भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर: NHRC से स्वत: संज्ञान की अपील, बिहार पुलिस पर न्यायेतर हत्या का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
सुप्रीम कोर्ट के वकील निशांत वर्मा ने 23 जून 2025 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में शिकायत दर्ज कर बिहार के भोजपुर जिले में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में स्वत: संज्ञान लेने की अपील की है। शिकायत में आयोग से बिहार सरकार, राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) और भोजपुर के पुलिस अधीक्षक से रिपोर्ट तलब करने का आग्रह किया गया है।
घटनाक्रम: 17 जून को क्या हुआ
शिकायत पत्र के अनुसार, 17 जून 2025 की सुबह बिहार पुलिस ने भोजपुर जिले (आरा कमिश्नरेट) में 28 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी के घर को घेर लिया। कथित तौर पर जब तिवारी घर से बाहर निकलकर पुलिस से बातचीत करने लगे और आश्वासन मिलने पर उन्होंने अपनी पिस्तौल फेंक दी, तब भी पुलिस ने उनके पैरों में 3-4 गोलियाँ मारीं और एक गोली पेट में दागी। बेहतर उपचार के लिए पटना ले जाते समय रास्ते में उनकी मृत्यु हो गई।
गौरतलब है कि एनकाउंटर से एक दिन पहले, 16 जून को, भरत भूषण तिवारी फेसबुक लाइव पर आए थे — जो इस मामले को और अधिक संवेदनशील बनाता है।
कौन थे भरत भूषण तिवारी
ग्रामीणों और स्थानीय लोगों के अनुसार, भरत भूषण तिवारी सोशल मीडिया और प्रशासनिक संवाद के ज़रिए जन-समस्याएँ उठाने वाले एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता थे। वे गरीब परिवारों, बाढ़ पीड़ितों और विस्थापित समुदायों की आवाज़ बुलंद करते थे। शिकायत पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मृतक का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था और उन्हें हिरासत में लेकर कानूनी प्रक्रिया के तहत पेश किया जा सकता था।
कानूनी आधार और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस
वकील निशांत वर्मा ने अपनी शिकायत में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय 'पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज बनाम महाराष्ट्र राज्य (2014) 10 एसीसी 635' का हवाला दिया, जिसमें पुलिस एनकाउंटर की जाँच के लिए विस्तृत दिशानिर्देश निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले में 'विशाल तिवारी बनाम भारत संघ' नाम से सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें न्यायाधीश ने वकील को रजिस्ट्रार के समक्ष उल्लेख करने को कहा था, परंतु यह मामला अभी तक सूचीबद्ध नहीं हुआ है।
शिकायत में मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 17 का उल्लेख किया गया है, जो NHRC को उन मामलों में समानांतर स्वत: संज्ञान लेने का अधिकार देती है जहाँ सरकारी तंत्र मनमाने ढंग से किसी व्यक्ति के मौलिक मानवाधिकारों का उल्लंघन करता है।
NHRC से की गई माँगें
शिकायत पत्र में माँग की गई है कि NHRC धारा 17 के तहत स्वत: संज्ञान लेते हुए बिहार पुलिस महानिदेशक, एडीजी, आरा डिवीजन और जिला भोजपुर के पुलिस अधीक्षक से इस कथित न्यायेतर हत्या पर विस्तृत रिपोर्ट तलब करे।
आगे क्या होगा
यह मामला अब दो समानांतर कानूनी मंचों पर विचाराधीन है — सुप्रीम कोर्ट में लंबित PIL और NHRC में दायर शिकायत। आलोचकों का कहना है कि यदि NHRC स्वत: संज्ञान लेता है, तो बिहार पुलिस को एनकाउंटर की परिस्थितियों का ब्यौरा देना होगा और यह मामला राज्य में पुलिस जवाबदेही की बहस को नई धार दे सकता है।