भरत तिवारी एनकाउंटर: अश्विनी कुमार चौबे ने मांगी उच्चस्तरीय जांच, पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए 22 जून को इस घटना की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने तिवारी को एक निर्दोष समाजसेवी बताया, जिन्होंने अपना जीवन गरीबों, अति पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों, भू-विस्थापितों और बाढ़ पीड़ितों के हक की लड़ाई में लगा दिया था।
मुख्य आरोप और मांगें
चौबे ने दावा किया कि भरत भूषण तिवारी पर कभी कोई गंभीर आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ था। उनके अनुसार, तिवारी समाज के कमजोर तबकों की आवाज बनते थे और इसी सामाजिक संघर्ष के दौरान उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी। चौबे ने कहा, 'भरत तिवारी गरीबों के हक की लड़ाई लड़ रहे थे। बाढ़ पीड़ितों, भूमिहीनों और वंचित वर्गों के लिए संघर्ष करते-करते उन्होंने अपनी जान दे दी।'
उन्होंने आरोप लगाया कि घटना वाले दिन तिवारी एक गरीब बस्ती में चापाकल लगवाने गए थे। चौबे के अनुसार, तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था, फिर भी उनकी हत्या की गई। उन्होंने मांग की कि गोली चलाने वाले पुलिसकर्मी के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया जाए और उसके हथियार जब्त किए जाएं।
पुलिस व्यवहार पर सवाल
चौबे ने बताया कि उन्होंने इस मामले में संबंधित पुलिस अधीक्षक (एसपी) से भी बात की थी। एसपी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि तिवारी मानसिक रूप से विक्षिप्त नहीं थे, बल्कि लगातार तनाव में थे क्योंकि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा था। चौबे ने आरोप लगाया कि पुलिस का व्यवहार ऐसा था, मानो तिवारी कोई बड़े अपराधी, नक्सली, उग्रवादी या डकैत हों।
गौरतलब है कि तिवारी के पिता पुलिस विभाग में हवलदार रहे थे और सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बावजूद पुलिस का काफिला बार-बार उनके घर पहुंचता था, जिससे पूरा परिवार मानसिक दबाव में था।
न्याय की उम्मीद
चौबे ने कहा कि जांच समिति सभी तथ्यों को सामने लाएगी और दोषियों को सजा मिलेगी। उन्होंने कहा, 'दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए। भरत तिवारी का खून व्यर्थ नहीं जाएगा।' उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने हमेशा भ्रष्टाचार, अपराध और गरीबों पर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई है और बिहार-झारखंड के संयुक्त राज्य काल से लेकर अब तक हर वर्ग के अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहे हैं।
लालू प्रसाद यादव पर टिप्पणी
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव को लेकर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए चौबे ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री ने ऐसा कहा है तो उसके पीछे राजनीतिक संदर्भ होगा। उन्होंने कहा कि लालू यादव बीमार हैं और उन्हें अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए। चौबे ने यह भी माना कि लालू यादव का राजनीतिक प्रभाव आज भी पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह विवाद बिहार की राजनीति में एनकाउंटर की जवाबदेही को लेकर एक बड़ी बहस की शुरुआत कर सकता है।