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भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर: सुप्रीम कोर्ट में PIL, CBI जांच और रिटायर्ड जज की समिति की मांग

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भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर: सुप्रीम कोर्ट में PIL, CBI जांच और रिटायर्ड जज की समिति की मांग

सारांश

बिहार के भोजपुर में भरत भूषण तिवारी की कथित फर्जी एनकाउंटर में मौत अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गई है। वकील विशाल तिवारी की PIL में CBI जाँच, FIR और रिटायर्ड जज की अगुवाई में स्वतंत्र समिति की माँग — और BJP विधान पार्षद पवन सिंह भी निष्पक्ष जाँच की माँग में शामिल।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय में अधिवक्ता विशाल तिवारी ने 21 जून को भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में जनहित याचिका दाखिल की।
याचिका में CBI जाँच , एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों के विरुद्ध FIR और सेवानिवृत्त सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठन की माँग।
याचिकाकर्ता का आरोप — भरत भूषण तिवारी की मौत 'फर्जी एनकाउंटर' है और यह हत्या का मामला है।
BJP विधान पार्षद एवं अभिनेता पवन सिंह ने संवेदना व्यक्त कर पारदर्शी जाँच की माँग की।
मृतक ग्राम बेलौटी, भोजपुर के निवासी थे और कथित तौर पर वंचित वर्गों के लिए सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता थे।

बिहार के भोजपुर में हुआ भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला अब सर्वोच्च न्यायालय की दहलीज तक पहुँच गया है। सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता विशाल तिवारी ने 21 जून को एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर इस कथित 'फर्जी एनकाउंटर' की केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) से जाँच कराने की माँग की है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि यह मामला हत्या का है और निष्पक्ष जाँच के बिना न्याय संभव नहीं।

याचिका में क्या माँगें हैं

दाखिल जनहित याचिका में तीन प्रमुख माँगें रखी गई हैं। पहली — एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों के विरुद्ध प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए। दूसरी — पूरे मामले की जाँच CBI को सौंपी जाए। तीसरी — कानून के शासन की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित की जाए।

भरत भूषण तिवारी कौन थे

ग्राम बेलौटी, भोजपुर निवासी भरत भूषण तिवारी को उनके परिचित एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में याद करते हैं। कथित तौर पर वे गरीब, वंचित, दलित और बाढ़ पीड़ित परिवारों के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाते थे। कोरोना महामारी और बाढ़ जैसी आपदाओं में भी उन्होंने समाज सेवा की। उनके समर्थकों के अनुसार, वे चाहते थे कि जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी जनता की समस्याओं का समाधान करें।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधान पार्षद एवं भोजपुरी सिनेमा के जाने-माने अभिनेता पवन सिंह ने इस घटना पर संवेदना व्यक्त की और निष्पक्ष जाँच की माँग की। उन्होंने रविवार को सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि यदि विभिन्न माध्यमों से प्रसारित जानकारी एवं वीडियो में दिखाई गई परिस्थितियाँ सत्य हैं, तो पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं न्यायसंगत जाँच अनिवार्य है ताकि सत्य जनता के सामने आ सके। उन्होंने कहा, भरत समाज के लिए संघर्ष करने वाले एक जागरूक एवं संवेदनशील व्यक्ति थे।

मामले का व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में पुलिस एनकाउंटरों की न्यायिक जवाबदेही को लेकर सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय पहले भी 'पीयूसीएल बनाम महाराष्ट्र राज्य' जैसे मामलों में एनकाउंटर मौतों की जाँच के लिए दिशानिर्देश जारी कर चुका है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इन्हीं दिशानिर्देशों का पालन इस मामले में भी होना चाहिए।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल इस जनहित याचिका की सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है। न्यायालय की प्रतिक्रिया और बिहार सरकार का रुख इस मामले की दिशा तय करेगा। यदि सर्वोच्च न्यायालय CBI जाँच का आदेश देता है, तो यह राज्य पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक महत्त्वपूर्ण न्यायिक टिप्पणी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

नियम नहीं। BJP विधान पार्षद का निष्पक्ष जाँच की माँग करना राजनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि यह सत्तारूढ़ दल के भीतर से ही पुलिस कार्यवाही पर सवाल उठाता है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या न्यायालय इस याचिका को सुनवाई योग्य मानता है — और यदि हाँ, तो बिहार पुलिस की जवाबदेही का सवाल केंद्र में आ जाएगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला क्या है?
बिहार के भोजपुर जिले में भरत भूषण तिवारी की पुलिस एनकाउंटर में मौत हुई, जिसे याचिकाकर्ता कथित 'फर्जी एनकाउंटर' बता रहे हैं। मृतक ग्राम बेलौटी के निवासी थे और वंचित वर्गों के लिए सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता बताए जाते हैं।
सुप्रीम कोर्ट में किसने और क्यों याचिका दाखिल की?
सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता विशाल तिवारी ने 21 जून को जनहित याचिका दाखिल की। उनका तर्क है कि यह हत्या का मामला है और राज्य पुलिस द्वारा निष्पक्ष जाँच संभव नहीं, इसलिए CBI जाँच आवश्यक है।
याचिका में क्या-क्या माँगें की गई हैं?
याचिका में तीन प्रमुख माँगें हैं — एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों के विरुद्ध FIR दर्ज करना, CBI से जाँच कराना और सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करना।
पवन सिंह का इस मामले से क्या संबंध है?
BJP विधान पार्षद एवं भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह ने रविवार को सोशल मीडिया के माध्यम से भरत भूषण तिवारी के प्रति संवेदना व्यक्त की और पारदर्शी जाँच की माँग की। उन्होंने कहा कि यदि प्रसारित वीडियो और जानकारी सही है, तो निष्पक्ष जाँच अनिवार्य है।
इस मामले में आगे क्या होने की संभावना है?
सर्वोच्च न्यायालय को अभी इस जनहित याचिका पर सुनवाई की तारीख तय करनी है। न्यायालय यदि याचिका स्वीकार करता है, तो बिहार सरकार और पुलिस को अपना पक्ष रखना होगा। CBI जाँच का आदेश मिलने पर यह मामला राज्य पुलिस की जवाबदेही पर बड़ा न्यायिक हस्तक्षेप बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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