10 अगस्त 2026
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भरत तिवारी एनकाउंटर: CM सम्राट चौधरी ने न्यायिक आयोग के गठन का ऐलान किया, बोले- दोषी बख्शे नहीं जाएंगे

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भरत तिवारी एनकाउंटर: CM सम्राट चौधरी ने न्यायिक आयोग के गठन का ऐलान किया, बोले- दोषी बख्शे नहीं जाएंगे

सारांश

भरत तिवारी कथित फर्जी एनकाउंटर मामले पर बिहार सरकार की पहली सीधी प्रतिक्रिया — CM सम्राट चौधरी ने न्यायिक आयोग के गठन का ऐलान किया और दोषियों पर कार्रवाई का वादा किया। विपक्ष के लगातार दबाव और पीड़ित परिवार की माँगों के बीच यह बयान राजनीतिक रूप से निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।

मुख्य बातें

CM सम्राट चौधरी ने 25 जून 2025 को पटना में भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले पर बिहार सरकार की पहली खुली प्रतिक्रिया दी।
बिहार सरकार ने भोजपुर घटना की जांच के लिए तत्काल न्यायिक आयोग (ज्यूडिशियल कमीशन) के गठन का निर्णय लिया।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि दोषी पाए जाने पर किसी को नहीं बख्शा जाएगा।
'सहयोग शिविर' अभियान के तहत अब तक 3.70 लाख आवेदन प्राप्त हुए; 30 दिन में निस्तारण न होने पर अधिकारी का सीधा निलंबन।
विपक्ष निष्पक्ष जांच की माँग पर अडिग; पीड़ित परिवार भी ठोस कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठा है।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी कथित फर्जी एनकाउंटर मामले पर 25 जून 2025 को पहली बार खुलकर सरकार का पक्ष रखा और स्पष्ट किया कि दोषी पाए जाने पर किसी को भी नहीं बख्शा जाएगा। पटना में आयोजित 'संविधान हत्या दिवस' कार्यक्रम के मंच से उन्होंने घोषणा की कि बिहार सरकार ने इस मामले में तत्काल न्यायिक आयोग (ज्यूडिशियल कमीशन) के गठन का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री का बयान और न्यायिक आयोग

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, 'लगातार कोई भी समस्या यदि सामने आती है, तो सरकार तुरंत चिंतित होकर इसको आगे बढ़ाती है। अभी भोजपुर में एक घटना घटी, तुरंत सरकार ने सबसे ऊपर के जो आयोग होते हैं, ज्यूडिशियल कमीशन का गठन करने का काम बिहार सरकार ने किया है। न्याय मिले, कोई यदि गलत है, तो उस पर कार्रवाई होगी।' यह बयान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि सरकार की ओर से इस प्रकरण पर अब तक सीधी और स्पष्ट प्रतिक्रिया बेहद सीमित रही थी।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और विपक्ष का दबाव

भरत तिवारी कथित फर्जी मुठभेड़ मामले को लेकर पिछले कई दिनों से बिहार की राजनीति गरमाई हुई है। विपक्षी दल सरकार पर लगातार हमलावर हैं और मामले की निष्पक्ष जांच की माँग कर रहे हैं। पीड़ित परिवार भी न्यायिक जांच के साथ-साथ ठोस कार्रवाई की माँग उठा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

सहयोग शिविर और जवाबदेही तंत्र

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में सरकार की 'सहयोग शिविर' योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत अब तक लगभग 3.70 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं और हजारों मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। सरकार ने एक सख्त जवाबदेही तंत्र लागू किया है जिसमें आवेदन मिलने के 10 दिन के भीतर कार्रवाई न होने पर संबंधित अधिकारी को मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से पहला नोटिस जारी किया जाता है।

20 दिन तक कार्रवाई न होने पर दूसरा नोटिस और 25 दिन के बाद अंतिम चेतावनी दी जाती है। सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि यदि 30 दिनों के भीतर भी संबंधित आवेदन पर आदेश जारी नहीं होता, तो 31वें दिन उस अधिकारी को सीधे निलंबित करने का आदेश मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी किया जाएगा।

आगे क्या होगा

अब सभी की निगाहें न्यायिक आयोग की जांच प्रक्रिया और उसके निष्कर्षों पर टिकी हैं। गौरतलब है कि न्यायिक आयोग की रिपोर्ट बाध्यकारी नहीं होती, परंतु यह सरकार को कार्रवाई का नैतिक और कानूनी आधार प्रदान करती है। विपक्ष की माँग है कि जांच पूरी तरह स्वतंत्र और पारदर्शी हो। मामले का राजनीतिक और प्रशासनिक असर आने वाले हफ्तों में और स्पष्ट होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ऐसे आयोगों की रिपोर्टें अक्सर वर्षों तक लंबित रहती हैं और उनकी सिफारिशें बाध्यकारी नहीं होतीं। असली कसौटी यह होगी कि आयोग की समयसीमा क्या तय की गई है और क्या उसके निष्कर्षों पर सरकार वास्तव में कार्रवाई करती है। विपक्ष का दबाव और पीड़ित परिवार की माँग को देखते हुए, यह बयान राजनीतिक प्रबंधन से अधिक ठोस न्याय की दिशा में कदम साबित होना चाहिए — जो केवल आयोग की स्वतंत्रता और पारदर्शिता से ही सुनिश्चित होगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामला क्या है?
यह बिहार के भोजपुर जिले में हुई एक कथित फर्जी पुलिस मुठभेड़ का मामला है, जिसे लेकर विपक्ष और पीड़ित परिवार निष्पक्ष जांच की माँग कर रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकार ने न्यायिक आयोग गठित करने का निर्णय लिया है।
CM सम्राट चौधरी ने इस मामले में क्या कहा?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 25 जून 2025 को पटना में कहा कि भोजपुर घटना को सरकार ने गंभीरता से लिया है और तत्काल न्यायिक आयोग गठित किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोषी पाए जाने पर कार्रवाई तय है।
बिहार सरकार ने न्यायिक आयोग क्यों गठित किया?
विपक्ष के लगातार दबाव और पीड़ित परिवार की माँगों के बीच सरकार ने मामले की उच्चस्तरीय जांच सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक आयोग गठित किया। यह कदम मामले की संवेदनशीलता और राजनीतिक दबाव को देखते हुए उठाया गया है।
बिहार सरकार की 'सहयोग शिविर' योजना क्या है?
यह एक जवाबदेही-आधारित प्रशासनिक योजना है जिसके तहत अब तक 3.70 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसमें 10, 20 और 25 दिन पर नोटिस और 30 दिन में कार्रवाई न होने पर 31वें दिन संबंधित अधिकारी को सीधे निलंबित करने का प्रावधान है।
भरत तिवारी मामले में आगे क्या होगा?
अब न्यायिक आयोग की जांच प्रक्रिया और उसके निष्कर्षों पर सबकी निगाहें टिकी हैं। विपक्ष स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की माँग पर अडिग है, जबकि पीड़ित परिवार ठोस कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठा है।
राष्ट्र प्रेस
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