प्रियंका गांधी ने वायनाड में CRPF को सुनाई खरी-खरी, भारी सुरक्षा से जनता को परेशानी का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने 23 सितंबर 2026 को अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड के दौरे के दौरान तैनात केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) की भारी सुरक्षा व्यवस्था पर सीधे नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी तादाद में सुरक्षाकर्मियों की उपस्थिति आम नागरिकों के लिए असुविधा का कारण बन रही है और उनके जनसंपर्क अभियान में बाधा डाल रही है।
सीधे CRPF के सामने उठाई बात
प्रियंका गांधी ने अपनी सुरक्षा में तैनात CRPF जवानों के सामने खुलकर अपनी चिंताएँ रखीं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्हें इतने बड़े सुरक्षा दल की आवश्यकता नहीं है और यह व्यवस्था उन लोगों की परेशानी का सबब बन रही है जिनसे वह मिलने आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि यही हाल बना रहा तो वह भविष्य में अपने संसदीय क्षेत्र दौरों की पूर्व सूचना देना बंद कर देंगी।
वायनाड की भौगोलिक चुनौतियाँ
वायनाड केरल का एक पर्वतीय और दूरदराज़ का ज़िला है, जहाँ संकरी पहाड़ी सड़कों पर आवागमन पहले से ही कठिन है। इस इलाके में भारी सुरक्षा काफिले की आमद से यातायात पर अतिरिक्त पाबंदियाँ लग जाती हैं, जिससे स्थानीय निवासियों के लिए अपने चुने हुए प्रतिनिधि से मिलना और भी मुश्किल हो जाता है। प्रियंका ने जोर देकर कहा कि सुरक्षा प्रतिबंध उनके संसदीय क्षेत्र के कार्यों में बाधा नहीं बनने चाहिए।
सुरक्षा व्यवस्था की पृष्ठभूमि
सरकारी प्रावधान के तहत प्रियंका गांधी वाड्रा की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी CRPF के पास है। यह टुकड़ी उनके सार्वजनिक कार्यक्रमों और संसदीय क्षेत्र दौरों में हमेशा साथ रहती है। गौरतलब है कि उन्होंने सुरक्षा से ऐतराज़ नहीं, बल्कि इसके अत्यधिक विस्तार पर आपत्ति जताई है। वायनाड में उनके दौरे आमतौर पर स्थानीय लोगों, पार्टी कार्यकर्ताओं तथा विकास एवं पुनर्वास से जुड़े मुद्दों की समीक्षा पर केंद्रित होते हैं।
जनसंपर्क पर असर
लोकसभा में वायनाड का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रियंका शुरू से ही अपने मतदाताओं के साथ सीधा और निर्बाध संवाद बनाए रखने को प्राथमिकता देती रही हैं। यह ऐसे समय में अहम है जब वायनाड में भूस्खलन जैसी आपदाओं के बाद पुनर्वास कार्य अभी भी जारी है और स्थानीय जनता को प्रतिनिधि से सीधे संपर्क की ज़रूरत महसूस होती है।
आगे क्या होगा
कथित तौर पर प्रियंका गांधी भविष्य के दौरों में सुरक्षा की तैनाती कम रखना चाहती हैं। यह देखना होगा कि CRPF और संबंधित सुरक्षा एजेंसियाँ उनकी इस माँग पर किस प्रकार प्रतिक्रिया देती हैं, क्योंकि सुरक्षा स्तर का निर्धारण ख़तरे के आकलन पर आधारित होता है और इसे एकतरफा नहीं बदला जा सकता।