भरत तिवारी एनकाउंटर: पप्पू यादव का बिहार सरकार पर हमला, CBI जांच की मांग
सारांश
मुख्य बातें
पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने 26 जून 2026 को भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार जातीय उन्माद भड़काने का काम कर रही है और मांग की कि बिहार में हुए सभी एनकाउंटर की जांच वर्तमान न्यायाधीश के नेतृत्व में सीबीआई द्वारा होनी चाहिए।
एनकाउंटर में पुलिस मुख्यालय की भूमिका पर सवाल
पप्पू यादव ने कहा, 'सरकार और मुख्यमंत्री को पता है कि एनकाउंटर में आरा के एसपी, डीएसपी और थानेदार शामिल नहीं हैं, बल्कि पुलिस मुख्यालय शामिल है। पुलिस मुख्यालय के आदेश पर भरत तिवारी का एनकाउंटर हुआ।' उन्होंने यह भी कहा कि यह जांच का विषय है कि एसपी को किस-किसका फोन गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बिहार सरकार संविधान और कानून से ऊपर है।
जातीय उन्माद का आरोप
सांसद ने दावा किया कि इस एनकाउंटर के विरोध में पूरा बिहार खड़ा है। उन्होंने कहा, 'नेता, ब्राह्मण समाज और अन्य गरीब लोग कहने लगे हैं कि वे पुलिस से घृणा करेंगे। एक तरफ ऊंची जात को गाली देना और दूसरी तरफ ओबीसी और दलित को गाली देना — वर्तमान सरकार बिहार में जातीय उन्माद करा रही है।' आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान राज्य में सामाजिक तनाव को और गहरा कर सकते हैं।
राहुल गांधी की बिहार यात्रा और बेरोज़गारी का मुद्दा
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आगामी बिहार यात्रा और छात्र सम्मेलन पर पप्पू यादव ने कहा कि करोड़ों छात्रों के भविष्य का मुद्दा सर्वोपरि है। उनके अनुसार, '8 करोड़ बच्चे हर साल नौकरी के लिए आवेदन करते हैं, लेकिन नौकरियाँ महज हजार या सौ लोगों को मिलती हैं।' उन्होंने नीट परीक्षा स्थगित होने का उल्लेख करते हुए कहा कि राहुल गांधी देश के बेरोज़गार युवाओं की आवाज़ हैं और इसीलिए उनका कार्यक्रम तय है।
राम मंदिर दान प्रकरण पर प्रतिक्रिया
पप्पू यादव ने राम मंदिर दान प्रकरण पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, 'जो राम को लाए हैं, वही राम को खा रहे हैं। इतने दिनों से चढ़ावे का गबन हो रहा था — यह संगठित अपराध है।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मामले में एफआईआर काफी देरी से दर्ज की गई और बड़े लोगों को बचाने की कोशिश की गई। गौरतलब है कि इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और ये आरोप कथित तौर पर लगाए गए हैं।
आगे क्या
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सीबीआई जांच की मांग अब विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से भी उठने लगी है। बिहार सरकार की प्रतिक्रिया और न्यायिक प्रक्रिया पर सबकी निगाहें टिकी हैं।