पप्पू सहनी फेक एनकाउंटर: मुकेश सहनी ने बिहार सरकार को घेरा, एक महीने में न्याय न मिला तो चक्का जाम
सारांश
मुख्य बातें
विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने 25 जून 2026 को मुजफ्फरपुर में एक प्रेस वार्ता के दौरान पप्पू सहनी के कथित फेक एनकाउंटर मामले में बिहार सरकार और पुलिस-प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब चार महीने पहले हुई पप्पू सहनी की मौत को पुलिस ने एनकाउंटर का नाम दे दिया, जबकि यह स्पष्ट रूप से हत्या का मामला है। सहनी ने चेतावनी दी कि यदि एक महीने के भीतर न्याय नहीं मिला तो वीआईपी पार्टी सड़क पर उतरकर चक्का जाम और व्यापक लोकतांत्रिक विरोध करेगी।
मामले की पृष्ठभूमि
मुकेश सहनी के अनुसार, मृतक पप्पू सहनी के खिलाफ पिछले तीन वर्षों में कोई नया आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ था और पुराने मामलों में भी वह जमानत पर थे। ऐसे में पुलिस की कार्रवाई और कथित एनकाउंटर की पूरी कहानी संदेह के घेरे में है। उन्होंने आरोप लगाया कि समय पर इलाज न मिलने के कारण पप्पू सहनी की मौत हुई, लेकिन अब तक किसी दोषी पुलिसकर्मी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन और खोखले आश्वासन
पूर्व मंत्री ने बताया कि 11 मार्च को अमर शहीद जुब्बा सहनी के शहादत दिवस पर वीआईपी नेताओं ने पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की माँग की थी। उस समय दो महीने के भीतर रिपोर्ट देने का आश्वासन दिया गया था। हालाँकि, तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जांच समिति की स्थिति स्पष्ट नहीं की गई और न ही किसी जिम्मेदार पुलिसकर्मी पर कार्रवाई हुई।
भोजपुर मामले से तुलना
मुकेश सहनी ने भोजपुर के भरत तिवारी कथित फेक एनकाउंटर मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ सामाजिक दबाव और व्यापक जनआक्रोश के बाद रिटायर्ड जज से जांच कराई जा रही है और पाँच पुलिसकर्मियों को निलंबित भी किया गया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या बिहार में गोली भी जाति देखकर मारी जाएगी और न्याय भी जाति देखकर मिलेगा — यह टिप्पणी उन्होंने राज्य में कानून-व्यवस्था की कथित असमानता को रेखांकित करते हुए की।
वीआईपी की माँगें
मुकेश सहनी ने सरकार के सामने स्पष्ट माँगें रखीं — पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा, आश्रितों को सरकारी नौकरी और दोषी पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय कर उन्हें कड़ी सजा। उन्होंने कहा कि पुलिस को किसी भी व्यक्ति को सीधे गोली मारने का अधिकार नहीं है — अपराधी को कानून के तहत सजा दिलाई जाए, लेकिन एनकाउंटर के नाम पर हत्या किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं।
आंदोलन की चेतावनी और आगे का रास्ता
वीआईपी प्रमुख ने स्पष्ट किया कि बिहार में उत्तर प्रदेश जैसा मॉडल नहीं चलेगा, बल्कि एक ऐसा बिहार मॉडल चाहिए जहाँ सभी जाति और धर्म के लोग सम्मान के साथ जी सकें। उन्होंने कहा कि यदि पप्पू सहनी हत्याकांड में एक महीने के भीतर न्याय नहीं मिला तो वीआईपी पार्टी सड़क पर उतरेगी और चक्का जाम तथा लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन करेगी। साथ ही उन्होंने सरकार से प्रशासन पर अंकुश लगाने और फेक एनकाउंटर की घटनाओं पर तत्काल सख्त कार्रवाई करने की माँग की। यह मामला बिहार में पुलिस जवाबदेही और न्यायिक पारदर्शिता की व्यापक बहस को एक बार फिर केंद्र में ला खड़ा करता है।