भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर: सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की, पटना हाईकोर्ट से राहत माँगने का निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 15 जुलाई 2025 को बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गाँव निवासी भरत भूषण तिवारी की कथित एनकाउंटर में हुई मौत से जुड़ी याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वे पहले पटना उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाएँ और वहाँ से राहत न मिलने पर ही उच्चतर न्यायालय का रुख करें।
याचिका में क्या माँगा गया था
यह याचिका प्रिया मिश्रा की ओर से अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा ने दाखिल की थी। इसमें तीन प्रमुख माँगें रखी गई थीं — पहली, सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति की निगरानी में स्वतंत्र जाँच; दूसरी, एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करना; और तीसरी, मौके पर मौजूद अधिकारियों पर कार्रवाई। न्यायालय ने इन माँगों पर विचार करने से पहले उच्च न्यायालय स्तर पर सुनवाई को अनिवार्य ठहराया।
पहले भी ठुकराई जा चुकी है याचिका
यह पहला अवसर नहीं है जब सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में हस्तक्षेप से मना किया हो। इससे पूर्व अधिवक्ता विशाल तिवारी ने एक अलग याचिका दायर कर एनकाउंटर को कथित तौर पर फर्जी बताते हुए सीबीआई जाँच की माँग की थी। उस याचिका पर भी शीर्ष अदालत ने सुनवाई से इनकार करते हुए पटना हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया था। इसके अतिरिक्त, न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष जब इस मामले का उल्लेख किया गया था, तब भी तत्काल सुनवाई से इनकार कर याचिकाकर्ता को रजिस्ट्री से सूचीबद्ध कराने को कहा गया था।
मामले की पृष्ठभूमि
भरत भूषण तिवारी की मौत 17 जून को भोजपुर में एनकाउंटर के दौरान हुई थी। याचिका में दर्ज तर्कों के अनुसार, एनकाउंटर में होने वाली मौतें गैर-न्यायिक हत्याओं के समतुल्य हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून के शासन के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करती हैं। याचिका में यह भी रेखांकित किया गया कि ऐसे मामलों में पुलिस का तर्क प्रायः एक जैसा होता है — कि मारे गए व्यक्ति ने भागने की कोशिश में हथियार छीनने और गोली चलाने का प्रयास किया, जिसके जवाब में पुलिस ने कार्रवाई की।
सरकार और पुलिस का पक्ष
अभी तक बिहार पुलिस या राज्य सरकार की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में इस याचिका के संदर्भ में कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामला अब पटना उच्च न्यायालय के समक्ष जाने की स्थिति में है, जहाँ सुनवाई के बाद ही आगे की कानूनी दिशा तय होगी।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद याचिकाकर्ताओं को पटना उच्च न्यायालय में अपनी अर्जी दाखिल करनी होगी। यदि हाईकोर्ट से संतोषजनक राहत नहीं मिली, तभी शीर्ष अदालत में पुनः दस्तक देने का रास्ता खुलेगा। इस बीच, मानवाधिकार संगठन एनकाउंटर की स्वतंत्र जाँच की माँग पर अपना दबाव बनाए हुए हैं।