10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पप्पू सहनी फेक एनकाउंटर: मुकेश सहनी ने बिहार सरकार को घेरा, एक महीने में न्याय न मिला तो चक्का जाम

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पप्पू सहनी फेक एनकाउंटर: मुकेश सहनी ने बिहार सरकार को घेरा, एक महीने में न्याय न मिला तो चक्का जाम

सारांश

मुकेश सहनी ने मुजफ्फरपुर में पप्पू सहनी के कथित फेक एनकाउंटर पर बिहार सरकार को सीधी चुनौती दी — तीन महीने बाद भी जांच ठप, कोई कार्रवाई नहीं। एक महीने में न्याय न मिला तो चक्का जाम और व्यापक आंदोलन की चेतावनी।

मुख्य बातें

मुकेश सहनी ने 25 जून 2026 को मुजफ्फरपुर में पप्पू सहनी के कथित फेक एनकाउंटर मामले में बिहार सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
पप्पू सहनी की मौत करीब चार महीने पहले हुई; उनके खिलाफ पिछले तीन वर्षों में कोई नया आपराधिक मामला दर्ज नहीं था।
11 मार्च को पुलिस अधीक्षक से मिलने के बाद दो महीने में रिपोर्ट का आश्वासन मिला था, लेकिन तीन महीने बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सहनी ने पीड़ित परिवार को मुआवजा , आश्रितों को सरकारी नौकरी और दोषी पुलिसकर्मियों को कड़ी सजा देने की माँग की।
भोजपुर के भरत तिवारी मामले में 5 पुलिसकर्मी निलंबित और रिटायर्ड जज से जांच — पप्पू सहनी मामले में कोई कदम नहीं।
वीआईपी ने चेतावनी दी कि एक महीने में न्याय न मिला तो चक्का जाम और व्यापक लोकतांत्रिक विरोध।

विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने 25 जून 2026 को मुजफ्फरपुर में एक प्रेस वार्ता के दौरान पप्पू सहनी के कथित फेक एनकाउंटर मामले में बिहार सरकार और पुलिस-प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब चार महीने पहले हुई पप्पू सहनी की मौत को पुलिस ने एनकाउंटर का नाम दे दिया, जबकि यह स्पष्ट रूप से हत्या का मामला है। सहनी ने चेतावनी दी कि यदि एक महीने के भीतर न्याय नहीं मिला तो वीआईपी पार्टी सड़क पर उतरकर चक्का जाम और व्यापक लोकतांत्रिक विरोध करेगी।

मामले की पृष्ठभूमि

मुकेश सहनी के अनुसार, मृतक पप्पू सहनी के खिलाफ पिछले तीन वर्षों में कोई नया आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ था और पुराने मामलों में भी वह जमानत पर थे। ऐसे में पुलिस की कार्रवाई और कथित एनकाउंटर की पूरी कहानी संदेह के घेरे में है। उन्होंने आरोप लगाया कि समय पर इलाज न मिलने के कारण पप्पू सहनी की मौत हुई, लेकिन अब तक किसी दोषी पुलिसकर्मी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन और खोखले आश्वासन

पूर्व मंत्री ने बताया कि 11 मार्च को अमर शहीद जुब्बा सहनी के शहादत दिवस पर वीआईपी नेताओं ने पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की माँग की थी। उस समय दो महीने के भीतर रिपोर्ट देने का आश्वासन दिया गया था। हालाँकि, तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जांच समिति की स्थिति स्पष्ट नहीं की गई और न ही किसी जिम्मेदार पुलिसकर्मी पर कार्रवाई हुई।

भोजपुर मामले से तुलना

मुकेश सहनी ने भोजपुर के भरत तिवारी कथित फेक एनकाउंटर मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ सामाजिक दबाव और व्यापक जनआक्रोश के बाद रिटायर्ड जज से जांच कराई जा रही है और पाँच पुलिसकर्मियों को निलंबित भी किया गया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या बिहार में गोली भी जाति देखकर मारी जाएगी और न्याय भी जाति देखकर मिलेगा — यह टिप्पणी उन्होंने राज्य में कानून-व्यवस्था की कथित असमानता को रेखांकित करते हुए की।

