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प्रियंका गांधी का बड़ा आरोप: चुनाव आयुक्त जानते थे तो यह लोकतंत्र पर गंभीर हमला

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प्रियंका गांधी का बड़ा आरोप: चुनाव आयुक्त जानते थे तो यह लोकतंत्र पर गंभीर हमला

सारांश

वोटर लिस्ट के SIR विवाद पर प्रियंका गांधी का तीखा हमला — अगर चुनाव आयुक्त जानते थे और चुप रहे, तो यह लोकतंत्र पर सीधा प्रहार है। 10 महीनों में 14 बार दर्ज आपत्तियों की मीडिया रिपोर्ट के बाद यह विवाद राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गया है।

मुख्य बातें

प्रियंका गांधी वाड्रा ने 23 सितंबर 2026 को नीलांबुर में वोटर लिस्ट SIR विवाद को लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया।
उन्होंने कहा — चुनाव आयुक्तों को जानकारी थी और उन्होंने इजाज़त दी, तो यह देशद्रोह जैसा है।
एक प्रमुख अखबार की रिपोर्ट के अनुसार 10 महीनों में 14 बार दो चुनाव आयुक्तों ने आधिकारिक आपत्ति दर्ज कराई।
महाराष्ट्र और हरियाणा में वोटर लिस्ट हेरफेर का आरोप; राहुल गांधी लंबे समय से यह मुद्दा उठाते रहे हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समक्ष भी आयुक्तों ने मुद्दे उठाए थे; चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया अभी नहीं आई।

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने बुधवार, 23 सितंबर 2026 को नीलांबुर में मीडिया से बात करते हुए वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) विवाद को लोकतंत्र के लिए अत्यंत गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव आयुक्तों को इस मामले की जानकारी थी और उन्होंने इसे जारी रहने दिया, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला है।

प्रियंका गांधी के मुख्य आरोप

प्रियंका गांधी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'अगर चुनाव आयुक्तों को इस बारे में पता था और वे इसे होने दे रहे थे, तो यह लोकतंत्र पर बहुत गंभीर हमला है।' उन्होंने आगे कहा कि यदि चुनावों में किसी भी प्रकार की धांधली होती है और चुनाव आयोग उसमें सहयोग करता है, तो यह 'देशद्रोह का काम' है और जो भी इसके लिए जिम्मेदार हो, उसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।

उन्होंने सवाल उठाया कि अगर चुनाव निष्पक्ष नहीं होते, तो लोकतंत्र का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाता है।

राहुल गांधी की पुरानी चिंताओं का संदर्भ

प्रियंका गांधी ने कहा कि उनके भाई और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी लंबे समय से चुनावी प्रक्रिया में कथित पक्षपात और अन्याय को लेकर आवाज़ उठाते रहे हैं। उन्होंने महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे राज्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि मीडिया में आई खबरें सच हैं और वोटर लिस्ट में हेरफेर वास्तव में हुई है, तो इसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

गौरतलब है कि विपक्ष की ओर से यह पहली बार नहीं है जब मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी का मुद्दा उठाया गया हो। पिछले कई चुनावों के बाद भी इस तरह के आरोप लगते रहे हैं।

विवाद की जड़: मीडिया रिपोर्ट के दावे

यह ताज़ा विवाद एक प्रमुख समाचारपत्र की रिपोर्ट के बाद भड़का, जिसमें दावा किया गया है कि 10 महीनों की अवधि में 14 अलग-अलग अवसरों पर दो चुनाव आयुक्तों ने आयोग के कदमों पर आधिकारिक रूप से आपत्ति दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों में यह आरोप भी शामिल था कि नए मतदाताओं को जोड़ने और मौजूदा नामों को हटाने से संबंधित कुछ प्रक्रियाओं में संबंधित आयुक्तों को अंधेरे में रखा गया।

रिपोर्टों के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समक्ष भी आयुक्तों द्वारा कुछ मुद्दे औपचारिक रूप से उठाए गए थे।

लोकतांत्रिक संस्थाओं पर असर

प्रियंका गांधी ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत इन सवालों को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता। उनके अनुसार, 'वर्षों और दशकों से हमारा लोकतंत्र मजबूत रहा है' और यदि चुनाव आयोग जैसी संस्थाएँ इसे कमज़ोर करने की कोशिश करें, तो यह सम्पूर्ण लोकतांत्रिक ढाँचे के लिए चिंताजनक है।

यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ चल रही हैं और मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को लेकर पहले से ही राजनीतिक माहौल गरम है।

आगे क्या होगा

फिलहाल चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले हफ्तों में और तूल पकड़ सकता है, विशेषकर तब जब विपक्ष इस मुद्दे को संसद और सड़क — दोनों पर उठाने की रणनीति बना रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल संस्थागत है — क्या चुनाव आयोग के भीतर की आंतरिक असहमति अब बाहर आ रही है? यदि मीडिया रिपोर्ट के दावे सही हैं कि 10 महीनों में 14 बार आपत्तियाँ दर्ज हुईं, तो यह केवल विपक्ष का आरोप नहीं, बल्कि आयोग की आंतरिक दरार का संकेत है। महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनाव परिणामों के बाद से विपक्ष यह मुद्दा उठाता रहा है, लेकिन ठोस दस्तावेज़ी साक्ष्य के बिना यह बहस नीतिगत सुधार की बजाय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बनकर रह जाती है। चुनाव आयोग को इस पर पारदर्शी और त्वरित स्पष्टीकरण देना होगा — चुप्पी खुद एक जवाब मानी जाएगी।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रियंका गांधी ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए?
प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि यदि चुनाव आयुक्तों को वोटर लिस्ट SIR विवाद की जानकारी थी और उन्होंने इसे जारी रहने दिया, तो यह लोकतंत्र पर गंभीर हमला है। उन्होंने इसे 'देशद्रोह का काम' बताते हुए दोषियों की जाँच की माँग की।
वोटर लिस्ट SIR विवाद क्या है?
SIR यानी 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' मतदाता सूची को अद्यतन करने की प्रक्रिया है। एक प्रमुख मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 10 महीनों में 14 अवसरों पर दो चुनाव आयुक्तों ने आयोग के फैसलों पर आधिकारिक आपत्ति दर्ज कराई, जिसमें नए मतदाता जोड़ने और नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता न होने का आरोप शामिल है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की इसमें क्या भूमिका बताई जा रही है?
रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्तों ने स्वयं मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समक्ष कई मुद्दे औपचारिक रूप से उठाए थे। चुनाव आयोग ने अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
राहुल गांधी का इस मामले से क्या संबंध है?
प्रियंका गांधी ने बताया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी लंबे समय से चुनावी प्रक्रिया में कथित पक्षपात और वोटर लिस्ट में हेरफेर का मुद्दा उठाते रहे हैं। उन्होंने महाराष्ट्र और हरियाणा के उदाहरण देते हुए कहा कि यदि ये आरोप सच निकलते हैं, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
इस विवाद का लोकतंत्र पर क्या असर पड़ सकता है?
प्रियंका गांधी के अनुसार, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना अनिवार्य है। यदि चुनावी संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं, तो इससे मतदाताओं का भरोसा कमज़ोर हो सकता है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की वैधता प्रभावित हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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