भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर: सुप्रीम कोर्ट में PIL, CBI जांच और रिटायर्ड जज की समिति की मांग
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के भोजपुर में हुआ भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला अब सर्वोच्च न्यायालय की दहलीज तक पहुँच गया है। सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता विशाल तिवारी ने 21 जून को एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर इस कथित 'फर्जी एनकाउंटर' की केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) से जाँच कराने की माँग की है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि यह मामला हत्या का है और निष्पक्ष जाँच के बिना न्याय संभव नहीं।
याचिका में क्या माँगें हैं
दाखिल जनहित याचिका में तीन प्रमुख माँगें रखी गई हैं। पहली — एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों के विरुद्ध प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए। दूसरी — पूरे मामले की जाँच CBI को सौंपी जाए। तीसरी — कानून के शासन की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित की जाए।
भरत भूषण तिवारी कौन थे
ग्राम बेलौटी, भोजपुर निवासी भरत भूषण तिवारी को उनके परिचित एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में याद करते हैं। कथित तौर पर वे गरीब, वंचित, दलित और बाढ़ पीड़ित परिवारों के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाते थे। कोरोना महामारी और बाढ़ जैसी आपदाओं में भी उन्होंने समाज सेवा की। उनके समर्थकों के अनुसार, वे चाहते थे कि जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी जनता की समस्याओं का समाधान करें।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधान पार्षद एवं भोजपुरी सिनेमा के जाने-माने अभिनेता पवन सिंह ने इस घटना पर संवेदना व्यक्त की और निष्पक्ष जाँच की माँग की। उन्होंने रविवार को सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि यदि विभिन्न माध्यमों से प्रसारित जानकारी एवं वीडियो में दिखाई गई परिस्थितियाँ सत्य हैं, तो पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं न्यायसंगत जाँच अनिवार्य है ताकि सत्य जनता के सामने आ सके। उन्होंने कहा, भरत समाज के लिए संघर्ष करने वाले एक जागरूक एवं संवेदनशील व्यक्ति थे।
मामले का व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में पुलिस एनकाउंटरों की न्यायिक जवाबदेही को लेकर सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय पहले भी 'पीयूसीएल बनाम महाराष्ट्र राज्य' जैसे मामलों में एनकाउंटर मौतों की जाँच के लिए दिशानिर्देश जारी कर चुका है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इन्हीं दिशानिर्देशों का पालन इस मामले में भी होना चाहिए।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल इस जनहित याचिका की सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है। न्यायालय की प्रतिक्रिया और बिहार सरकार का रुख इस मामले की दिशा तय करेगा। यदि सर्वोच्च न्यायालय CBI जाँच का आदेश देता है, तो यह राज्य पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक महत्त्वपूर्ण न्यायिक टिप्पणी होगी।