भरत तिवारी एनकाउंटर: पप्पू यादव का आरोप — 'बड़ी मछलियों को बचाने के लिए रची गई साजिश'
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के भोजपुर में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इस पूरे प्रकरण को एक सुनियोजित षड्यंत्र करार दिया है। उनका आरोप है कि यह कार्रवाई 'बड़ी मछलियों' को बचाने के लिए की गई।
पप्पू यादव के आरोप
सांसद पप्पू यादव ने कहा, 'बड़ी मछलियों को बचाने के लिए बार-बार कई साजिशें रची गईं। भरत तिवारी एक साधारण समाज-सेवक थे जो जमुनिया गांव के बेघर हुए गरीबों के लिए लड़ते थे।' उन्होंने आरोप लगाया कि हेडक्वार्टर में बैठे वरिष्ठ अधिकारी खुद को कानून, संविधान और लोकतंत्र से ऊपर समझते हैं और सिस्टम का दुरुपयोग कर करोड़ों कमाते हैं।
यादव ने सवाल उठाया कि 'क्या यह हत्या हेडक्वार्टर की मिलीभगत के बिना हुई?' — यह सवाल मामले की जाँच की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।
एसटीएफ और वरिष्ठ अधिकारियों पर सवाल
पप्पू यादव ने माँग की कि जाँच में यह स्पष्ट किया जाए कि हेडक्वार्टर से डीएसपी को किसने फोन किया, यह मामला किस स्तर तक गया और किन वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क हुआ। उन्होंने कहा कि डीएसपी ने स्वयं इनकार कर दिया था, लेकिन बाद में एसटीएफ की टीम भेजकर भरत तिवारी को मरवाया गया। उनका यह भी कहना था कि 'भरत तिवारी के अंदरुनी जगहों पर गोली मारी गई', जो एक फर्जी मुठभेड़ की ओर संकेत करता है।
व्यापक सामाजिक मुद्दों पर भी निशाना
यादव ने इस अवसर पर बिहार में कई अन्य गंभीर घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि खाने-पीने जैसी मामूली बात पर पासवान समुदाय के दो लोगों की हत्या कर दी गई, फिर भी कोई न्याय दिलाने नहीं पहुँचा। उन्होंने जीतनराम मांझी और चिराग पासवान जैसे नेताओं पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया।
इसके अलावा उन्होंने एक अत्यंत पिछड़े समुदाय की बेटी के साथ दो बार हुए गैंगरेप, नौसा नगर में जातिगत पहचान के आधार पर करीब 100 महिलाओं की हत्या और एक डिग्री कॉलेज में आंदोलन के चलते छात्राओं व शिक्षक को जेल भेजे जाने की घटनाओं पर भी मौन तोड़ा।
भरत तिवारी की 'शहादत' पर यादव का बयान
पप्पू यादव ने कहा, 'भरत तिवारी का एनकाउंटर गलत था। सवाल सिर्फ एनकाउंटर का नहीं, पूरे सिस्टम पर है।' उन्होंने यह भी कहा कि भरत तिवारी की शहादत कई बच्चों के भविष्य को बचा सकती है और कानून की स्थापना कर सकती है।
आगे क्या होगा
मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है और मामले की जाँच जारी है। राजनीतिक दबाव बढ़ने के साथ यह देखना होगा कि बिहार सरकार उच्च-स्तरीय जाँच के लिए कोई कदम उठाती है या नहीं। इस मामले ने राज्य में पुलिस जवाबदेही और सामाजिक न्याय के व्यापक सवालों को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।