वीआईपी की माँगें

मुकेश सहनी ने सरकार के सामने स्पष्ट माँगें रखीं — पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा, आश्रितों को सरकारी नौकरी और दोषी पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय कर उन्हें कड़ी सजा। उन्होंने कहा कि पुलिस को किसी भी व्यक्ति को सीधे गोली मारने का अधिकार नहीं है — अपराधी को कानून के तहत सजा दिलाई जाए, लेकिन एनकाउंटर के नाम पर हत्या किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं।

आंदोलन की चेतावनी और आगे का रास्ता

वीआईपी प्रमुख ने स्पष्ट किया कि बिहार में उत्तर प्रदेश जैसा मॉडल नहीं चलेगा, बल्कि एक ऐसा बिहार मॉडल चाहिए जहाँ सभी जाति और धर्म के लोग सम्मान के साथ जी सकें। उन्होंने कहा कि यदि पप्पू सहनी हत्याकांड में एक महीने के भीतर न्याय नहीं मिला तो वीआईपी पार्टी सड़क पर उतरेगी और चक्का जाम तथा लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन करेगी। साथ ही उन्होंने सरकार से प्रशासन पर अंकुश लगाने और फेक एनकाउंटर की घटनाओं पर तत्काल सख्त कार्रवाई करने की माँग की। यह मामला बिहार में पुलिस जवाबदेही और न्यायिक पारदर्शिता की व्यापक बहस को एक बार फिर केंद्र में ला खड़ा करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सड़क का दबाव ही न्याय की गारंटी बन गया है। मुकेश सहनी का जाति-आधारित न्याय का सवाल राजनीतिक भी है, लेकिन इसके पीछे एक वैध संवैधानिक चिंता है — क्या कानून का प्रयोग समान रूप से होता है? बिना स्वतंत्र जांच और सत्यापन-योग्य परिणामों के, यह मामला महज एक और राजनीतिक विरोध बनकर रह जाने का जोखिम उठाता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पप्पू सहनी फेक एनकाउंटर मामला क्या है?
करीब चार महीने पहले बिहार में पप्पू सहनी की मौत हुई, जिसे पुलिस ने एनकाउंटर बताया। मुकेश सहनी और वीआईपी पार्टी का आरोप है कि यह वास्तव में हत्या का मामला है और समय पर इलाज न मिलने के कारण उनकी मृत्यु हुई।
मुकेश सहनी ने बिहार सरकार को क्या चेतावनी दी है?
मुकेश सहनी ने कहा कि यदि एक महीने के भीतर पप्पू सहनी हत्याकांड में न्याय नहीं मिला तो वीआईपी पार्टी सड़क पर उतरकर चक्का जाम और व्यापक लोकतांत्रिक विरोध करेगी। उन्होंने सरकार से दोषी पुलिसकर्मियों पर तत्काल कार्रवाई की माँग की।
वीआईपी पार्टी की इस मामले में क्या माँगें हैं?
वीआईपी पार्टी ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा, आश्रितों को सरकारी नौकरी और दोषी पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय कर उन्हें कड़ी सजा। साथ ही फेक एनकाउंटर की घटनाओं पर तत्काल सख्त कार्रवाई की माँग भी की गई है।
भोजपुर के भरत तिवारी मामले का इससे क्या संबंध है?
मुकेश सहनी ने भोजपुर के भरत तिवारी कथित फेक एनकाउंटर मामले का हवाला देते हुए कहा कि वहाँ जनदबाव के बाद रिटायर्ड जज से जांच और पाँच पुलिसकर्मियों का निलंबन हुआ, जबकि पप्पू सहनी मामले में तीन महीने बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
पुलिस अधीक्षक से मुलाकात के बाद क्या हुआ?
11 मार्च को वीआईपी नेताओं ने पुलिस अधीक्षक से मिलकर निष्पक्ष जांच की माँग की थी और दो महीने में रिपोर्ट देने का आश्वासन मिला था। लेकिन तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी न जांच समिति की स्थिति स्पष्ट हुई और न किसी पुलिसकर्मी पर कार्रवाई हुई।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले