भोजपुर एनकाउंटर: जीतनराम मांझी बोले — भरत तिवारी क्रांतिकारी नहीं, जातिवादी मानसिकता से हो रहा समर्थन
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के भोजपुर में कथित पुलिस मुठभेड़ में भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने मंगलवार, 23 जून को स्पष्ट रुख अपनाते हुए पुलिस की कार्रवाई को उचित ठहराया और कहा कि भरत तिवारी कोई क्रांतिकारी नहीं था। मांझी के अनुसार, उसे जो समर्थन मिल रहा है वह जातिवादी मानसिकता से प्रेरित है।
मांझी का एक्स पर पोस्ट: सीधा हमला
केंद्रीय मंत्री मांझी ने सोशल नेटवर्किंग साइट एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि दलितों या मुसलमानों के एनकाउंटर पर चुप रहने वाले लोग ही अब भरत तिवारी के मामले में सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने लिखा, 'दलितों का एंकाउंटर हो तो नक्सली था मारा गया, मुसलमान का एंकाउंटर हो तो आतंकवादी था मारा गया, ऐसा कहने वाले लोग ही भरत तिवारी के एंकाउंटर पर सवाल उठा रहे हैं।' उन्होंने यह भी पूछा कि भरत तिवारी के पास अवैध पिस्टल कहाँ से आई।
भरत तिवारी का आपराधिक इतिहास: मांझी का दावा
मांझी ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि भरत तिवारी पूर्व में भी आपराधिक मामलों में गिरफ्तार हो चुका था। उन्होंने लिखा, 'भरत तिवारी कोई क्रांतिकारी नहीं था, जिसका जातिवादी मानसिकता के लोग समर्थन कर रहे हैं।' साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि किन लोगों की शह पर इस मामले का राजनीतिकरण हो रहा है।
पुलिस मनोबल और कानून-व्यवस्था पर जोर
मांझी ने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति हथियार लेकर पुलिस के सामने खड़ा हो, तो पुलिस के पास कार्रवाई के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। उनके अनुसार, पुलिस पर लगातार सवाल उठाने से कानून-व्यवस्था कमजोर होती है और पुलिसकर्मियों का मनोबल प्रभावित होता है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में यह भी लिखा, 'लश्कर भी तुम्हारा है सरदार तुम्हारा है, तुम झूठ को सच लिख दो अखबार तुम्हारा है।'
एनडीए में अलग-अलग सुर, न्यायिक जांच का आदेश
गौरतलब है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर इस मुद्दे पर एकमत नहीं है। जहाँ मांझी पुलिस को क्लीनचिट दे रहे हैं, वहीं एनडीए के कई अन्य नेता निष्पक्ष जांच की माँग कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घटना की पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भोजपुर एनकाउंटर को लेकर सामाजिक और राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है।
आगे क्या होगा
न्यायिक जांच के आदेश के बाद अब सभी की निगाहें उस रिपोर्ट पर टिकी हैं जो यह तय करेगी कि मुठभेड़ वास्तविक थी या कथित। मांझी के बयान ने इस मामले को जाति और राजनीति के चश्मे से देखे जाने की बहस को और तेज कर दिया है।