंका गांधी ने अपने बयान को और तीखा करते हुए कहा कि यदि यह कार्रवाई संस्थागत स्तर पर की जा रही है और इसके पीछे किसी राजनीतिक दल का उद्देश्य है, तो यह 'देशद्रोह से कम नहीं' है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में जिम्मेदार लोगों को किसी प्रकार की कानूनी सुरक्षा नहीं मिलनी चाहिए। गौरतलब है कि यह इस विवाद में अब तक की सबसे कड़ी राजनीतिक भाषा है।

NCP (SP) का समर्थन, नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल

महाराष्ट्र के ठाणे में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के राष्ट्रीय प्रवक्ता जितेंद्र आव्हाड ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसके सदस्यों के बीच कथित मतभेदों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुद्दा केवल मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त तक सीमित नहीं है।

आव्हाड ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के एक पूर्व फैसले में मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता वाली समिति की बात कही गई थी। उनके अनुसार, केंद्र सरकार ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले इस कानून में बदलाव किया। आव्हाड ने सीईसी ज्ञानेश कुमार पर एक राजनीतिक दल के पक्ष में खड़े होने का आरोप लगाया और इसे संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों और संविधान का अपमान बताया।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह आरोप ऐसे समय में सामने आए हैं जब ईसीआई-एसआईआर विवाद को लेकर विपक्ष पहले से ही आक्रामक रुख अपनाए हुए है। आलोचकों का कहना है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर संशोधन और नाम हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही। चुनाव आयोग की ओर से अभी तक इन विशिष्ट आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आगे की स्थिति

प्रियंका गांधी के इस बयान के बाद विपक्षी दलों में इस मुद्दे पर संसदीय एवं कानूनी मोर्चे पर दबाव बनाने की माँग तेज होने की संभावना है। यह विवाद आने वाले दिनों में चुनावी सुधार और संस्थागत जवाबदेही की बहस को और धार दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और बिना इस आधार के यह दावा कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर कमज़ोर पड़ सकता है। असली सवाल यह है कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में विपक्ष को बाहर करने वाले 2024 के कानूनी बदलाव पर न्यायपालिका क्या रुख लेती है — क्योंकि वही संस्थागत जवाबदेही की असली धुरी है। मुख्यधारा की कवरेज राजनीतिक बयानबाजी पर अटकी है, जबकि चुनावी रोल रिवीजन की प्रक्रियागत पारदर्शिता का सवाल अनुत्तरित बना हुआ है।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रियंका गांधी ने सीईसी ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की माँग क्यों की?
प्रियंका गांधी ने कहा कि यदि चुनावों में कथित धांधली और मतदाता सूची से 13 करोड़ नाम हटाए जाने के आरोप सच साबित होते हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त को इसकी जानकारी थी, तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए और आपराधिक कार्रवाई का सामना करना चाहिए। उन्होंने यह बयान 24 सितंबर 2026 को वायनाड में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया।
ईसीआई-एसआईआर विवाद क्या है?
ईसीआई-एसआईआर विवाद भारतीय चुनाव आयोग की विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसमें विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ छेड़छाड़ बताया है।
जितेंद्र आव्हाड ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर क्या कहा?
NCP (शरदचंद्र पवार) के प्रवक्ता जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के एक पूर्व फैसले में मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता वाली तीन सदस्यीय समिति से नियुक्ति की व्यवस्था थी, लेकिन केंद्र सरकार ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले कानून बदल दिया। उन्होंने इसे संविधान का अपमान बताया।
क्या चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
खबर लिखे जाने तक चुनाव आयोग की ओर से प्रियंका गांधी और जितेंद्र आव्हाड के विशिष्ट आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इस विवाद का आगे क्या असर हो सकता है?
विपक्षी दलों द्वारा संसदीय और कानूनी मोर्चे पर दबाव बढ़ाने की संभावना है। यह विवाद चुनावी सुधार, आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया और मतदाता सूची की पारदर्शिता पर व्यापक बहस को और तेज कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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