10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भरत तिवारी एनकाउंटर: 'हत्या हुई है', कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने पटना हाई कोर्ट के सीटिंग जज से जांच की मांग की

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भरत तिवारी एनकाउंटर: 'हत्या हुई है', कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने पटना हाई कोर्ट के सीटिंग जज से जांच की मांग की

सारांश

बिहार में भरत तिवारी एनकाउंटर महज पुलिस कार्रवाई का मामला नहीं रहा — कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने इसे सुनियोजित हत्या बताते हुए पटना हाई कोर्ट के सीटिंग जज से जाँच और पीड़ित परिवार को ₹1 करोड़ मुआवजे की माँग की है।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने 23 जून को पटना में भरत तिवारी की मौत को एनकाउंटर नहीं, बल्कि हत्या बताया।
उन्होंने स्थानीय डीएसपी पर साजिश रचने का आरोप लगाया और पुलिस की भूमिका की जाँच की माँग की।
जाँच पटना हाई कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश से कराने की माँग — सेवानिवृत्त जज से नहीं।
पीड़ित परिवार को ₹1 करोड़ की तत्काल आर्थिक सहायता देने की माँग।
कांग्रेस सांसद ने अजमल कसाब का उदाहरण देते हुए कहा कि हर आरोपी को कानूनी प्रक्रिया का अधिकार है।
बिहार में विपक्ष लगातार स्वतंत्र जाँच की माँग कर रहा है; पुलिस अपनी कार्रवाई को वैध बता रही है।

बिहार में भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने मंगलवार, 23 जून को पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान आरोप लगाया कि यह कोई मुठभेड़ नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या है। उन्होंने माँग की कि इस मामले की जाँच पटना हाई कोर्ट के किसी मौजूदा न्यायाधीश से कराई जाए।

मुख्य आरोप और बयान

अखिलेश प्रसाद सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "पहले मैं इस बात को खारिज करता हूँ कि भरत तिवारी का एनकाउंटर हुआ, बल्कि उसकी हत्या की गई है। वहाँ के डीएसपी ने पूरी साजिश रची और उस लड़के की हत्या की।" उनके अनुसार, पुलिस अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है और इसकी स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए।

कांग्रेस सांसद ने बताया कि वे स्वयं भरत तिवारी के गाँव गए और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उनका कहना है कि परिवार न्याय के लिए संघर्ष कर रहा है और सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

जाँच की माँग — सेवानिवृत्त नहीं, सीटिंग जज

अखिलेश प्रसाद सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि मामले की जाँच किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश से नहीं, बल्कि पटना हाई कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश से कराई जानी चाहिए। उनका तर्क है कि निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने के लिए ऐसी व्यवस्था अनिवार्य है जिसमें किसी भी प्रकार के राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव की गुंजाइश न रहे। यह माँग इस लिहाज से महत्वपूर्ण है क्योंकि सेवानिवृत्त जजों की नियुक्ति सरकार के विवेकाधिकार में होती है, जबकि सीटिंग जज न्यायपालिका की स्वायत्तता के अधीन कार्य करते हैं।

पीड़ित परिवार के लिए आर्थिक सहायता की माँग

कांग्रेस सांसद ने बिहार सरकार से माँग की कि वह तत्काल पीड़ित परिवार को ₹1 करोड़ की आर्थिक सहायता प्रदान करे। उन्होंने कहा कि यह राशि परिवार को तत्काल राहत देने के लिए जरूरी है, क्योंकि परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य अब नहीं रहा।

कानून के शासन पर जोर

अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता — चाहे वह बड़ा अधिकारी हो या राजनीतिक व्यक्ति। उन्होंने 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के दोषी अजमल कसाब का उदाहरण देते हुए कहा कि उसे भी न्यायिक प्रक्रिया के तहत सजा दी गई थी। उनके अनुसार, किसी भी आरोपी के विरुद्ध कार्रवाई कानून के दायरे में होनी चाहिए, न कि मनमाने ढंग से।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और आगे की स्थिति

गौरतलब है कि भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर बिहार में विपक्ष लगातार मुखर हो रहा है। कांग्रेस के अलावा अन्य विपक्षी दलों ने भी स्वतंत्र जाँच की माँग उठाई है, जबकि पुलिस अपनी कार्रवाई को वैध बता रही है और जाँच प्रक्रिया जारी है। यह मामला ऐसे समय में उभरा है जब बिहार में 2025 के विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में राजनीतिक सरगर्मी पहले से तेज है। आने वाले दिनों में न्यायिक जाँच की माँग पर सरकार का रुख स्पष्ट होना बाकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह सरकार के लिए जाँच को नियंत्रित करना कठिन बना देती है। बिहार में एनकाउंटर की राजनीति नई नहीं है, लेकिन जब विपक्ष परिवार से सीधे मिलकर मुआवजे की माँग उठाता है, तो यह जमीनी दबाव बनाने की कोशिश है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार न्यायिक जाँच का रास्ता खोलेगी या मामले को प्रशासनिक जाँच तक सीमित रखेगी — और वह फैसला ही बताएगा कि जवाबदेही की इच्छाशक्ति कितनी है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भरत तिवारी एनकाउंटर मामला क्या है?
भरत तिवारी की बिहार पुलिस के साथ मुठभेड़ में मौत हो गई थी। विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस, इसे फर्जी एनकाउंटर बता रहा है और स्वतंत्र जाँच की माँग कर रहा है। पुलिस अपनी कार्रवाई को वैध बताती है और जाँच प्रक्रिया जारी है।
अखिलेश प्रसाद सिंह ने क्या माँग की है?
कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने माँग की है कि इस मामले की जाँच पटना हाई कोर्ट के किसी मौजूदा (सीटिंग) न्यायाधीश से कराई जाए, न कि किसी सेवानिवृत्त जज से। इसके अलावा उन्होंने पीड़ित परिवार को ₹1 करोड़ की तत्काल आर्थिक सहायता देने की भी माँग की है।
सेवानिवृत्त जज की जगह सीटिंग जज से जाँच की माँग क्यों की जा रही है?
अखिलेश प्रसाद सिंह का तर्क है कि सेवानिवृत्त जजों की नियुक्ति सरकार के विवेकाधिकार में होती है, जिससे जाँच पर दबाव की आशंका रहती है। सीटिंग जज न्यायपालिका की स्वायत्तता के अंतर्गत काम करते हैं, इसलिए उनकी जाँच अधिक निष्पक्ष होगी।
कांग्रेस ने डीएसपी पर क्या आरोप लगाए हैं?
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया है कि स्थानीय डीएसपी ने पूरी साजिश रची और भरत तिवारी की हत्या की। उन्होंने इसे एनकाउंटर मानने से इनकार किया और कहा कि पुलिस अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए।
इस मामले में कानून के शासन पर क्या बात कही गई?
अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में किसी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता। उन्होंने 2008 के मुंबई हमलों के दोषी अजमल कसाब का उदाहरण देते हुए कहा कि उसे भी न्यायिक प्रक्रिया के तहत सजा दी गई थी — इसलिए हर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई कानून के दायरे में होनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले