भरत तिवारी एनकाउंटर: भोजपुर पुलिस ने एसटीएफ अधिकारी को गिरफ्तार किया, न्यायिक जांच जारी
सारांश
मुख्य बातें
भोजपुर पुलिस ने भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में एक एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) अधिकारी को गिरफ्तार किया है। आरोपी अधिकारी पर भरत तिवारी को गोली मारने का आरोप है। 31 जुलाई को सामने आई इस गिरफ्तारी की जानकारी के अनुसार, आगे की कानूनी कार्रवाई प्रक्रियाधीन है।
मामले का पृष्ठभूमि
भोजपुर जिले के बिलौटी गाँव के निवासी भरत तिवारी की मृत्यु 17 जून को एक पुलिस एनकाउंटर में हुई थी। पुलिस के बयान के अनुसार, भरत के पास हथियार था और उसने कथित तौर पर पुलिस टीम पर पहले गोली चलाई, जिसके जवाब में पुलिस ने भी फायरिंग की, जिसमें भरत की मौत हो गई।
हालाँकि, परिवार ने पुलिस के इस बयान पर गंभीर सवाल उठाए हैं। भरत की माँ आशा देवी का आरोप है कि उनके बेटे ने सरेंडर करने का प्रयास किया था, बावजूद इसके पुलिस ने उसे गोली मार दी। परिवार का स्पष्ट आरोप है कि यह एनकाउंटर बनावटी था और भरत की जानबूझकर हत्या की गई।
मुख्यमंत्री का हस्तक्षेप और परिवार से मुलाकात
इस गिरफ्तारी से पहले बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भरत तिवारी की माँ आशा देवी और परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात की थी। इस मुलाकात में उन्होंने परिवार को आश्वस्त किया कि मामले में न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।
परिवार ने एनकाउंटर में शामिल दो अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की थी। यह ऐसे समय में आया है जब एसडीपीओ राजेश शर्मा को पटना स्थित नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में डीएसपी के पद पर नई पोस्टिंग दी गई, जिस पर परिवार ने असंतोष जताया।
अन्य अधिकारियों पर कार्रवाई
इस मामले से जुड़े एक अन्य अधिकारी, जगदीशपुर के एसडीएम संजीत कुमार को सम्राट चौधरी के आदेश पर उनके पद से हटाकर पटना मुख्यालय से संलग्न कर दिया गया है। गिरफ्तार एसटीएफ अधिकारी की पहचान अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
न्यायिक जांच की स्थिति
भरत तिवारी की मौत के मामले में न्यायिक जांच अभी भी जारी है। गौरतलब है कि यह मामला बिहार में फर्जी एनकाउंटर के आरोपों की व्यापक बहस के बीच सामने आया है। आलोचकों का कहना है कि एसडीपीओ की नई पोस्टिंग जैसे कदम न्याय की भावना के विपरीत हैं। आने वाले दिनों में न्यायिक जांच के निष्कर्ष इस मामले की दिशा तय करेंगे।