8 अगस्त 2026
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भरत तिवारी एनकाउंटर: अश्विनी कुमार चौबे ने मांगी उच्चस्तरीय जांच, पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

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भरत तिवारी एनकाउंटर: अश्विनी कुमार चौबे ने मांगी उच्चस्तरीय जांच, पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

सारांश

पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर को 'हृदय विदारक' बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की। उनका आरोप है कि तिवारी ने आत्मसमर्पण किया था, फिर भी उन्हें मार दिया गया — यह बिहार में पुलिस जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

मुख्य बातें

पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने 22 जून को भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की।
चौबे का आरोप — तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था, फिर भी उनकी हत्या की गई; गोली चलाने वाले पुलिसकर्मी पर तत्काल एफआईआर हो।
संबंधित एसपी ने कथित तौर पर माना कि तिवारी मानसिक रूप से विक्षिप्त नहीं थे, बल्कि मांगें अनसुनी होने से तनाव में थे।
तिवारी के पिता पुलिस हवलदार रहे थे; परिवार पर बार-बार पुलिस काफिला भेजे जाने से मानसिक दबाव था।
चौबे ने RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव के संदर्भ में कहा कि राजनीति अपनी जगह है, 'राजधर्म का पालन होना चाहिए।'

पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए 22 जून को इस घटना की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने तिवारी को एक निर्दोष समाजसेवी बताया, जिन्होंने अपना जीवन गरीबों, अति पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों, भू-विस्थापितों और बाढ़ पीड़ितों के हक की लड़ाई में लगा दिया था।

मुख्य आरोप और मांगें

चौबे ने दावा किया कि भरत भूषण तिवारी पर कभी कोई गंभीर आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ था। उनके अनुसार, तिवारी समाज के कमजोर तबकों की आवाज बनते थे और इसी सामाजिक संघर्ष के दौरान उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी। चौबे ने कहा, 'भरत तिवारी गरीबों के हक की लड़ाई लड़ रहे थे। बाढ़ पीड़ितों, भूमिहीनों और वंचित वर्गों के लिए संघर्ष करते-करते उन्होंने अपनी जान दे दी।'

उन्होंने आरोप लगाया कि घटना वाले दिन तिवारी एक गरीब बस्ती में चापाकल लगवाने गए थे। चौबे के अनुसार, तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था, फिर भी उनकी हत्या की गई। उन्होंने मांग की कि गोली चलाने वाले पुलिसकर्मी के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया जाए और उसके हथियार जब्त किए जाएं।

पुलिस व्यवहार पर सवाल

चौबे ने बताया कि उन्होंने इस मामले में संबंधित पुलिस अधीक्षक (एसपी) से भी बात की थी। एसपी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि तिवारी मानसिक रूप से विक्षिप्त नहीं थे, बल्कि लगातार तनाव में थे क्योंकि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा था। चौबे ने आरोप लगाया कि पुलिस का व्यवहार ऐसा था, मानो तिवारी कोई बड़े अपराधी, नक्सली, उग्रवादी या डकैत हों।

गौरतलब है कि तिवारी के पिता पुलिस विभाग में हवलदार रहे थे और सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बावजूद पुलिस का काफिला बार-बार उनके घर पहुंचता था, जिससे पूरा परिवार मानसिक दबाव में था।

न्याय की उम्मीद

चौबे ने कहा कि जांच समिति सभी तथ्यों को सामने लाएगी और दोषियों को सजा मिलेगी। उन्होंने कहा, 'दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए। भरत तिवारी का खून व्यर्थ नहीं जाएगा।' उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने हमेशा भ्रष्टाचार, अपराध और गरीबों पर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई है और बिहार-झारखंड के संयुक्त राज्य काल से लेकर अब तक हर वर्ग के अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहे हैं।

लालू प्रसाद यादव पर टिप्पणी

बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव को लेकर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए चौबे ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री ने ऐसा कहा है तो उसके पीछे राजनीतिक संदर्भ होगा। उन्होंने कहा कि लालू यादव बीमार हैं और उन्हें अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए। चौबे ने यह भी माना कि लालू यादव का राजनीतिक प्रभाव आज भी पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह विवाद बिहार की राजनीति में एनकाउंटर की जवाबदेही को लेकर एक बड़ी बहस की शुरुआत कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ सामाजिक कार्यकर्ताओं और हाशिए पर खड़े वर्गों के प्रतिनिधियों को अक्सर 'खतरे' के रूप में चिह्नित किया जाता है। अश्विनी कुमार चौबे का यह बयान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि वे सत्तारूढ़ गठबंधन के करीबी माने जाते हैं — यानी यह आलोचना विपक्ष से नहीं, बल्कि भीतर से आ रही है। असली सवाल यह है कि क्या जांच समिति स्वतंत्र होगी या महज एक औपचारिकता — बिहार में पिछले ऐसे मामलों में जवाबदेही का रिकॉर्ड बहुत उत्साहजनक नहीं रहा है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर विवाद क्या है?
भरत भूषण तिवारी एक सामाजिक कार्यकर्ता थे, जिनकी कथित तौर पर पुलिस एनकाउंटर में मौत हो गई। पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे सहित कई लोगों ने आरोप लगाया है कि तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था, फिर भी उन्हें गोली मार दी गई।
अश्विनी कुमार चौबे ने क्या मांग की है?
चौबे ने घटना की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने यह भी मांग की कि गोली चलाने वाले पुलिसकर्मी के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया जाए और उसके हथियार जब्त किए जाएं।
भरत तिवारी कौन थे और उनका काम क्या था?
भरत भूषण तिवारी एक सामाजिक कार्यकर्ता थे जो गरीबों, अति पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों, भू-विस्थापितों और बाढ़ पीड़ितों के अधिकारों के लिए काम करते थे। चौबे के अनुसार, उन पर कभी कोई गंभीर आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ था।
पुलिस पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
चौबे ने आरोप लगाया कि पुलिस बार-बार तिवारी के घर काफिला भेजती थी, जिससे परिवार पर मानसिक दबाव था। उनका यह भी आरोप है कि पुलिस का व्यवहार ऐसा था मानो तिवारी कोई बड़े अपराधी या नक्सली हों, जबकि वे एक सामाजिक कार्यकर्ता थे।
इस मामले में आगे क्या होने की उम्मीद है?
चौबे ने कहा है कि जांच समिति सभी तथ्यों को सामने लाएगी और दोषियों को सजा मिलेगी। हालाँकि, अभी तक किसी आधिकारिक जांच समिति के गठन की पुष्टि नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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