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भरत तिवारी फर्जी एनकाउंटर: तेजस्वी यादव बोले — 'बिना सीएम की अनुमति के एनकाउंटर नहीं होता'

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भरत तिवारी फर्जी एनकाउंटर: तेजस्वी यादव बोले — 'बिना सीएम की अनुमति के एनकाउंटर नहीं होता'

सारांश

भरत तिवारी कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में आरोपी एसडीपीओ को नई पदस्थापना मिलते ही तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार पर सीधा हमला बोला — 'बिना सीएम की अनुमति के एनकाउंटर नहीं होता।' विपक्ष इसे दिखावटी कार्रवाई और सरकारी संरक्षण का प्रमाण बता रहा है।

मुख्य बातें

तेजस्वी यादव ने 2 जुलाई को भरत तिवारी कथित फर्जी एनकाउंटर मामले पर बिहार सरकार को घेरा।
आरोपी एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा को नई जिम्मेदारी दिए जाने पर विपक्ष ने तीखा एतराज जताया।
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि 'बिना मुख्यमंत्री की अनुमति के किसी की हिम्मत नहीं' — सीधे शीर्ष नेतृत्व पर निशाना।
मामले में दर्ज प्राथमिकी में कई पुलिसकर्मी नामजद आरोपी हैं।
बिहार सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने भोजपुर के कथित फर्जी भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार सरकार पर तीखा प्रहार किया है। 2 जुलाई को पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में नामजद आरोपी अधिकारी को नई जिम्मेदारी सौंपना यह साबित करता है कि सरकार केवल दिखावटी कार्रवाई कर रही है।

मुख्य आरोप और बयान

तेजस्वी यादव ने सीधे मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, 'बिना मुख्यमंत्री की अनुमति के किसी की हिम्मत ही नहीं है। गृह मंत्री भी वही हैं। पहले अधिकारी द्वारा उनको मैसेज भेजा गया, तब एनकाउंटर हुआ है। अब केवल दिखावटी कार्रवाई हो रही है।' उन्होंने यह भी कहा कि 'सत्ता में बैठे लोग पूरे मामले की सच्चाई जानते हैं।'

राजद नेता ने दावा किया कि बिहार में अपराधियों और दोषी अधिकारियों को सरकारी संरक्षण मिल रहा है, जिसके चलते पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पा रहा। उन्होंने कहा, 'यहाँ जो भी अपराधी हैं, उनको संरक्षण मिलता है। सही तरीके से सुनवाई और कार्रवाई नहीं हो पाती है।'

आरोपी अधिकारी को नई जिम्मेदारी — विवाद का केंद्र

इस विवाद की तात्कालिक वजह है — जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा को नई जिम्मेदारी दिया जाना। भरत तिवारी कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में दर्ज प्राथमिकी में राजेश कुमार शर्मा सहित कई पुलिसकर्मियों को नामजद आरोपी बनाया गया है। विपक्ष इस नियुक्ति को सरकार की मंशा पर सीधा सवाल बता रहा है।

तेजस्वी यादव ने माँग की कि सरकार स्पष्ट करे कि आरोपी अधिकारियों के विरुद्ध अब तक क्या ठोस कार्रवाई हुई है और उन्हें नई जिम्मेदारी किस आधार पर सौंपी गई।

भरत तिवारी एनकाउंटर मामला — पृष्ठभूमि

भोजपुर जिले में हुआ कथित भरत तिवारी फर्जी एनकाउंटर काफी समय से राजनीतिक और कानूनी विवाद का विषय बना हुआ है। मामले में पुलिसकर्मियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज है और विपक्ष लगातार निष्पक्ष जाँच की माँग करता रहा है। यह ऐसे समय में और अधिक गरमाया है जब आरोपी अधिकारी को पदस्थापना दी गई है।

सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति

बिहार सरकार की ओर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। गौरतलब है कि राजद सहित अन्य विपक्षी दल इस मुद्दे पर लगातार सरकार को घेरते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि जब तक आरोपी अधिकारियों को निलंबित कर स्वतंत्र जाँच नहीं होती, तब तक पीड़ित परिवार को न्याय मिलना मुश्किल है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक राजनीतिक संदेश की तरह पढ़ा जा सकता है। तेजस्वी यादव का बयान भले ही विपक्षी राजनीति की भाषा में हो, लेकिन उनका मूल सवाल — कि जाँच के दौरान आरोपी को पदोन्नति क्यों — वैध है और जवाब माँगता है। बिहार में कथित फर्जी एनकाउंटर के मामले नए नहीं हैं; असली परीक्षा यह है कि क्या न्यायिक प्रक्रिया राजनीतिक दबाव से स्वतंत्र रह पाती है।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भरत तिवारी कथित फर्जी एनकाउंटर मामला क्या है?
यह भोजपुर जिले में हुआ एक कथित फर्जी पुलिस एनकाउंटर है जिसमें कई पुलिसकर्मियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामला राजनीतिक और कानूनी विवाद का विषय बना हुआ है और विपक्ष लगातार निष्पक्ष जाँच की माँग कर रहा है।
तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार पर क्या आरोप लगाए?
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि एनकाउंटर बिना मुख्यमंत्री की सहमति के संभव नहीं था और सरकार केवल दिखावटी कार्रवाई कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में अपराधियों और दोषी अधिकारियों को सरकारी संरक्षण मिल रहा है।
एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा को नई जिम्मेदारी देने पर विवाद क्यों है?
जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की प्राथमिकी में नामजद आरोपी हैं। मामला अभी भी सक्रिय होने के बावजूद उन्हें नई पदस्थापना दिए जाने को विपक्ष सरकार की मंशा पर सवाल उठाने वाला कदम बता रहा है।
इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
मामले में दर्ज प्राथमिकी में कई पुलिसकर्मियों को नामजद आरोपी बनाया गया है। हालाँकि, बिहार सरकार की ओर से आरोपी अधिकारियों के विरुद्ध की गई ठोस कार्रवाई का अब तक सार्वजनिक विवरण सामने नहीं आया है।
इस मामले में आगे क्या होने की संभावना है?
विपक्ष आरोपी अधिकारियों के निलंबन और स्वतंत्र जाँच की माँग पर अड़ा है। राजनीतिक दबाव बढ़ने के साथ बिहार सरकार को जल्द ही अपना पक्ष स्पष्ट करना पड़ सकता है, अन्यथा यह मुद्दा आगामी राजनीतिक बहसों में और उभरेगा।
राष्ट्र प्रेस
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