10 अगस्त 2026
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भोजपुर एनकाउंटर: भरत तिवारी मौत की जांच सर्वदलीय विधानसभा समिति से हो — बिहार कांग्रेस

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भोजपुर एनकाउंटर: भरत तिवारी मौत की जांच सर्वदलीय विधानसभा समिति से हो — बिहार कांग्रेस

सारांश

भोजपुर में भरत भूषण तिवारी की कथित फर्जी मुठभेड़ में मौत ने बिहार की राजनीति में तूफान ला दिया है। कांग्रेस सर्वदलीय जांच माँग रही है, सरकार ने न्यायिक जांच का आदेश दिया — लेकिन असली सवाल यह है कि दोनों में से कौन सी जांच सच सामने लाएगी।

मुख्य बातें

भरत भूषण तिवारी की भोजपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र में कथित पुलिस मुठभेड़ में मौत हुई।
बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने बिहार विधानसभा की सर्वदलीय समिति से जांच की माँग की।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से न्यायिक जांच के आदेश दिए।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पुलिस ने 'संगठित सुपारी किलर गिरोह' की तरह काम किया।
भरत तिवारी को वंचित वर्ग के अधिकारों के लिए लड़ने वाला सामाजिक कार्यकर्ता बताया गया है।

बिहार के भोजपुर जिले में भरत भूषण तिवारी की कथित पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत का मामला अब राजनीतिक रूप से गरमा गया है। बिहार प्रदेश कांग्रेस ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की जांच बिहार विधानसभा की सर्वदलीय समिति से कराई जाए। इसके साथ ही, बिहार सरकार ने शनिवार, 21 जून को न्यायिक जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

कांग्रेस नेता का भोजपुर दौरा

बिहार प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम रविवार को भोजपुर पहुँचे और भरत भूषण तिवारी के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने परिवार के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों से भी बातचीत कर इस प्रकरण से जुड़े तथ्य जानने की कोशिश की। इस दौरान उनके साथ मिन्नत रहमानी, असित नाथ तिवारी, पंकज यादव और प्रेमचंद सिंह भी मौजूद थे।

कांग्रेस के आरोप और माँगें

राजेश राम ने इस घटना को अत्यंत गंभीर बताते हुए आरोप लगाया कि पुलिस ने इस मामले में एक संगठित सुपारी किलर गिरोह की तरह काम किया। उनके अनुसार, भरत तिवारी एक सामाजिक कार्यकर्ता थे जो दबे-कुचले और वंचित वर्ग के अधिकारों के लिए लड़ते थे, और इसी वजह से वे कथित तौर पर सरकार की नज़रों में खटकते थे।

राजेश राम ने कहा कि इस मामले में न केवल स्थानीय प्रशासन, बल्कि राज्य सरकार की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। उन्होंने माँग की कि निष्पक्ष जांच के लिए बिहार विधानसभा की सर्वदलीय समिति को यह जिम्मेदारी सौंपी जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को उचित सजा मिले।

सरकार की प्रतिक्रिया

बढ़ते राजनीतिक दबाव और विवाद के बीच बिहार सरकार ने शाहपुर थाना क्षेत्र में हुए इस एनकाउंटर की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की कि हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश इस मामले की स्वतंत्र जांच करेंगे और सभी विवादित पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दलों का दबाव लगातार बढ़ रहा था।

आम जनता और परिवार पर असर

गौरतलब है कि भरत भूषण तिवारी की मौत ने स्थानीय स्तर पर गहरी पीड़ा और आक्रोश पैदा किया है। परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि यह एनकाउंटर फर्जी था। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि पार्टी पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रखेगी।

आगे क्या होगा

अब दो समानांतर माँगें सामने हैं — सरकार द्वारा घोषित न्यायिक जांच और विपक्ष की सर्वदलीय विधानसभा समिति जांच की माँग। यह देखना होगा कि बिहार सरकार विपक्ष की माँग पर कोई सकारात्मक कदम उठाती है या नहीं। इस मामले की अगली सुनवाई और जांच समिति के गठन पर सभी की नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि स्वतःस्फूर्त जवाबदेही। सेवानिवृत्त न्यायाधीश की जांच और सर्वदलीय विधानसभा समिति की जांच — दोनों की विश्वसनीयता और दायरे में बड़ा फर्क है। गौरतलब है कि बिहार में पुलिस एनकाउंटर को लेकर यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष ने स्वतंत्र जांच की माँग उठाई हो, लेकिन ऐसे मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने का रिकॉर्ड संदिग्ध रहा है। असली परीक्षा यह होगी कि जांच समिति को गवाहों और साक्ष्यों तक पूरी पहुँच मिलती है या नहीं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भरत भूषण तिवारी कौन थे और उनकी मौत कैसे हुई?
भरत भूषण तिवारी बिहार के भोजपुर जिले के एक सामाजिक कार्यकर्ता थे, जो वंचित और दबे-कुचले वर्ग के अधिकारों के लिए काम करते थे। उनकी मौत शाहपुर थाना क्षेत्र में एक कथित पुलिस मुठभेड़ में हुई, जिसे विपक्ष फर्जी एनकाउंटर बता रहा है।
बिहार कांग्रेस ने क्या माँग की है?
बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने माँग की है कि इस पूरे मामले की जांच बिहार विधानसभा की सर्वदलीय समिति से कराई जाए। उनका कहना है कि इस मामले में स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ राज्य सरकार की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
बिहार सरकार ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
बिहार सरकार ने राजनीतिक दबाव के बीच न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की कि हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश इस मामले की स्वतंत्र जांच करेंगे।
सर्वदलीय विधानसभा समिति जांच और न्यायिक जांच में क्या फर्क है?
न्यायिक जांच सरकार द्वारा नियुक्त सेवानिवृत्त न्यायाधीश करते हैं, जबकि सर्वदलीय विधानसभा समिति में सभी दलों के प्रतिनिधि होते हैं और इसे अधिक राजनीतिक जवाबदेही का माध्यम माना जाता है। विपक्ष का तर्क है कि सरकार-नियंत्रित जांच पूरी तरह निष्पक्ष नहीं हो सकती।
इस मामले में आगे क्या होने की उम्मीद है?
न्यायिक जांच समिति के गठन और उसके दायरे की घोषणा अपेक्षित है। साथ ही, यह देखना होगा कि बिहार सरकार विपक्ष की सर्वदलीय समिति जांच की माँग को स्वीकार करती है या नहीं। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि न्याय मिलने तक वह संघर्ष जारी रखेगी।
राष्ट्र प्रेस
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