भरत भूषण तिवारी मुठभेड़: पटना हाई कोर्ट में PIL दायर, स्वतंत्र जांच और परिवार की सुरक्षा की मांग
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के भोजपुर जिले में हुई कथित पुलिस मुठभेड़ में भरत भूषण तिवारी की मौत का मामला अब न्यायालय तक पहुँच गया है। 22 जून 2026 को पटना हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर इस मुठभेड़ की स्वतंत्र जांच, दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवार को सुरक्षा देने की माँग की गई है। यह याचिका ऐसे समय में आई है जब बिहार के कई जिलों में इस घटना के विरोध में प्रदर्शन जारी हैं।
याचिका में क्या माँगा गया है
वकील मुकेश कुमार ने यह जनहित याचिका दायर की है, जिसमें मुठभेड़ की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराने, जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने और पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान करने की माँग की गई है। याचिकाकर्ता ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मीनाक्षी मदन राय की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया है।
याचिका में यह भी उठाया गया है कि बिहार सरकार ने न्यायिक जांच की घोषणा तो कर दी है — जो एक सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जज द्वारा किए जाने की उम्मीद है — लेकिन इससे संबंधित औपचारिक अधिसूचना अभी तक जारी नहीं हुई है।
मुठभेड़ को लेकर परस्पर विरोधी दावे
भोजपुर पुलिस के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान भरत भूषण तिवारी ने पुलिस टीम पर 10 से 12 गोलियाँ चलाईं, जिसके बाद अधिकारियों ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की। इस गोलीबारी में वह घायल हो गए और उन्हें पहले आरा सदर अस्पताल और फिर पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) रेफर किया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
दूसरी ओर, भरत भूषण तिवारी के परिवार ने लगातार आरोप लगाया है कि यह मुठभेड़ फर्जी थी। परिवार का कहना है कि घटना के वक्त वह आत्मसमर्पण कर चुके थे और निहत्थे थे। परिवार ने यह भी आपत्ति जताई है कि विरोध प्रदर्शन के बाद मृतक के पिता, भाई और कई ग्रामीणों के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है।
याचिकाकर्ता ने एक और अहम सवाल उठाया है — मुठभेड़ से पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें कथित तौर पर भरत तिवारी पिस्तौल लिए दिखाई दे रहे थे। याचिका में पूछा गया है कि यदि वह वास्तव में हथियारबंद थे, तो पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया या हथियार जब्त क्यों नहीं किया।
प्रशासनिक कार्रवाई अब तक
प्रारंभिक प्रशासनिक कदम के तहत इस मामले में चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, शाहपुर पुलिस स्टेशन के एसएचओ को भी निलंबित किया गया है। बिहार सरकार ने एक सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जज से न्यायिक जांच कराने की घोषणा की है, हालाँकि औपचारिक अधिसूचना अभी जारी नहीं हुई है।
बिहार में विरोध प्रदर्शन
इस घटना के बाद बिहार के कई जिलों में आक्रोश फैला है। गोपालगंज में सैकड़ों नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों के सदस्यों ने पोस्ट ऑफिस चौक से थाना चौक तक कैंडल मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि इस मुठभेड़ में कानूनी प्रक्रियाओं और मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ है, और कई ने इसे सुनियोजित हत्या बताया।
कैमूर जिले में भी राजनीतिक कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने भभुआ नगर पालिका मैदान से एकता चौक तक आक्रोश मार्च निकाला और दोषियों के लिए कड़ी सजा की माँग की।
आगे क्या होगा
पटना हाई कोर्ट में दायर इस जनहित याचिका पर सुनवाई की तारीख अभी तय होनी है। न्यायालय का रुख इस बात को तय करेगा कि क्या सरकारी न्यायिक जांच के समानांतर कोई स्वतंत्र जाँच प्रक्रिया शुरू होगी। परिवार और प्रदर्शनकारियों की नज़रें अब अदालत पर टिकी हैं।