भोजपुर मुठभेड़: न्यायिक जांच से सामने आएगी सच्चाई, मंत्री श्रवण कुमार बोले — दोषी बख्शे नहीं जाएंगे
सारांश
मुख्य बातें
बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने 22 जून 2026 को मीडिया से बातचीत में भोजपुर जिले में कथित पुलिस मुठभेड़ के दौरान युवक भरत भूषण तिवारी की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण घटना' बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस मामले में सच्चाई उजागर करने और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
न्यायिक जांच का आदेश
मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस घटना को अत्यंत गंभीरता से लिया है और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा, 'हम इस घटना पर गहरा अफसोस जताते हैं। न्यायिक जांच के माध्यम से दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।' जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि घटना के लिए कौन जिम्मेदार है।
दोषियों पर कठोर कार्रवाई का आश्वासन
मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। बिहार सरकार कानून के राज और सुशासन के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध है, और किसी भी मामले में न्याय से समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दोषियों को कानून के अनुसार कठोर दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना होगा।
निशांत कुमार की पार्टी में भूमिका पर प्रतिक्रिया
मुठभेड़ मामले के अलावा, मंत्री श्रवण कुमार से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार की पार्टी में सक्रिय भूमिका को लेकर भी सवाल किया गया। मंत्री ने कहा कि निशांत कुमार युवा हैं और लंबे समय से पार्टी कार्यकर्ताओं तथा नेताओं की ओर से उन्हें संगठन में सक्रिय जिम्मेदारी देने की मांग की जा रही थी। इसी मांग को देखते हुए उन्हें पार्टी में शामिल किया गया।
मंत्री ने बताया कि पार्टी में शामिल होने के बाद निशांत कुमार संगठन के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं और सरकार के विभिन्न जनहित कार्यक्रमों में भी सकारात्मक भूमिका निभा रहे हैं। श्रवण कुमार ने कहा कि युवा नेतृत्व को अवसर देना समय की आवश्यकता है। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में युवा राजनीतिक भागीदारी को लेकर व्यापक बहस जारी है।
आगे क्या होगा
न्यायिक जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद भोजपुर मुठभेड़ मामले में जिम्मेदारी तय की जाएगी। गौरतलब है कि कथित फर्जी मुठभेड़ के मामले बिहार में पहले भी विवाद का विषय रहे हैं, और इस बार न्यायिक जांच का आदेश सरकार की जवाबदेही के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मामले की अगली सुनवाई और जांच रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हैं।