भरत तिवारी एनकाउंटर पर जदयू सांसद कौशलेंद्र कुमार बोले — 'सरेंडर के बाद एनकाउंटर बिल्कुल ठीक नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
जदयू सांसद कौशलेंद्र कुमार ने 23 जून को पटना में स्पष्ट शब्दों में कहा कि भरत तिवारी एनकाउंटर किसी भी दृष्टि से उचित नहीं था। उनका कहना था कि जब कोई व्यक्ति पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर देता है, तो उसे हिरासत में लिया जाना चाहिए — एनकाउंटर नहीं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार में यह मामला सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए राजनीतिक तनाव का केंद्र बन चुका है।
मुख्य घटनाक्रम
कौशलेंद्र कुमार ने कहा, 'कुछ लोगों का दावा है कि जब भरत तिवारी ने सरेंडर कर दिया तो एनकाउंटर क्यों किया गया — यह स्वाभाविक सवाल है और यह एनकाउंटर नहीं होना चाहिए था।' उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस मामले में केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के कुछ नेता भी सरकार के रुख पर सवाल उठा रहे हैं।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली बिहार सरकार इस एनकाउंटर को लेकर आम जनता और विपक्षी दलों की तीखी आलोचना का सामना कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में पुलिस की जवाबदेही को लेकर पहले से बहस जारी है।
निशांत कुमार और जदयू का भविष्य
एनकाउंटर विवाद के अलावा कौशलेंद्र कुमार ने बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार को जदयू का भावी नेतृत्व बताया। उन्होंने कहा, 'सिर्फ हम नहीं, पूरा बिहार नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को बिहार के भविष्य के रूप में देख रहा है।' उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के सभी कार्यकर्ता निशांत कुमार को आगे बढ़ाने के लिए पूरी ताकत लगाएँगे।
नीतीश कुमार की बिहार यात्रा और संगठन विस्तार
जदयू सांसद ने नीतीश कुमार की हालिया बिहार यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित होने के बाद नीतीश कुमार ने घोषणा की है कि वे संसद सत्र के दौरान दिल्ली में रहेंगे और शेष समय बिहार को देंगे। उन्होंने हर जिले का दौरा करने और संगठन को मजबूत करने का भी संकल्प जताया है।
कौशलेंद्र कुमार ने कहा कि नीतीश कुमार ने जनता के बीच लगातार 20 वर्षों तक काम किया है और उसी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए वे सक्रिय रहेंगे।
आगे क्या
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सत्ता पक्ष के भीतर से उठती आवाज़ें बिहार सरकार पर दबाव बढ़ा सकती हैं। आलोचकों का कहना है कि इस मामले की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। जदयू के भीतर नेतृत्व उत्तराधिकार की चर्चा भी आने वाले समय में पार्टी की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।