भरत तिवारी एनकाउंटर: सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच याचिका खारिज की, पटना हाईकोर्ट जाने का निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
उच्चतम न्यायालय ने 15 जुलाई 2026 को बिहार के भोजपुर जिले में भरत भूषण तिवारी के कथित एनकाउंटर की CBI जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता को पटना उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने का निर्देश दिया, जिसके बाद याचिकाकर्ता के अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा ने कहा कि वे अब अपनी कानूनी लड़ाई पटना हाईकोर्ट में जारी रखेंगे।
मामले की पृष्ठभूमि
अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा ने बताया कि उन्होंने सर्वप्रथम सुप्रीम कोर्ट से इस मामले का स्वतः संज्ञान लेने का अनुरोध किया था। इसके बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के कार्यालय से उन्हें रिट याचिका दाखिल करने का निर्देश प्राप्त हुआ। उसी निर्देश के अनुरूप याचिका दायर की गई, परंतु सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार करते हुए मामले को उच्च न्यायालय स्तर पर निपटाने की सलाह दी।
याचिका में पाँच प्रमुख मांगें
मिश्रा के अनुसार, याचिका में पाँच मुख्य मांगें रखी गई थीं। इनमें सबसे अहम यह थी कि पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में गठित समिति द्वारा कराई जाए। उनका तर्क है कि राज्य स्तर पर निष्पक्ष जांच की संभावना सीमित दिखती है। भरत भूषण तिवारी के परिजन लगातार उनसे संपर्क में हैं और न्याय की माँग कर रहे हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
अधिवक्ता मिश्रा ने आरोप लगाया कि किसी भी पुलिस एनकाउंटर की कार्रवाई उच्च अधिकारियों की जानकारी और अनुमति के बिना संभव नहीं होती, इसलिए संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में कई FIR दर्ज हैं और बड़ी संख्या में लोगों के विरुद्ध कार्रवाई हो रही है, जिससे प्रभावित पक्षों की आवाज़ उठाने वाले लोग कम होते जा रहे हैं।
बिहार में एनकाउंटर का व्यापक संदर्भ
मिश्रा ने बताया कि पिछले लगभग 70 दिनों में बिहार में कई बड़े एनकाउंटर हुए हैं, जिनकी सूची वे अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना चाहते थे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि कानून किसी भी एजेंसी को फर्जी एनकाउंटर की अनुमति नहीं देता और ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच अनिवार्य है। उनके अनुसार, यदि किसी कार्रवाई को फर्जी माना जाए, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध हत्या सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
आगे की कानूनी राह
अधिवक्ता मिश्रा ने कहा कि वे शीघ्र ही मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर पूरे घटनाक्रम से अवगत कराएंगे और पटना उच्च न्यायालय के निर्देशों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई करेंगे। यह मामला बिहार में कथित फर्जी एनकाउंटर की न्यायिक जवाबदेही के व्यापक सवाल को केंद्र में ला रहा है।