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मुकेश सहनी का हमला: यूपी में तानाशाही, बिहार सरकार असली मुद्दों से भटका रही जनता

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मुकेश सहनी का हमला: यूपी में तानाशाही, बिहार सरकार असली मुद्दों से भटका रही जनता

सारांश

वीआईपी संस्थापक मुकेश सहनी ने एक साथ दो मोर्चों पर हमला बोला — यूपी में 'अघोषित आपातकाल' और बिहार में 'ध्यान भटकाने की राजनीति'। BJP विधायक की कम सज़ा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पीड़ित परिवार को सर्वोच्च न्यायालय तक लड़ने की अपील की।

मुख्य बातें

मुकेश सहनी ने 5 जुलाई 2025 को पटना में यूपी BJP सरकार पर 'अघोषित आपातकाल' और तानाशाही का आरोप लगाया।
बिहार NDA सरकार पर आरोप — बेरोज़गारी, गरीबी, किसान समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए बंगला विवाद और सुरक्षा जैसे मुद्दे उछाले जा रहे हैं।
BJP विधायक राजू सिंह को हत्या मामले में मिली 4 साल 2 महीने की सज़ा को सहनी ने अपर्याप्त बताया; 14 वर्ष की सज़ा की माँग की।
सहनी ने सरकार से एक करोड़ रोज़गार , महिलाओं को आर्थिक सहायता और किसानों के चुनावी वादे पूरे करने की माँग की।
फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा को दो दशकों की प्रशासनिक विफलता का प्रमाण बताया।

विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने 5 जुलाई 2025 को पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचलने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने बिहार की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वह बेरोज़गारी, गरीबी और किसानों की समस्याओं जैसे वास्तविक मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने में लगी है।

यूपी में 'अघोषित आपातकाल' का आरोप

सहनी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में विपक्षी नेताओं के कार्यक्रमों को रोकना और उन्हें गिरफ्तार करना इस बात का संकेत है कि सरकार विपक्ष से भयभीत है। उनके अनुसार, प्रदेश में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति बन चुकी है और लोकतंत्र की जगह तानाशाही हावी है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी वीआईपी उत्तर प्रदेश में अपना संगठन मज़बूत कर रही है और जनता आने वाले समय में BJP सरकार को उचित जवाब देगी।

BJP विधायक की सज़ा पर सवाल

BJP विधायक राजू सिंह को हत्या के मामले में चार साल दो महीने की सज़ा और आर्म्स एक्ट के तहत अतिरिक्त दो महीने की सज़ा मिलने पर सहनी ने न्यायिक फ़ैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हत्या सिद्ध होने के बाद इतनी कम सज़ा न्यायसंगत नहीं है। सहनी ने पीड़ित परिवार से अपील की कि वे इस फ़ैसले को उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दें, और कहा कि दोषी को कम से कम 14 वर्ष की सज़ा मिलनी चाहिए।

बिहार सरकार पर 'ध्यान भटकाने की राजनीति' का आरोप

बिहार सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए सहनी ने कहा कि सरकार के पास जनता को दिखाने के लिए कोई ठोस उपलब्धि नहीं है। इसीलिए सुरक्षा वापस लेने और फिर बहाल करने जैसे मुद्दों, बंगला विवाद और अन्य राजनीतिक घटनाक्रमों को उछालकर लोगों का ध्यान असली समस्याओं से हटाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को महिलाओं से किए गए आर्थिक सहायता के वादे, एक करोड़ रोज़गार और किसानों से जुड़े चुनावी वादों को पूरा करने पर ध्यान देना चाहिए।

फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट और नए टैक्स पर आपत्ति

सहनी ने फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की घोषणा को सरकार की 'देर से जागी व्यवस्था' क़रार दिया। उनके अनुसार, यदि इसकी ज़रूरत आज महसूस हो रही है तो यह पिछले दो दशकों की प्रशासनिक विफलता को उजागर करती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार लगातार नए कर लगाकर आम नागरिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही है, जबकि वृद्धा पेंशन जैसी योजनाओं के भुगतान में भी देरी हो रही है।

विकास की असली कसौटी

सहनी ने अंत में कहा कि बिहार के विकास का पैमाना केवल पुल और सड़कें नहीं होना चाहिए, बल्कि रोज़गार, बेहतर आय और लोगों के जीवन स्तर में सुधार को ही असली विकास माना जाना चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ धीरे-धीरे शुरू होने लगी हैं और विपक्षी दल सरकार को घेरने के अवसर तलाश रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी तरफ बिहार सरकार पर लगातार दबाव। लेकिन आलोचकों का कहना है कि वीआईपी खुद बिहार में सीमित जनाधार वाली पार्टी है, और इसके बयान अक्सर चुनावी मौसम में ज़्यादा मुखर हो जाते हैं। BJP विधायक की सज़ा पर सवाल उठाना न्यायसंगत है, लेकिन सहनी ने यह नहीं बताया कि उनकी पार्टी इस मामले में पीड़ित परिवार की कानूनी मदद करेगी या नहीं। बिहार में विकास की परिभाषा को 'पुल-सड़क से रोज़गार' की ओर मोड़ने की उनकी माँग जनता की भावनाओं से मेल खाती है, लेकिन विकल्प के रूप में वीआईपी का एजेंडा अभी भी अस्पष्ट है।
RashtraPress
5 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुकेश सहनी ने यूपी सरकार पर क्या आरोप लगाए?
सहनी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार करना और उनके कार्यक्रम रोकना 'अघोषित आपातकाल' जैसी स्थिति को दर्शाता है। उनके अनुसार, प्रदेश में लोकतंत्र की जगह तानाशाही चल रही है।
BJP विधायक राजू सिंह की सज़ा पर सहनी की क्या राय है?
सहनी ने हत्या सिद्ध होने के बाद मात्र 4 साल 2 महीने की सज़ा को अन्यायपूर्ण बताया। उन्होंने पीड़ित परिवार से उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने की माँग की और कहा कि दोषी को 14 वर्ष की सज़ा मिलनी चाहिए।
सहनी ने बिहार NDA सरकार पर क्या आरोप लगाए?
उन्होंने कहा कि बिहार सरकार के पास जनता को दिखाने के लिए कोई ठोस उपलब्धि नहीं है, इसलिए बंगला विवाद और सुरक्षा बहाली जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है। सरकार पर एक करोड़ रोज़गार और महिलाओं को आर्थिक सहायता के वादे पूरे न करने का भी आरोप लगाया।
फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट पर सहनी का क्या कहना है?
सहनी ने फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा को 'देर से जागी व्यवस्था' बताया। उनके अनुसार, इसकी ज़रूरत आज महसूस होना पिछले दो दशकों की प्रशासनिक विफलता को उजागर करता है।
सहनी के अनुसार बिहार के विकास का असली पैमाना क्या होना चाहिए?
उन्होंने कहा कि बिहार का विकास केवल पुल और सड़कों से नहीं मापा जाना चाहिए, बल्कि रोज़गार, बेहतर आय और जीवन स्तर में सुधार को ही असली विकास का मानदंड माना जाना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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