भरत तिवारी एनकाउंटर: CM सम्राट चौधरी ने न्यायिक आयोग के गठन का ऐलान किया, बोले- दोषी बख्शे नहीं जाएंगे
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी कथित फर्जी एनकाउंटर मामले पर 25 जून 2025 को पहली बार खुलकर सरकार का पक्ष रखा और स्पष्ट किया कि दोषी पाए जाने पर किसी को भी नहीं बख्शा जाएगा। पटना में आयोजित 'संविधान हत्या दिवस' कार्यक्रम के मंच से उन्होंने घोषणा की कि बिहार सरकार ने इस मामले में तत्काल न्यायिक आयोग (ज्यूडिशियल कमीशन) के गठन का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री का बयान और न्यायिक आयोग
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, 'लगातार कोई भी समस्या यदि सामने आती है, तो सरकार तुरंत चिंतित होकर इसको आगे बढ़ाती है। अभी भोजपुर में एक घटना घटी, तुरंत सरकार ने सबसे ऊपर के जो आयोग होते हैं, ज्यूडिशियल कमीशन का गठन करने का काम बिहार सरकार ने किया है। न्याय मिले, कोई यदि गलत है, तो उस पर कार्रवाई होगी।' यह बयान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि सरकार की ओर से इस प्रकरण पर अब तक सीधी और स्पष्ट प्रतिक्रिया बेहद सीमित रही थी।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और विपक्ष का दबाव
भरत तिवारी कथित फर्जी मुठभेड़ मामले को लेकर पिछले कई दिनों से बिहार की राजनीति गरमाई हुई है। विपक्षी दल सरकार पर लगातार हमलावर हैं और मामले की निष्पक्ष जांच की माँग कर रहे हैं। पीड़ित परिवार भी न्यायिक जांच के साथ-साथ ठोस कार्रवाई की माँग उठा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
सहयोग शिविर और जवाबदेही तंत्र
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में सरकार की 'सहयोग शिविर' योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत अब तक लगभग 3.70 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं और हजारों मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। सरकार ने एक सख्त जवाबदेही तंत्र लागू किया है जिसमें आवेदन मिलने के 10 दिन के भीतर कार्रवाई न होने पर संबंधित अधिकारी को मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से पहला नोटिस जारी किया जाता है।
20 दिन तक कार्रवाई न होने पर दूसरा नोटिस और 25 दिन के बाद अंतिम चेतावनी दी जाती है। सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि यदि 30 दिनों के भीतर भी संबंधित आवेदन पर आदेश जारी नहीं होता, तो 31वें दिन उस अधिकारी को सीधे निलंबित करने का आदेश मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी किया जाएगा।
आगे क्या होगा
अब सभी की निगाहें न्यायिक आयोग की जांच प्रक्रिया और उसके निष्कर्षों पर टिकी हैं। गौरतलब है कि न्यायिक आयोग की रिपोर्ट बाध्यकारी नहीं होती, परंतु यह सरकार को कार्रवाई का नैतिक और कानूनी आधार प्रदान करती है। विपक्ष की माँग है कि जांच पूरी तरह स्वतंत्र और पारदर्शी हो। मामले का राजनीतिक और प्रशासनिक असर आने वाले हफ्तों में और स्पष्ट होगा।